Last Updated on October 28, 2026 10:40 pm by INDIAN AWAAZ

बिजनेस संवाददाता
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और प्रमुख कंपनियों के शेयरों में बिकवाली के कारण भारतीय शेयर बाजार बुधवार को लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। हालांकि, मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में खरीदारी के चलते व्यापक बाजार ने प्रमुख सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया।
बीएसई सेंसेक्स 352.64 अंक यानी 0.48 प्रतिशत गिरकर 73,246.03 अंक पर बंद हुआ। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 50.90 अंक यानी 0.22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 22,698.85 अंक पर आ गया। इस तरह निफ्टी 22,700 के महत्वपूर्ण स्तर से नीचे बंद हुआ।
पिछले दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में कुल 0.49 प्रतिशत और निफ्टी में 0.24 प्रतिशत की गिरावट आई है।
निफ्टी में गिरावट के प्रमुख कारणों में इन्फोसिस, रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारती एयरटेल के शेयरों में कमजोरी शामिल रही। इन्फोसिस का शेयर 3.43 प्रतिशत, रिलायंस इंडस्ट्रीज का 3.19 प्रतिशत और भारती एयरटेल का 1.55 प्रतिशत टूट गया।
हालांकि, बाजार में बिकवाली का दबाव सभी शेयरों पर समान रूप से नहीं रहा। ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों के शेयरों में तेजी ने बाजार को कुछ सहारा दिया।
कच्चे तेल की कीमतों ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का दिसंबर 2026 में आपूर्ति वाला वायदा भाव 1.24 डॉलर यानी 1.09 प्रतिशत बढ़कर 115.12 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कच्चे तेल की कीमतों में इस तेजी ने महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर निवेशकों की चिंताएं बढ़ा दीं।
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि से देश का आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव पड़ सकता है और परिवहन तथा उत्पादन लागत में इजाफा हो सकता है। इसका असर कंपनियों के मुनाफे और अर्थव्यवस्था की महंगाई संबंधी संभावनाओं पर भी पड़ सकता है।
हालांकि, महंगे कच्चे तेल का असर सभी ऊर्जा कंपनियों पर एक जैसा नहीं होता। तेल उत्पादन करने वाली कंपनियों को ऊंची कीमतों से लाभ मिल सकता है, जबकि रिफाइनिंग, ईंधन विपणन और अधिक ऊर्जा खपत वाले कारोबारों की लागत तथा मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।
फेडरल रिजर्व के फैसले पर नजर
निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बुधवार को होने वाली मौद्रिक नीति घोषणा पर भी रही। बाजार में व्यापक रूप से ब्याज दरों में तत्काल बदलाव नहीं होने की उम्मीद थी, लेकिन निवेशक भविष्य में दरों की दिशा को लेकर केंद्रीय बैंक के संकेतों का इंतजार कर रहे थे।
अमेरिकी ब्याज दरों का रुख भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे डॉलर की मजबूती, अमेरिकी बॉन्ड पर मिलने वाला प्रतिफल और उभरते बाजारों में विदेशी निवेश की दिशा प्रभावित हो सकती है।
यदि फेडरल रिजर्व महंगाई को लेकर अधिक सतर्क रुख अपनाता है, तो भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर पड़ सकती है। इसके विपरीत, महंगाई में नरमी के संकेत वैश्विक निवेशकों की जोखिम लेने की इच्छा को बढ़ा सकते हैं।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और मौद्रिक नीति को लेकर अनिश्चितता के बीच निवेशकों ने बड़े शेयरों में आक्रामक खरीदारी से परहेज किया।
आईटी और ऊर्जा शेयरों में कमजोरी
सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र के शेयरों में गिरावट ने बाजार पर दबाव बढ़ाया। इन्फोसिस का शेयर 3.43 प्रतिशत गिरकर निफ्टी के प्रमुख नुकसान वाले शेयरों में शामिल रहा।
आईटी कंपनियों के प्रदर्शन पर अमेरिका और अन्य प्रमुख बाजारों में प्रौद्योगिकी सेवाओं की मांग, कंपनियों के खर्च और कृत्रिम मेधा यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) पर बढ़ते निवेश का असर पड़ता है। निवेशक कंपनियों के तिमाही नतीजों के साथ-साथ भविष्य की मांग, लाभ मार्जिन और नए कारोबार की संभावनाओं पर भी नजर रख रहे हैं।
तेल और गैस क्षेत्र के शेयरों में भी दबाव देखने को मिला। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर में 3.19 प्रतिशत की गिरावट आई। कंपनी का ऊर्जा, खुदरा कारोबार और दूरसंचार क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपस्थिति के कारण उसके शेयर में उतार-चढ़ाव का प्रमुख सूचकांकों पर भी असर पड़ता है। भारती एयरटेल का शेयर 1.55 प्रतिशत गिर गया।
