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India expects China to ensure expeditious restoration of peace in border areas: MEA

WEB DESK /AMN / NEW DELHI

Even as India and China were engaged in discussions through established diplomatic and military channels to address the situation along the LAC, the MEA spokesperson said that India expects the Chinese side to sincerely follow up and ensure the expeditious restoration of peace and tranquility in the border areas.

The spokesperson said, the senior Commanders of the two sides had met on 6th, 22nd and 30th June.

Diplomatic engagements are also continuing in parallel and last week on 24th June a meeting of the Working Mechanism for Consultation and Coordination, WMCC on India China border affairs was also held. The senior commanders meeting held on 30th June at Chushul was the third senior military commander level engagement to discuss issues related to disengagement at the face off site along the LAC and de-escalation from the border areas.

MEA spokesperson Anurag Srivastava said, both sides have emphasised the need for an expeditious, phased and step wise de-escalation as a priority. This is in keeping with the agreement between External Affairs Minister and his Chinese counterpart during their conversation on 17th June that the overall situation would be handled in a responsible manner and that both sides would implement the disengagement understanding of 6th June sincerely. The discussion in the latest meetings of senior commanders reflected the commitment of both sides to reduce the tensions along the LAC. The two sides will continue their meetings both at the military and diplomatic levels including under the framework of WMCC in the future to resolve the issue to mutual satisfaction. The spokesperson said, India expects the Chinese side to sincerely follow up and ensure the expeditious restoration of peace and tranquility in the border areas.

Replying to queries on banning of apps, Mr Srivastava said that naturally while operating in India, they have to abide by Indian rules and regulations issued by the relevant Ministries and Departments, including those pertaining to data security and privacy of individual data. He said, India will continue to welcome foreign investments in India, including in the area of internet technologies, but this will have to be in accordance with the rules and regulatory framework established by the Government. He added that India has one of the most open regimes in the world for attracting Foreign Direct Investment.

In the last few years, Government has taken a host of measures for creating of a more investor-friendly regime. Similarly in the area of digital technology and internet, India has adopted a very open regime. He said, India is today one of the world’s largest markets for digital and internet technologies with more than 680 million subscribers. The world’s largest software and internet applications companies are present in India.

मानव संसाधन विकास मंत्री ने कक्षा 1-5 के लिए वैकल्पिक अकादमिक कैलेंडर जारी किया

MAN / NEW DELHI

मानव संसाधन विकास मंत्री डॉ रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 5) के छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए आज यहाँ पर राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा बनाया गया आठ हफ्ते का वैकल्पिक अकादमिक कैलेंडर जारी किया.

इसके पहले माननीय मंत्री जी ने पहले चार हफ्ते के लिए एक वैकल्पिक कैलेंडर अप्रैल में जारी किया था.

इस वैकल्पिक अकादमिक कैलेंडर को बनाते समय नई तकनीकों एवं सोशल मीडिया को तरजीह दी गयी है जिससे कि बच्चे घर पर इन तकनीकों के प्रयोग से आनंदपूर्वक और रुचिपूर्ण ढंग से शिक्षा ग्रहण कर अपनी पढाई अनवरत जारी रख सकें.

इस अवसर पर मानव संसाधन विकास मंत्री श्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने कहा: ” मानव संसाधन विकास मंत्रालय छात्रों की शैक्षणिक गतिविधियों को लगातार जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है. साथ ही इस आठ सप्ताह के कैलेंडर में यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि छात्रों को कम से कम समय कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बिताना पड़े. इस कैलेंडर के द्वारा सभी छात्र, जिनके पास इंटरनेट सुविधा है वो भी और जिनके पास नहीं है वो भी, शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं. इस वैकल्पिक कैलेंडर में अध्यापकों के लिए ये दिशानिर्देश भी हैं कि वो विद्यार्थियों को मोबाइल पर एस.एम.एस भेजकर या फ़ोन पर कॉल कर के उनका मार्गदर्शन करें. इंटरनेट सुविधा उपलब्ध होने की स्थिति में अध्यापक, अभिभावक और बच्चे व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्वीटर, टेलीग्राम, गूगल मेल और गूगल हैंगऑउट द्वारा एक दूसरे से जुड़ सकते हैं और पढाई जारी रख सकते हैं.”

इस कैलेंडर में दिव्यांग बच्चों की जरूरतों का भी ध्यान रखा गया है. ऑडियो बुक्स, रेडियो कार्यक्रमों, आदि के द्वारा छात्रों की जरूरतों को पूरा किया जायेगा.

