Last Updated on November 2, 2026 12:58 pm by INDIAN AWAAZ

चुनाव आयोग से मोदी-शाह तक पहुंची विपक्ष की लड़ाई


प्रवीण कुमार

दिल्ली का रामलीला मैदान आज यानी रविवार को विपक्षी राजनीति के एक बड़े शक्ति प्रदर्शन का गवाह बना। इस मेगा रैली के जरिये विपक्षी इंडिया गठबंधन ने अपने आंदोलन का राजनीतिक एजेंडा और अधिक स्पष्ट कर दिया। अब तक मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव आयोग की भूमिका पर केंद्रित रहा विपक्ष का विरोध प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह तक पहुंच गया है। ‘वोट चोरी’ के आरोपों को लेकर आयोजित इस मेगा रैली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सीधे नारा दिया- ‘मोदी हटाओ, लोकतंत्र बचाओ।’ वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने ऐलान किया कि ज्ञानेश कुमार के बाद विपक्ष की लड़ाई प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह के खिलाफ होगी और कथित वोट चोरी के मामले में उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

रामलीला मैदान में आयोजित इस रैली में करीब 2 लाख से अधिक लोगों के पहुंचने का अनुमान जताया गया है। आयोजन स्थल के भीतर और बाहर उमड़ी भीड़ को लेकर कुछ अनुमानों में यह संख्या अधिक भी हो सकती है। कनॉट प्लेस से तुर्कमान गेट तक दिल्ली के मध्य हिस्से में विपक्षी कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भारी मौजूदगी दिखाई दी। रैली में कांग्रेस के अलावा इंडिया गठबंधन के विभिन्न घटक दलों के नेता, सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र संगठनों के प्रतिनिधि और नागरिक समाज से जुड़े लोग शामिल हुए।

इस रैली का राजनीतिक संदेश सिर्फ चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध दर्ज कराने तक सीमित नहीं था। विपक्ष ने इसे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता, मतदाता सूची में कथित हेरफेर और लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही से जोड़ते हुए केंद्र की सत्ता के खिलाफ व्यापक राजनीतिक संघर्ष के रूप में पेश किया।

चुनाव आयोग से मोदी-शाह तक पहुंची विपक्ष की लड़ाई
रामलीला मैदान में जुटे विपक्षी नेताओं ने इस बार अपने भाषणों में सीधे प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को निशाने पर रखा। कांग्रेस की कार्यसमिति 19 सितंबर 2026 को ही मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के साथ मोदी और शाह के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रस्ताव पारित कर चुकी है। हालांकि, इंडिया गठबंधन के पिछले प्रदर्शनों में मुख्य रूप से ज्ञानेश कुमार की विदाई और चुनाव आयोग की जवाबदेही का मुद्दा उठाया जा रहा था। रविवार की रैली में कांग्रेस ने इस आंदोलन को केंद्र सरकार के खिलाफ राजनीतिक अभियान का रूप देने का स्पष्ट संकेत दिया।

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खड़गे का बड़ा हमला- मोदी हटेंगे तभी लोकतंत्र बचेगा
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि विपक्ष का मकसद ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना है और इसके लिए आंदोलन जारी रहेगा। खड़गे ने कहा, “हम सब यहां ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए आए हैं। मोदी जी और शाह उन्हें बचाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह बच नहीं पाएंगे। अगर वह जमीन के बहुत नीचे भी छिप जाएंगे, तब भी हम उन्हें बाहर निकालेंगे। हमारे युवाओं, महिलाओं और नौजवानों में इतनी ताकत है।”

कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री खुद तय करना चाहते हैं कि किसे मतदाता होना चाहिए और किसे नहीं। खड़गे ने केंद्र के साथ महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकारों को भी कथित तौर पर ‘चोरी के जनादेश’ से बनी सरकारें करार दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए मोदी को सत्ता से हटाना जरूरी है। इसके बाद उन्होंने रैली में मौजूद लोगों के साथ नारा लगाया- “मोदी हटाओ, लोकतंत्र बचाओ।”