इसके विपरीत, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कंपनियों के शेयरों में तेजी रही। इससे संकेत मिला कि निवेशक बाजार से पूरी तरह दूरी बनाने के बजाय चुनिंदा घरेलू मांग आधारित कंपनियों में अवसर तलाश रहे हैं।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने दिखाई मजबूती
प्रमुख सूचकांकों में गिरावट के बावजूद व्यापक बाजार में अपेक्षाकृत मजबूती रही। बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स 0.51 प्रतिशत चढ़ा, जबकि बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.37 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई।
इससे संकेत मिला कि बिकवाली का दबाव मुख्य रूप से कुछ बड़े शेयरों में केंद्रित था। हालांकि, एक कारोबारी सत्र में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में लगातार तेजी की संभावना का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। इन शेयरों में कीमतों में उतार-चढ़ाव और तरलता संबंधी जोखिम अपेक्षाकृत अधिक हो सकते हैं।
बीएसई पर कुल 2,245 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,079 शेयरों में गिरावट दर्ज की गई। कुल 241 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ।
बाजार में निकट अवधि के उतार-चढ़ाव की आशंका दर्शाने वाला इंडिया वीआईएक्स 0.28 प्रतिशत गिरकर 16.36 पर आ गया। हालांकि, अस्थिरता सूचकांक में मामूली गिरावट के बावजूद कच्चे तेल, विदेशी बाजारों और कंपनियों के नतीजों से जुड़ी अनिश्चितता बनी रही।
कंपनियों के तिमाही नतीजों का शेयरों पर असर
कंपनियों के तिमाही नतीजे बुधवार को भी शेयरों में उतार-चढ़ाव का प्रमुख कारण रहे।
इंजीनियरिंग और निर्माण क्षेत्र की प्रमुख कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) का शेयर 3.72 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर लगभग 33 प्रतिशत बढ़कर 5,202 करोड़ रुपये हो गया। परिचालन से राजस्व 15.84 प्रतिशत बढ़कर 78,749.94 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी का अंतरराष्ट्रीय राजस्व 45,870 करोड़ रुपये रहा, जो कुल राजस्व का 58 प्रतिशत है। 30 सितंबर 2026 तक उसका समेकित ऑर्डर बुक 8,53,514 करोड़ रुपये था, जो मार्च 2026 के मुकाबले 15 प्रतिशत अधिक है। इसमें अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत रही।
वेदांता का शेयर 3.30 प्रतिशत बढ़ा। कंपनी का चालू कारोबार से समेकित शुद्ध लाभ दूसरी तिमाही में सालाना आधार पर 151 प्रतिशत बढ़कर 6,202 करोड़ रुपये हो गया। परिचालन से राजस्व 57 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 25,812 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। कंपनी ने शुद्ध कर्ज में कमी की भी जानकारी दी।
हिंदुस्तान यूनिलीवर का शेयर 0.12 प्रतिशत गिरा। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 3.91 प्रतिशत बढ़कर 2,790 करोड़ रुपये और परिचालन से राजस्व 14.78 प्रतिशत बढ़कर 18,037 करोड़ रुपये रहा। कंपनी की अंतर्निहित बिक्री वृद्धि 15 प्रतिशत और मात्रा आधारित वृद्धि 7 प्रतिशत रही। निदेशक मंडल ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 19 रुपये प्रति शेयर अंतरिम लाभांश घोषित किया है। इसके लिए 12 नवंबर को रिकॉर्ड तिथि निर्धारित की गई है।
सिंजीन इंटरनेशनल का शेयर 12.19 प्रतिशत उछल गया। कंपनी ने पिछली तिमाही के 9 करोड़ रुपये के शुद्ध घाटे की तुलना में दूसरी तिमाही में 32 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया। हालांकि, सालाना आधार पर उसका शुद्ध लाभ 52 प्रतिशत घटा और राजस्व 9 प्रतिशत गिरकर 833 करोड़ रुपये रहा। शेयर में तेजी के पीछे पिछली तिमाही की तुलना में बेहतर प्रदर्शन को प्रमुख कारण माना जा सकता है।
बजाज ऑटो का शेयर 0.91 प्रतिशत बढ़ा। कंपनी का एकल शुद्ध लाभ 35.25 प्रतिशत बढ़कर 3,353.76 करोड़ रुपये हो गया, जबकि परिचालन से राजस्व 34.05 प्रतिशत बढ़कर 20,003.43 करोड़ रुपये रहा।
पीजी इलेक्ट्रोप्लास्ट के शेयर में 7.16 प्रतिशत की तेजी आई। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 395.2 प्रतिशत बढ़कर 13.67 करोड़ रुपये रहा। बिक्री 42.5 प्रतिशत बढ़कर 933.88 करोड़ रुपये हो गई।
यूनाइटेड ब्रुअरीज का शेयर 4.72 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी का एकल शुद्ध लाभ 190 प्रतिशत बढ़कर 136 करोड़ रुपये और शुद्ध बिक्री 24 प्रतिशत बढ़कर 2,536 करोड़ रुपये रही। कंपनी ने बिक्री मात्रा में वृद्धि, प्रीमियम उत्पादों की बढ़ती हिस्सेदारी, कीमतों में बदलाव और बेहतर उत्पाद एवं भौगोलिक मिश्रण को प्रदर्शन में सुधार का आधार बताया।