इस कैलेंडर को सप्ताहवार दिया गया है और इसमें पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तक के अध्याय या विषय से संबंधित रुचिकर और चुनौतीपूर्ण गतिविधियाँ सम्मिलित हैं। इस कैलेंडर की सबसे प्रमुख बात यह है कि इन गतिविधियों की मैपिंग छात्रों की सीखने के प्रतिफलों के साथ की गई है. इसके द्वारा अभिभावक और अध्यापक बच्चों की प्रगति पर भी नजर बनाये रखेंगे और पाठ्यपुस्तकों के अलावा भी बच्चों को नई चीज़ें सीखने के लिए प्रेरित करेंगे.

इस कैलेंडर में अनुभव आधारित शिक्षा के लिए कला और शारीरिक शिक्षा के साथ साथ योग भी शामिल किया गया है. तनाव और चिंता को दूर करने के तरीके भी इस कैलेंडर में सुझाये गए हैं. फ़िलहाल इस कैलेंडर में चार भाषाओँ के विषयों को शामिल किया गया है — संस्कृत, उर्दू, हिंदी और अंग्रेजी. इस वैकल्पिक कैलेंडर में ई-पाठशाला, एनआरओईआर और दीक्षा पोर्टल पर अध्यायवार उपलब्ध सामग्री को भी शामिल किया गया है.

यह विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों और स्कूल के प्राचार्यों को सशक्त करेगा, ऑनलाइन संसाधनो का उपयोग कर सकारात्मक तरीकों से कोविड-19 की चुनौतियों का सामना करने में तथा बच्चो को घर पर ही उत्तम शिक्षा उपलब्ध करवाने में मदद करेगा.

India committed to strengthening friendship with Nepal: MEA

AMN / NEW DELHI

New Delhi is committed towards continuously strengthening the age old civilization ties of friendship between India and Nepal, said India’s External Affairs Ministry spokesperson Anurag Srivastava while briefing media.

He said that on trade front, both sides have worked hard and diligently to ensure smooth flow of trade between the two countries.

He said that even during the times of most stringent Covid-19 lockdown measures in India, the movement of trade in goods and supplies have continued smoothly.

Regarding embankment issue, Mr Srivastava said, repair and maintenance of embankments is being carried out regularly by the concerned state governments under the established mechanisms.

On Pakistan accusing India of instigating Karachi attacks, the spokesperson said, India rejects these absurd comments on terrorist attacks in Karachi. He said Pakistan cannot shift the blame on India for its domestic problems. He asked Pakistan to reflect on this and on their own government’s position including their Prime Minister’s deion of a global terrorist as a martyr.

Covid recovery rate reaches nearly 60% in India

More than 90 lakh samples tested so far

AGENCIES / NEW DELHI

The recovery rate of COVID-19 patients in India is fast moving to touch 60 percent. Currently, the recovery rate is 59.52 percent.

During the last 24 hours, 11,881 patients have been cured taking the cumulative figure to over 3. 59 lakh. Presently, there are 2,26,947 active cases and all are under medical supervision.

Maharashtra with 93,154 cured cases, is leading in the list of 15 States in terms of absolute numbers of COVID-19 recovered cases followed by Delhi with 59,992 cured case and Tamil Nadu with 52, 926 recovered patients. In a statement, Health Ministry said, the coordinated efforts at all levels of government for prevention, containment and management of COVID-19 are showing encouraging results with consistently increasing gap between recoveries and active cases.

As on date, there are 1,32,912 recovered cases more than the active COVID-19 cases. Timely clinical management of COVID-19 cases has resulted in more than ten thousand daily recoveries.

As per the “Test, Trace, Treat” strategy, there has been a steady rise in the samples tested every day with more than 90 lakh samples being tested till date. In the last 24 hours, over 2. 29 lakh samples have been tested.

The testing lab network in the country is further strengthened. With 768 labs in the government sector and 297 private labs, there are as many as 1065 labs in the country.

‘निजीकरण’ की राह पर चल पड़ी भारतीय रेल !