राहुल गांधी की चेतावनी- ज्ञानेश के बाद मोदी-शाह की बारी
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने अपने भाषण में चुनाव आयोग के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी सीधे चुनौती दी। उन्होंने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की लड़ाई के बाद विपक्ष मोदी और शाह के खिलाफ खड़ा होगा। राहुल गांधी ने कहा, “नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह जी, यह समझ लीजिए कि ज्ञानेश कुमार के बाद हम आपके खिलाफ खड़े होंगे। आपने जो वोट चोरी करवाई है, उसके लिए आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।”

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राहुल गांधी ने कहा कि अमित शाह दावा कर रहे हैं कि नरेंद्र मोदी कहीं नहीं जाने वाले हैं। लेकिन वह उन्हें बताना चाहते हैं कि मोदी कहीं नहीं जा सकते, भले ही वह जाना चाहें, विपक्ष उन्हें जाने नहीं देगा। उन्होंने कहा, “नरेंद्र मोदी जी और अमित शाह जी, यह समझ लीजिए कि ज्ञानेश कुमार के बाद हम आपके खिलाफ खड़े होंगे। आपने जो वोट चोरी की है, उसे मत भूलिएगा। आपके और नरेंद्र मोदी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी।”

राहुल गांधी ने दावा किया कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाया जाएगा और उन्हें जेल जाना पड़ेगा। राहुल ने कथित वोट चोरी को सामान्य चुनावी गड़बड़ी मानने से इनकार करते हुए इसे देश के साथ विश्वासघात बताया। राहुल ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के बिना नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री और अमित शाह गृह मंत्री नहीं बन पाते। उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर देश की संस्थाओं पर कब्जा करने का आरोप भी लगाया।

राहुल गांधी ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाना देश को सही रास्ते पर लाने की दिशा में पहला कदम होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार के बिना नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री और अमित शाह गृह मंत्री नहीं बन पाते। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव के संदर्भ में दावा किया कि NDA और विपक्ष के बीच वोटों का अंतर महज तीन प्रतिशत था और चुनावी प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई। राहुल ने कहा कि चुनाव आयोग ने मतदाता सूची से 13.3 करोड़ मतदाताओं के नाम हटा दिए। यह देश के हर 7वें नागरिक और कुल मतदाताओं का करीब 15 प्रतिशत है।

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राहुल गांधी ने कहा, “मैं जो कहता हूं, वह सच साबित होता है। मैंने कोविड के बारे में कुछ कहा था और वह सच हुआ। आज मैं कह रहा हूं कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाया जाएगा। उन्हें जेल जाना पड़ेगा।”
उन्होंने कथित वोट चोरी को सामान्य चुनावी गड़बड़ी मानने से इनकार करते हुए कहा कि यह हर नागरिक की आवाज चुराने जैसा है। राहुल के शब्दों में, “यह कोई सामान्य चोरी नहीं है। यह हर व्यक्ति की आवाज की चोरी है। कानूनी भाषा में इसे दुर्लभतम मामलों में से एक कहा जाता है। इसे देशद्रोह कहा जाता है।”

राहुल के मुताबिक, यदि किसी किसान, मजदूर या छोटे कारोबारी का बेटा बैंक से कर्ज लेकर उसे चुकाने में असमर्थ रहता है तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होती है, जबकि बड़े उद्योगपतियों के मामलों में अलग रवैया दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि मोदी, शाह, ज्ञानेश कुमार या RSS से जुड़े लोगों के खिलाफ विपक्ष हिंसा का रास्ता नहीं अपनाएगा। विपक्ष लोकतांत्रिक तरीके से और प्रेम के साथ संघर्ष करेगा, लेकिन संविधान को नष्ट करने की अनुमति नहीं देगा।

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रामलीला मैदान में जुटी भीड़ का उल्लेख करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह किसी राजनीतिक दल या उसके नेताओं की आवाज नहीं है, बल्कि देश के युवाओं, किसानों और मजदूरों की आवाज है। यह भीड़ ऐलान कर रही है कि भारत में लोकतंत्र और संविधान को नष्ट नहीं होने दिया जाएगा। हम हिन्दुस्तान के उन लोगों की आवाज बनकर खड़े रहेंगे जो अंतिम पायदान पर खड़े हैं। उनकी आवाज को हम दबने नहीं देगें।