वैश्विक बाजारों में मिला-जुला रुख
एशियाई बाजारों में अधिकांश प्रमुख सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। कृत्रिम मेधा से जुड़ी मांग की संभावनाओं और प्रमुख अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के नतीजों से पहले आईटी तथा सेमीकंडक्टर शेयरों में सकारात्मक रुख रहा।
दक्षिण कोरिया की चिप निर्माता कंपनी एसके हाइनिक्स ने तीसरी तिमाही में रिकॉर्ड राजस्व और परिचालन लाभ दर्ज किया। कंपनी के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार, राजस्व 104.62 ट्रिलियन वॉन और परिचालन लाभ 83.33 ट्रिलियन वॉन रहा। एआई इंफ्रास्ट्रक्चर में इस्तेमाल होने वाली हाई-बैंडविड्थ मेमोरी चिप की मांग ने उसके प्रदर्शन को सहारा दिया।
अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को बढ़त के साथ बंद हुआ था। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 15.99 अंक यानी 0.03 प्रतिशत बढ़कर 52,377.57 पर पहुंचा। एसएंडपी 500 में 0.60 प्रतिशत की तेजी आई और यह 7,722.60 पर बंद हुआ। नैस्डैक कंपोजिट 1.18 प्रतिशत बढ़कर 26,477.81 पर पहुंच गया।
ब्रॉडकॉम ने एंथ्रोपिक के लिए एआई कंप्यूटिंग क्षमता के वित्तपोषण से जुड़ी 63 अरब डॉलर की व्यवस्था की घोषणा के बाद निवेशकों का ध्यान आकर्षित किया। इस व्यवस्था में बैंक ऑफ अमेरिका, ब्लैकस्टोन, सिटीग्रुप और मॉर्गन स्टेनली शामिल हैं।
निवेशकों की नजर अमेरिकी बाजार बंद होने के बाद अल्फाबेट और माइक्रोसॉफ्ट के तिमाही नतीजों पर भी थी।
अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों से मिश्रित संकेत मिले। कॉन्फ्रेंस बोर्ड का उपभोक्ता विश्वास सूचकांक सितंबर के संशोधित 84.2 से बढ़कर अक्टूबर में 91.7 हो गया, जो 81 के अनुमान से बेहतर था। वहीं, सितंबर में टिकाऊ वस्तुओं के ऑर्डर 1.8 प्रतिशत बढ़े, जो बाजार के उद्धृत 2 प्रतिशत अनुमान से कम थे। नए एकल-परिवार मकानों की बिक्री 0.6 प्रतिशत घटकर सालाना आधार पर 6.76 लाख इकाई रही।
यूरोपीय बाजारों में गिरावट रही। निवेशक कंपनियों के नतीजों, महंगे कच्चे तेल और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के फैसले का आकलन कर रहे थे। यूरोपीय केंद्रीय बैंक की 29 अक्टूबर को होने वाली मौद्रिक नीति घोषणा पर भी बाजार की नजर थी।
बॉन्ड प्रतिफल और रुपये पर भी नजर
भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड का प्रतिफल पिछले कारोबारी सत्र के 7.435 प्रतिशत से बढ़कर 7.442 प्रतिशत हो गया। अमेरिकी डॉलर सूचकांक 0.09 प्रतिशत बढ़कर 102.41 पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड का प्रतिफल 0.42 प्रतिशत बढ़कर 5.007 प्रतिशत रहा।
ऊंचे बॉन्ड प्रतिफल से निवेशकों के लिए निश्चित आय वाले विकल्प अधिक आकर्षक हो सकते हैं। इससे शेयरों के मूल्यांकन और कंपनियों की उधारी लागत पर भी असर पड़ सकता है। भारत में कच्चे तेल की महंगाई, रुपये पर दबाव और बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि का संयुक्त प्रभाव महंगाई, कंपनियों के मार्जिन और विदेशी निवेश प्रवाह के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर 4 दिसंबर 2026 के निपटान वाला सोना वायदा 0.10 प्रतिशत गिरकर 1,44,000 रुपये पर आ गया।
आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर
आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय बाजार की दिशा कच्चे तेल की कीमतों, अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संकेतों, रुपये की चाल और कंपनियों के तिमाही नतीजों से प्रभावित हो सकती है।
ऊर्जा कीमतों में नरमी से महंगाई और कंपनियों की लागत संबंधी चिंताएं कम हो सकती हैं। इसके विपरीत, कच्चे तेल में और तेजी बाजार पर दबाव बनाए रख सकती है।
मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की मजबूती तथा घरेलू मांग से जुड़ी कुछ कंपनियों में खरीदारी से पता चलता है कि बाजार में निवेशकों की दिलचस्पी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। हालांकि, प्रमुख सूचकांकों में टिकाऊ सुधार के लिए बड़े शेयरों में स्थिरता और वैश्विक परिस्थितियों में अनुकूल बदलाव जरूरी होंगे।
अस्वीकरण: यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है। इसे किसी शेयर को खरीदने या बेचने की सलाह न माना जाए। निवेश संबंधी निर्णय लेने से पहले योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श करें।