प्रवीण कुमार

अंदेशा तो पहले से ही था, लेकिन अब वह पूरी तरह से होने जा रहा है। हम बात कर रहे हैं भारतीय रेल के निजीकरण की। मुझे याद है 22 नवंबर 2019 शुक्रवार का वो दिन जब रेल मंत्री पीयूष गोयल ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि रेलवे भारत और देशवासियों की संपत्ति है और आगे भी रहेगी। गोयल ने रेलवे के निजीकरण की संभावाओं को खारिज करते हुए तब कहा था कि सरकार रेलवे का निजीकरण नहीं कर रही है, बल्कि यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए निजी कंपनियों से कॉमर्शियल और ऑन-बोर्ड सेवाओं की आउटसोर्सिंग कर रही है।

मालिकाना हक रेलवे के पास ही रहेगा। हम केवल लाइसेंस दे रहे हैं। हमारे देश की जनता बहुत भोली है। मंत्री जी का संसद में दिया बयान सुन लिया, समझ लिया और मान लिया। लेकिन सरकार कहां मानने वाली। वक्त का इंतजार किया और कोरोना महामारी व लॉकडाउन के दौरान आपदा एक्ट का फायदा उठाते हुए यात्री ट्रेन सेवा के संचालन के लिए पहली बार खुले तौर पर निजी कंपनियों के दरवाजे खोल दिए। इसके तहत देश में 109 गंतव्य मार्गों पर निजी कंपनियां यात्री ट्रेनों का संचालन कर सकेंगी। सरकार का अनुमान है कि इसमें 30 हजार करोड़ रुपये का निवेश हो सकता है। हालांकि इसकी शुरूआत तो तभी हो गई थी जब आईआरसीटीसी ने सरकारी पटरी पर पहली निजी ट्रेन तेजस का संचालन शुरू किया था।

दरअसल, मोदी सरकार का यह फैसला उस बिबेक देबरॉय समिति की उस रिपोर्ट का हिस्सा है जिसे वर्ष 2014 में रेलवे बोर्ड ने प्रमुख रेल परियोजनाओं के लिये संसाधन जुटाने और रेलवे बोर्ड के पुनर्गठन के लिए सुझाव देने को कहा था। इसका साथ दिया नीति आयोग ने भी। देबरॉय समिति ने वर्ष 2015 में अपनी रिपोर्ट पेश की थी जिसमें रेल के डिब्बों तथा इंजन के निजीकरण की बात साफतौर पर कही गई थी। समिति ने कहा था कि रेलवे के बुनियादी ढांचे के लिए एक अलग कंपनी का निर्माण करना चाहिए और ट्रेनों के संचालन का काम निजी हाथों में सौंपा जाना जरूरी है। रेलवे में निचले स्तर पर विकेंद्रीकरण की जरूरत पर भी समिति ने जोर दिया है। साथ ही नई लाइनों के निर्माण में रेलवे को राज्य सरकारों के साथ मिलकर काम करने की सलाह दी है।

बहुत से लोगों को सरकार का यह फैसला आज अच्छा लग रहा होगा, लेकिन आने वाले वक्त में अच्छे स्कूल और अस्पताल की तरह कहीं आना-जाना भी आपकी जेब से दूर हो जाएगा क्योंकि निजी कंपनियों का एक ही लक्ष्य होता है मुनाफा कमाना और रेलवे में लाभ कमाने का सबसे आसान तरीका होता है यात्री किराये में इजाफा करना जो पिछले पांच साल से सरकार ने अपरोक्ष तौर पर लगातार किया भी। लेकिन जब यह काम निजी कंपनियां करेंगी तो जनता की आवाज और उसका दर्द नक्कारखाने में तूती की आवाज बन जाएगी। क्योंकि निजी कंपनियां अपने व्यवहार में अप्रत्याशित होती हैं और इनमें जवाबदेही की भारी कमी होती है। उनकी जवाबदेही रेल यात्रियों के प्रति नहीं होगी बल्कि उनकी जेब से वसूली जाने वाली किराया से उनकी कंपनी को कितना मुनाफा पहुंचाना है उसकी चिंता करना महत्वपूर्ण होता है। एक और बात जो काफी महत्वपूर्ण है वह यह है कि रेलवे विशुद्ध तौर पर आम आदमी की जिंदगी को जीता है। सरकार के पास जब तक इसका स्वामित्व है, वह नफा-नुकसान की परवाह किए बिना राष्ट्रव्यापी पहुंच प्रदान करती है लेकिन निजीकरण में यह गुंजाइश खत्म हो जाएगी और उन्हें जिस क्षेत्र से मुनाफा नहीं होगा उस मार्ग पर ट्रेनों का संचालन बंद कर देंगे।