अखिलेश बोले- भाजपा चाहती है कि सिर्फ उसके लोग ही मतदाता हों
राहुल गांधी से पहले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी रैली को संबोधित किया। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के इस आरोप का समर्थन करते हुए कि प्रधानमंत्री मतदाताओं द्वारा चुने जाने के बजाय खुद मतदाताओं का चयन करना चाहते हैं, अखिलेश ने कहा कि भाजपा चाहती है कि भारत में केवल उसके सदस्य ही मतदाता और नागरिक हों।

उन्होंने रामलीला मैदान को लोकतंत्र का ‘हल्दीघाटी’ करार दिया। उल्लेखनीय है कि 1576 में हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर की सेना और महाराणा प्रताप के बीच मुकाबला हुआ था। अखिलेश ने इसी ऐतिहासिक संदर्भ के जरिए केंद्र की सत्ता के खिलाफ विपक्ष की लड़ाई को रेखांकित किया।Image

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के रास्ते केंद्र की सत्ता में पहुंचने वाले लोग उत्तर प्रदेश के रास्ते ही सत्ता से बाहर भी होंगे। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा, “उत्तर प्रदेश के लोग स्वागत करना जानते हैं, लेकिन विदाई देने में उनसे भी ज्यादा माहिर हैं।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी का संदर्भ लेते हुए उनका यह बयान राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण माना गया।

अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि रैली की तैयारी के दौरान भाजपा की ओर से यह कहा गया कि उत्तर प्रदेश में 1.27 करोड़ हिंदू मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। उनके मुताबिक, इसका मतलब है कि राज्य के प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में औसतन 31 हजार मतदाताओं के नाम कम हुए हैं। अखिलेश ने कहा कि इंडिया गठबंधन की ओर से वोट चोरी का मुद्दा उठाए जाने के बाद भाजपा को भी यह महसूस होने लगा है कि उसके समर्थकों के वोट भी काटे जा रहे हैं।

ममता का आरोप- बंगाल में एक करोड़ से अधिक वोट मिटाए
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी रैली में चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। खड़गे ने उन्हें गठबंधन की सबसे वरिष्ठ नेताओं में शामिल बताते हुए संबोधन के लिए आमंत्रित किया। ममता ने आरोप लगाया कि बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के जरिए एक करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह सामान्य चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि केंद्रीय स्तर पर चुनावी व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश है। ममता ने कहा, “हमने वोट नहीं गंवाए, हमसे वोट गंवाए गए हैं। इसका राजनीतिक जवाब हम राजनीति के जरिए देंगे। हम लोकतंत्र के हथियारों से लड़ेंगे।”

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधते हुए उन्होंने उन्हें ‘वैनिश कुमार’ कहकर संबोधित किया। ममता ने कहा कि चुनाव और मतदाताओं को हाईजैक कर लिया गया है और अब वह ज्ञानेश कुमार के पद से हटने का इंतजार कर रही हैं। उन्होंने एक चर्चित नर्सरी कविता की तर्ज पर ‘वैनिश, वैनिश, यस पापा’ कहकर भी तंज कसा, जिस पर मैदान में मौजूद लोगों ने जोरदार प्रतिक्रिया दी।

ममता ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व और Gen-Z युवाओं के प्रति एकजुटता जताते हुए कहा कि युवाओं की लड़ाई और उनके संघर्ष का वह समर्थन करती हैं। उन्होंने कहा, “हम उन्हें छोड़ेंगे नहीं। हम अपनी पूरी ताकत से लड़ेंगे। उन्होंने बंगाल को लूटा है, लेकिन हम लोकतंत्र को बचाएंगे और उसे वापस लाएंगे।” SIR पर तंज कसते हुए ममता ने इसे भाजपा जैसी पार्टी के लिए ‘स्पेशल इंटेंसिव रिलीफ’ करार दिया। उनके इस बयान का मकसद चुनावी पुनरीक्षण की प्रक्रिया को भाजपा के राजनीतिक हितों से जोड़कर निशाना साधना था।

तेजस्वी ने छेड़ा महाभारत में शकुनि की चाल का प्रसंग
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने अपने भाषण में रामलीला मैदान के धार्मिक और ऐतिहासिक संदर्भ को महाभारत से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि रामलीला मैदान में आमतौर पर राम और रावण के बीच युद्ध तथा राम की जीत की रामायण कथा का मंचन होता है, लेकिन आज यहां महाभारत हो रहा है।