बहरहाल, यात्री ट्रेनों के संचालन के लिए पहली बार भारतीय रेलवे ने निजी निवेश का रास्ता साफ कर दिया है और सरकार के इस कदम के साथ ही रेलवे का 167 साल का इतिहास बदलने जा रहा है। साल 1853 में भारत में शुरू हुई व्यावसायिक ट्रेन सेवा अमेरिका, चीन और रूस के बाद दुनिया का चौथा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है और इसी नेटवर्क के जरिये भारतीय रेलवे प्रतिदिन करीब ढाई करोड़ लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाती है। इस कार्य को अंजाम देने के लिए उसके पास तकरीबन 13 लाख कर्मचारी हैं। हालांकि वर्ष 2019 में ही लखनऊ से नई दिल्ली के बीच भारत की पहली प्राइवेट ट्रेन तेजस एक्सप्रेस की शुरुआत हो गई थी जिसे रेलवे में निजीकरण की दिशा में पहला बड़ा कदम माना गया था, लेकिन आज जब हम कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के दौर से गुजर रहे हैं, देश में आपदा एक्ट लगा हुआ है और इसकी आड़ में सरकार उन सारे एजेंडा को पूरा कर लेना चाहती है जिसपर उसे लगता है कि इसके खिलाफ जनता की आवाज उठ सकती हैं। आखिर भारतीय रेल को देश की लाइफ लाइन जो कहा जाता है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।)

HRD Minister releases alternative academic calendar for Primary stage



Staff Reporter

Human Resource Development Minister Ramesh Pokhriyal Nishank today released eight weeks’ alternative academic calendar for Primary stage.

This Calendar contains detailed guidelines for teachers on the use of technology and social media tools to impart education while the students are at home. The calendar further aims at empowering students, teachers, school principals and parents with positive ways to deal with COVID-19 via online teaching-learning resources and achieve the best possible learning outcomes.

Speaking on the occasion the Minister said that this Calendar provides guidelines to teachers on the use of various technological tools and social media tools available for imparting education in fun-filled, interesting ways, which can be used by learner, parents and teachers even while at home. However, it has taken into account, the varying levels of access to Mobile, Radio, Television, SMS and various social media.

The fact that many of students may not have internet facility in the mobile, or may not be able to use different social media tools, the calendar guides teachers to further guide parents and students through SMS on mobile phones or through voice call. Parents are expected to help elementary stage students to implement this Calendar.

Mr Nishank further said that this calendar caters to the need of all children including Divyang children. It includes links for Audio books, Radio programmes and Video programme. He said that the calendar contains week-wise plan consisting of interesting and challenging activities, with reference to theme and chapter taken from syllabus or textbook. Most importantly, it maps the themes with the learning outcomes. The purpose of mapping of themes with learning outcomes is to facilitate teachers and parents to assess the progress in the learning of children and also to go beyond textbooks.

The calendar also covers experiential learning activities such as Arts Education, Physical Exercises, yoga, pre-vocational skills, etc. This Calendar contains class-wise and subject-wise activities in tabular forms. It includes activities related to four languages as subject areas – Hindi English, Urdu and Sanskrit.

In a statement, HRD Ministry said all the given activities are suggestive in nature, not preive, nor is the sequence mandatory. Teachers and parents may opt to contextualize the activities and do those activities that the student shows interest in, irrespective of the sequence.

جناح کے دو قومی نظریے کے سخت مخالف تھے عبدالقیوم انصاری

ولادت : یکم جولائی 1905ء ۔ وفات : 18 جنوری 1973ئ

مجاہدآزادی عبدالقیوم انصاریؒ کے یوم ولادت یکم جولائی کے موقع پر خاص مضمون

محمد عارف انصاری
مسلمانان ہند نے جنگ آزادی میں نہ صرف بڑھ چڑھ کر حصہ لیا بلکہ ہراول دستے کا فریضہ انجام دیا۔ لاکھوں کی تعداد میں علمائ،سماجی و سیاسی رہنماﺅں اور عام لوگوں کو جام شہادت نوش کرنی پڑی، مختلف جیلوں میں قید و بندکی سعوبتیں حتی کہ کالاپانی کی سزا جھیلنی پڑی اور زمین جائداد کی ضبطی و نیلامی اورتباہی و بربادی کے مراحل سے گزرنا پڑا۔ان عدیم المثال قربانیوں کے صلے میں آزادی حاصل ہوئی۔ان پرخلوص رہنماﺅں میں ایک اہم رہنماءکا نام نامی اسم گرامی عبدالقیوم انصاری رحمة اللہ علیہ ہے۔وہ اخیر تک مسلم لیگ کے دوقومی نظریے اور تقسیم ہند کی شدیدمخالفت کرتے رہے۔ ایک قوم پرور رہنماءکے طور پر انگریزی استعمار سے لڑنے کے ساتھ ہی حکیمانہ طور سے سماجی وسیاسی بصیرت کے ساتھ صدیوں سے زبوں حالی کی شکار مومن بنکر و دیگرپس کردہ برادریوں کو نئے انقلاب سے نہ صرف رو شناس بلکہ ہمکنار کرایا۔وہ زندگی کی آخری سانس تک فعال و متحرک رہے۔یوں وہ نہ صرف مومن ودیگر پس کردہ برادریوں بلکہ قوم و ملت کے لئے فخروناز کا مرکز بن گئے۔

انصاری صاحب ؒکے جدِّاعلیٰ حضرت شیخ شاہ عالم شہنشاہ ہمایوں کی حکومت میں چکلہ دار کے اعلیٰ منصب پر فائز تھے۔بادشاہ ان کی شجاعت و دیانت اور دینداری کا معترف تھا لیکن بوجہ ضعیفی وہ شاہی خدمت سے سبکدوش ہوکر اپنے وطن اکبرپور اور بعدہ‘ اپنی آباد کردہ بستی نولی (ضلع غازی پور، یوپی) میں اقامت گزیں ہوئے۔آں وقت تا انقلاب 1857ءاس خاندان کا پیشہ کاشتکاری و تجارت رہا۔ قرب و جوار میں یہ گھرانہ معزز وبااثررہا اور1876ءمیں سون ندی کے کنارے واقع ڈہری آن سون ، سہسرام ،ضلع شاہ آباد(اب روہتاس) ،بہار آکر آباد ہوگیا۔عبدالقیوم انصاریؒ کے والد مولوی عبدالحق ایک خوشحال تاجر اور بااثر شخصیت کے حامل تھے۔ ان کے نانا حضرت مولانا عبداللہ غازیپوری، جید عالمِ دین اور خدارسیدہ بزرگ تھے۔ان کی والدہ محترمہ صفیہ خاتون حافظہ¿ قرآن اور عالمہ و فاضلہ تھیں۔ ان کی ولادت ڈہری آن سون میں یکم جولائی 1905ءکو ہوئی۔ ابتدائی تعلیم اپنی والدہ اور نانا کے زیر سایہ حاصل کی۔ وہ اتنے ذہین تھے کہ آٹھ سال کی عمر میں ا±ردو، عربی، فارسی اور دینیات میںاچھی خاصی دسترس حاصل کرلی۔

صوبہ بہار کی انقلاب آفریں سرزمین کے جن ہزاروں فرزندان اسلام نے جنگ آزادی میں لازوال قربانیاں پیش کی ہیں ان میں عبدالقیوم انصاریؒ کا خانوادہ بھی شامل ہے۔ان کے گھرانے کا تعلق جدو جہد آزادی کے لئے مشہور علمائے صادق پور کی انقلابی تحریک سے بھی تھا۔اس لئے بچپن سے ہی تحریک آزادی سے ان کا متاثر ہونا حیرت کی بات نہیں۔محض بارہ تیرہ سال کی عمر سے ہی وطن کی آزادی کا جذبہ ان کے دل میں انگڑائی لینے لگا۔ ان کی غیرمعمولی شخصیت کا اندازہ اس بات سے لگایا جاسکتا ہے کہ جب وہ صرف چودہ برس کے تھے اورسہسرام ہائی اسکول میں زیر تعلیم تھے کہ 1919ءمیں مولانا محمد علی جوہرخلافت تحریک کے سلسلے میں سہسرام تشریف لائے تو ان سے ملاقات کی اور جذبہ¿ حریت کا اظہار کیا۔مولانا موصوف کوان کی گفتگوئ وچہرے کی نورانیت نے متاثر کیا اور بخوشی انہیں خلافت تحریک کا رکن بنا دیا۔ 1920ءمیں پندرہ سالہ عبدالقیوم انصاری ڈہری آن سون خلافت کمیٹی کے جنرل سیکریٹری بن گئے اور اسی سال کانگریس کے خصوصی اجلاس‘کلکتہ میں صوبہ بہار سے ڈیلی گیٹ کی حیثیت سے شریک ہوئے۔ اسی اجلاس میں وہ مہاتما گاندھی سے ملے اوران کی تعلیمات اور شخصیت سے ایسے متاثر ہوئے کہ تاحیات ان کے معتقدرہے۔ ان کی سیاسی سرگرمیوں کا اثر ان کے والد کے کاروبار پر بھی پڑا۔ انگریزوں اور ان کے ہمنوا کمپنیوں کے ساتھ جاری ان کے تجارتی تعلقات منقطع ہوگئے اوربھاری خسارے سے دوچار ہوناپڑا۔ مگر ان کے والد نے انہیں روکا نہیں بلکہ حوصلہ افزائی کرتے رہے۔ گھر پر پولیس کے چھاپے پڑے، تلاشیاں ہوئیں لیکن ان کے چہرے پر کوئی شکن نہیںآئی۔ فروری 1922ءمیں پولیس نے عبدالقیوم انصاری کو ان کی باغیانہ سرگرمیوں کے سبب گرفتار کرلیا لیکن سہسرام ضلع جیل کی بدترین سختیاں بھی انہیں دل شکستہ نہیں کرسکیں۔ اسی جدوجہد کے دوران کچھ برسوں تک انہوںں نے علی گڑھ اور کلکتہ میں تعلیم حاصل کرنے کی کوشش کی۔ علی گڑھ کا انگریز زدہ ماحول راس نہیں آیا تو کلکتہ جاکر تعلیم جاری رکھنے کی کوشش کی لیکن تعلیم سے زیادہ سیاسی سرگرمیوں میں مصروف رہے۔ وطن کی عزت اوروقار کے لیے کچھ بھی کرگزرنے کو تیار رہتے۔ملک کے حالات یہ تھے کہ ایسٹ انڈیا کمپنی نے اپنے ناپاک قدم جمانے کے ساتھ ہی دنیا بھر میں مشہورہندوستانی کپڑوں کی صنعت (ہینڈلوم) جس کا بڑا حصہ مسلم بنکروں کے ہاتھوں میں تھا، تباہ و برباد کرکے رکھ دیا۔ 1857ءکے بعد تو بطورخاص اس طبقے کو مظالم کا نشانہ بنایا گیا۔ ہندوستانی کپڑے باہر بھیجنے پر پابندی لگادی گئی۔یہاں کے بازار مانچسٹر کی ملوں کے تیار شدہ کپڑوں سے بھر دیئے گئے۔ ان زیادتیوںکی شکار سب سے زیادہ مومن بنکر برادری ہوئی جس کے سبب یہ برادری انگریز وںکی مخالفت میں پیش پیش رہی۔ انہیں حالات کے بطن سے1913ءمیں کلکتہ میں مومن تحریک کا ظہور ہوا جس کے بانیوں میں زیادہ تر بہارکے ہی لوگ تھے۔ صدیوں سے دبی کچلی مومن برادری میں ایک نئے انقلاب کا آغاز تھا۔پہلے انجمن اصلاح بالفلاح پھر جمعیةالمومنین کے نام سے یہ تحریک آگے بڑھتی رہی جو 1928ءمیںآل انڈیا مومن کانفرنس میں تبدیل ہوگئی۔ عبدالقیوم انصاری اپنی سیاسی زندگی کے آغاز سے ہی کانگریس، تحریک خلافت اور مومن تحریک سے وابستہ تھے لیکن جب اپنے وسیع تر نصب العین کے ساتھ مومن تحریک کے قائد بنے تو یہ ایک مضبوط سیاسی طاقت بن کر ملک کے سیاسی منظرنامے پر ا±بھرے۔ ان کے پیش نظرگاندھی جی کی شخصیت تھی جودلتوں، ہریجنوں اور کمزور طبقات کے حالات بدلنے کے لیے کوشاں تھے جنہیں اعلیٰ ذات کے ہندو سماج نے ذلت اور پسماندگی کا شکار بنارکھا تھا۔یہی وجہ ہے کہ انصاری صاحب نے تحریکِ آزادی کی تمام تر سرگرمیوں کے ساتھ ہی مسلمانوں کے پسماندہ طبقات کو سماجی انصاف دلانے کے لیے اپنی زندگی وقف کردی۔ان کا سب سے بڑا کارنامہ مومن تحریک کو تحریک آزادی میں عملی طور پر شامل کر کے کانگریس کی سب سے بڑی حلیف جماعت بنا دینا ہے جس کے سبب ملک کی سیاست ہی بدل گئی۔ واقعہ ہے کہ1938 ءمیں وہ پٹنہ کی ایک اسمبلی سیٹ پر انتخاب لڑنا چاہتے تھے۔ امیداوار طے کرنے کے لیے مسلم لیگ کے رہنماءباہر سے بھی آئے تھے درخواستیں لی جارہی تھیں۔مسلم لیگ کے ایک صوبائی رہنماءکی ایماءپرانصاری صاحب نے بھی اس سیٹ کے لئے درخواست پیش کی اورجیسے ہی باہر نکلے کہ اند ر سے قہقہوں کے ساتھ آواز سنائی پڑی ”اب جولاہے بھی ایم ایل اے بننے کا خواب دیکھنے لگے“۔ یہ سننا تھا کہ وہ پلٹ کرتیزی کے ساتھ اندر داخل ہوئے اوراپنی درخواست واپس لے کر اسی جگہ پرزہ پرزہ کردی۔اس وقت انہوں نے شاید اپنی ایسی ہی توہین محسوس کی جیسی مہاتما گاندھی نے جنوبی افریقہ میں ٹرین سے باہر نکال دیئے جانے کے وقت محسوس کی ہوگی۔اس کے بعدخود کومومن کانفرنس کے لئے وقف کر دیا اور بہت جلدبساط سیاست پر چھا گئے۔ مومن برادری ان کے گرد جمع ہو گئی کیونکہ ان کی رہنمائی میں اسے اپنی سماجی و سیاسی ا±منگوں کی تکمیل کے آثار نظر آنے لگے۔انصاری صاحب نے جب پٹنہ آکر سیاست شروع کی اس وقت بہارمیں مسلم سیاست کے افق پر ڈاکٹر سیّد محمود، بیرسٹر محمد یونس ، مسٹر عزیز، سیّد ظفر امام، سر سلطان احمد اور نواب حسن وغیرہ چمک رہے تھے جنہیں اپنی صلاحیتوں کے ساتھ ہی دولت اورخاندانی و قار بھی حاصل تھا۔ ان کے مقابلے انصاری صاحب کی حیثیت ایک ذرّے کی تھی۔ وہ حضرت مولانا عبداللہ غازی پوری جیسے عظیم عالم دین کے نواسے ضرور تھے لیکن سیاسی میدان میں یہ خوبی کوئی معنی نہیں رکھتی تھی۔ انہیں بساط سیاست سے ٹھکرادینے کی کوشش کی گئی لیکن وہ سبھ وں کو پیچھے چھوڑتے ہوئے آندھی طوفان کی طرح میدان سیاست میں چھا گئے۔

انصاری صاحب مسٹر جناح کے دو قومی نظریے اور تقسیم ہندکے سخت مخالف اورنگریس کی پالیسیوںکی حامی تھے۔ کرپس مشن جب ہندوستان آیا تومسٹر کرپس نے دریافت کیا کہ مسٹر جناح کے مقابلے میں کانگریس کے ساتھ وہ کون سے مسلم رہنما ہیں جو مسلمانوں کے کسی نہ کسی حصے کی ترجمانی کرتے ہیں او رمسلم لیگ اور جناح کے خلاف مسلم عوام کے ایک حصہ کو کانگریس کی جنگ آزادی میں شریک کرسکتے ہیں؟ پنڈت جواہر لعل نہرو نے خان عبدالغفار خان ، مولانا حسین احمد مدنی اور عبدالقیوم انصاری کے نام لیے تھے۔ کانگریس کے حمایتی یہی تین مسلم رہنما تھے، جس کے پیچھے مسلمانوں کی اکثریت تھی۔ مگر ان تینوں میں انصاری صاحب ہی وہ واحد رہنما تھے جنہیں محنت کش عوام کے ایک بڑے حصے کی تنظیمی قوت کی حمایت حاصل تھی۔یہ واقعہ ہے کہ انصاری صاحب نے جمعیة علماءہند اور خلافت تحریک کے سر کردہ قومی رہنما و¿ں کے مشورے سے کرپس مشن کے سامنے ایک ایسا چھ نکاتی تجویز پیش کی تھی جس میں مرکزی، وفاقی اور ریاستی حکومتوں میں مومن جماعت کی موثر نمائندگی او رمومن انصار عوام کے لیے معقول ریزرویشن نیز دوسری مراعات کا مطالبہ کیا تھا۔ان مطالبات میں وہ زبردست دوراندیشانہ سیاسی حکمت عملی شامل تھی جس سے یہ آسانی کے ساتھ ثابت ہوجا تا کہ مسلمانانِ ہند کی نصف سے زائد آبادی مسلم لیگ کے ساتھ نہیں ہے۔پنڈٹ نہرو نے اگراس تجویزکومسترد نہ کردیا ہوتا تو مسٹر محمد علی جناح تقسیم ہندکے اپنے منصوبے میں شاید کبھی کامیاب نہیں ہوتے۔اس سے یہ واضح ہوتا ہے کہ تقسیم ہند کی ذمہ دار صرف مسلم لیگ ہی نہیں ہے بلکہ خود کانگریس کی اعلیٰ قیادت بھی ہے۔

مومن کانفرنس کے سربراہ کی حیثیت سے انصاری صاحب ہندوستا ن گیر شخصیت کے حامل تھے لیکن پارٹی میں شامل ہوجانے کے باوجود کانگریس کی بالادستی پسند سیاست نے انہیں آگے بڑھنے سے روکا او رکئی بار نظر انداز بھی کیا۔اگر ایسا نہ ہوتا تو ایک مدبر سیاست داں ہونے کے باوجودانہیں بہار تک ہی محدود نہیں کردیا جاتا۔ 1967ءکے اسمبلی انتخابات میں وہ ڈہری حلقہ سے کامیاب ہوئے تھے لیکن کانگریس کو اکثریت حاصل نہیں ہو ئی اورمخلوط سرکار بنائی گئی جو زیادہ دنوں تک نہیں چلی۔ 1969ءمیں وسط مدتی انتخاب ہوا تو ان کا ٹکٹ ہی کاٹ دیا گیاپھربھی کانگریس وہاں کامیاب نہ ہوسکی۔ اس کے بعد کانگریس نے اپنی غلطی کا تدارک کرتے ہوئے انہیں راجیہ سبھا بھیجا۔محترمہ اندراگاندھی انہیں مرکزی وزیر بناناچاہتی تھیں لیکن عصبیت و بالادستی پسند بعض مسلم رہنماﺅں کے دباﺅمیں وہ ایسا نہیں کر سکیں۔ 1972ءمیں بہار کانگریس میں جب رسہ کشی ہورہی تھی تومتفقہ فیصلہ ہوا کہ عبدالقیوم انصاری کو وزیر اعلی بنایا جائے۔ بہت سے رہنماﺅں نے انہیں مبارکباد بھی دیدی لیکن بتایا جاتا ہے کہ برہمن لابی نے محترمہ اندرا گاندھی کو ورغلا کر کیدار پانڈے کو وزیر اعلیٰ بنوا دیا۔یوں1946 ءسے 1972ءتک وہ بہار کے سیاسی ا±فق پر ایک بااثر سیاستداں کی حیثیت سے چمکتے رہے۔

عوام کی خدمت کے لیے انصاری صاحب ہر لمحہ کمر بستہ رہتے۔ غریبوں کی مالی امدادکرنے،بہتوں کو مہاجنوں کے پنجے سے بچانے اوراور بیگاری و بندھوا مزدوری سے نجات دلانے کے ساتھ ہی غریب بنکر وں کی فلاح و بہبود کے لئے کوآپریٹو سوسائٹیاں قائم کرائیں اوردیگربہت سے مثبت اقدامات کیے۔نادار طلباءکو وظائف دلوانے کے ساتھ ہی ضروری تعلیمی اصلاحات کروائیں اور بی ایم سی مکتب کھلوائے جن کی وجہ سے لاکھوں طلباءکا مستقبل روشن ہوا۔ زندگی بھر ہندو مسلم اتحاداور سماجی و قومی ہم آہنگی کے لیے کوششیں کرتے رہے۔تاحیات مجاہدانہ و درویشانہ زندگی بسر کی جس کی لوگ مثال دیتے ہوئے نہیں تھکتے۔ان کے عادات و اطوار،سادگی ،حلیم،بردباری،دین داری و پرہیز گاری اور بے باکی وحق گوئی کی دنیا قائل ہے جو انہیں اپنے بزرگوں سے ورثے میں ملی تھیں۔یہی وجہ ہے کہ یکساں طور سے سماج کے ہر طبقہ کے اندر محبوب و مقبول تھے۔بالآخر اپنے عہد کا یہ عظیم رہنما ءعوام کی خدمت کرتے ہوئے18 جنوری 1973ءکو اپنے حلقہ¿ انتخاب کے دورے کے درمیان اچانک حرکتِ قلب ر±ک جانے سے وفات پا گئے اورڈہری آن سون میں سپرد کئے گئے۔

NHRC notice to UP govt over child’s death

AMN

Nation Human Rights Commission has issued a notice to UP government over the reported death of a child due to negligence of doctors at Kannauj District Hospital.

Taking suo motu cognizance of media reports, the Commission has asked State Chief Secretary to submit a detailed report in the matter, within four weeks including the action taken against the delinquent doctors and officials of the hospital and status of any relief given to the family of the deceased child by the State Government.

According to a media report on 30th of last month, a one year old child, suffering from fever and swollen neck, died as he was not attended by the doctors at the District Hospital Kannauj. After waiting 45 minutes his poor parents were told to take him to the District Hospital, Kanpur for treatment. The poor family, having no money with them was not in a position to take the child to the district hospital and later when the matter came into the notice of some media persons and other officers, the child was admitted in the hospital where he died after sometime.