तेजस्वी ने कहा, “जब शकुनि ने पासे फेंके थे तो उनमें बेईमानी की थी। अगर आज भी शकुनि अपनी चाल चल रहा है तो हमें इस मैदान को कुरुक्षेत्र बनाना होगा।” उनका यह बयान चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी और विपक्ष की राजनीतिक लड़ाई को महाभारत के प्रतीकों के माध्यम से पेश करने की कोशिश थी।

वामपंथी नेताओं ने बताया- आंदोलन आजादी की दूसरी लड़ाई
इस मेगा रैली में वामपंथी दलों की ओर से माकपा (CPI-M) के महासचिव एमए बेबी और भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य शामिल हुए। एमए बेबी ने कथित वोट चोरी के खिलाफ चल रहे आंदोलन को आजादी की दूसरी लड़ाई बताया। वहीं, दीपांकर भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि भाजपा ने देश को पुलिस स्टेट में बदल दिया है। दोनों नेताओं ने लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर विपक्ष की साझा लड़ाई को आगे बढ़ाने की बात कही।

फारूक अब्दुल्ला का सवाल- यूपी में हटाए गए हिंदू वोटर पाकिस्तानी हैं?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने भी SIR के दौरान मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने उन दावों पर सवाल किया जिनमें हटाए गए कुछ मतदाताओं को घुसपैठिया बताया जा रहा है। फारूक अब्दुल्ला ने पूछा कि यदि उत्तर प्रदेश में हिंदू मतदाताओं के नाम भी सूची से हटाए गए हैं तो क्या उन्हें भी पाकिस्तानी कहा जाएगा? उनका सवाल चुनाव आयोग और भाजपा के उन तर्कों पर राजनीतिक कटाक्ष था, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया को अवैध घुसपैठियों की पहचान से जोड़कर पेश किया जाता रहा है।

महबूबा मुफ्ती ने राम मंदिर के चंदे का मुद्दा उठाया
पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने भाजपा के हिंदुत्व के दावों पर सवाल उठाते हुए अयोध्या के राम मंदिर में कथित चंदा चोरी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा, “उन्होंने राम मंदिर के चंदे की चोरी की है। इससे बड़ी शर्म की बात और क्या हो सकती है?” महबूबा का यह बयान भाजपा की उस राजनीतिक विचारधारा पर निशाना था, जिसमें पार्टी खुद को हिंदुत्व और राम मंदिर आंदोलन की प्रमुख प्रतिनिधि के रूप में प्रस्तुत करती रही है।

नेहा बोरा बोलीं- यह आंदोलन आजादी की दूसरी लड़ाई
रामलीला मैदान की रैली में केवल राजनीतिक दलों के नेता ही नहीं, बल्कि छात्र संगठनों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। आयोजन स्थल पर दो मंच बनाए गए थे। बड़े मंच पर विपक्षी गठबंधन के प्रमुख नेता, विभिन्न दलों के वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्री तथा राजनीतिक हस्तियां मौजूद थीं। छोटे मंच पर विपक्षी सांसदों के साथ सामाजिक कार्यकर्ताओं और जानी-मानी हस्तियों को जगह दी गई। इनमें लेखिका अरुंधति रॉय, फिल्मकार संजय काक, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव, छात्र नेता आयशी घोष और नेहा बोरा शामिल थे।

सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के छात्र संगठन AISA की अध्यक्ष नेहा बोरा ने अपने संबोधन में इस आंदोलन को ‘आजादी की दूसरी लड़ाई’ बताया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी में सभी जातियों और धर्मों के लोगों ने योगदान दिया था, लेकिन मौजूदा दौर में फैलाई जा रही नफरत ने सांप्रदायिक सद्भाव की भावना को कमजोर किया है। उन्होंने रामलीला मैदान में जुटी भीड़ को इस बात का संकेत बताया कि मौजूदा सत्ता का दौर हमेशा नहीं रहने वाला।

रैली के दौरान देशभक्ति गीतों पर युवा नाचते दिखाई दिए। हिमाचल प्रदेश और झारखंड से आए आदिवासी समुदायों के लोगों ने ढोल-नगाड़ों की थाप पर पारंपरिक नृत्य किया। मैदान के बाहर भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। कुछ अनुमानों में आयोजन स्थल और आसपास की भीड़ को मिलाकर संख्या करीब एक लाख बताई गई, हालांकि भीड़ के वास्तविक आंकड़े को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए।

कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन
रैली से पहले विपक्षी नेताओं ने खुली गाड़ियों के काफिले के साथ कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक मार्च निकाला। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, अभिषेक बनर्जी, महबूबा मुफ्ती, फारूक अब्दुल्ला, एमए बेबी, नेहा बोरा और डी. राजा समेत कई प्रमुख नेता इस मार्च में शामिल हुए। नेताओं का काफिला मिंटो रोड और कनॉट प्लेस के जंक्शन से रामलीला मैदान की ओर बढ़ा। रास्ते में बड़ी संख्या में समर्थक उनके साथ चलते रहे। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग और केंद्र सरकार के खिलाफ अजब-गजब नारे लगाए।

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राहुल गांधी ने रैली स्थल पहुंचने से पहले कनॉट प्लेस में दुकानों के बंद होने का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने दुकानदारों पर दबाव डालकर दुकानें बंद करवाईं, जिससे कारोबारियों को नुकसान हुआ। राहुल ने कहा कि देश देख रहा है कि भाजपा किस तरह दुकानदारों के कारोबार को प्रभावित कर रही है। इससे पहले कुछ व्यापारी संगठनों ने आशंका जताई थी कि विपक्ष के प्रदर्शन से कारोबार प्रभावित होगा। इसके जवाब में राहुल गांधी ने रैली में शामिल होने दिल्ली आ रहे लोगों से दीपावली की खरीदारी भी दिल्ली में करने की अपील की थी।

SIR पर बढ़ता विवाद और लोकतंत्र की कसौटी
रामलीला मैदान की रैली ने चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर चल रहे राजनीतिक विवाद को एक नया आयाम दिया है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण के नाम पर बड़ी संख्या में वैध मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं और इससे खासकर कमजोर तथा वंचित समुदायों के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया में दोहराए गए और अपात्र नामों को हटाया जा रहा है। आयोग का कहना है कि जिन पात्र मतदाताओं के नाम गलती से हटे हैं, वे दोबारा पंजीकरण करा सकते हैं। भाजपा ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए आंदोलन को राजनीतिक अभियान बताया है।

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ऐसे में मूल सवाल केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि मतदाता सूची की पारदर्शिता, पुनरीक्षण की प्रक्रिया और नागरिकों के मतदान अधिकारों की सुरक्षा का है। विपक्ष ने रामलीला मैदान से इस मुद्दे को प्रधानमंत्री और गृह मंत्री तक पहुंचाकर अपनी राजनीतिक लड़ाई का दायरा बढ़ा दिया है। अब इस पूरे विवाद की असली कसौटी यह होगी कि मतदाता सूची में नामों को हटाने और जोड़ने की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी साबित होती है, चुनाव आयोग उठाए जा रहे सवालों का कितना स्पष्ट जवाब देता है और राजनीतिक दल अपने आरोपों को प्रमाणों के साथ कितना पुष्ट कर पाते हैं। लोकतंत्र में सत्ता और विपक्ष के बीच संघर्ष स्वाभाविक है, लेकिन मतदाता का अधिकार किसी भी राजनीतिक मुकाबले से ऊपर होना चाहिए।

दिल्ली पुलिस ने किए थे सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
रैली को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। अधिकारियों के मुताबिक, मैदान और आसपास के इलाकों में करीब 3,000 पुलिसकर्मियों तथा 10,000 अर्धसैनिक बलों के जवानों की तैनाती की गई थी। पुलिस की कोशिश रही कि भीड़ निर्धारित कार्यक्रम स्थल तक सीमित रहे और वहां से जंतर-मंतर की ओर न बढ़े। मालूम हो कि अक्टूबर के पहले पखवाड़े में दिल्ली में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान सहित तीन स्थानों को विरोध प्रदर्शन के लिए निर्धारित किया था।

रामलीला मैदान में इंडिया ब्लॉक की रैली को लेकर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। सेंट्रल दिल्ली के डीसीपी रोहित राजबीर की मानें तो पूरे इलाके में 200 से 250 CCTV कैमरे लगाए गए थे। रैली के आयोजकों ने भी अपना कंट्रोल रूम बना रखा था। पुलिस और आयोजक मिलकर सुरक्षा व्यवस्था संभाल रहे थे। DCP के मुताबिक, पुलिस की मदद के लिए सेवा दल, सिविल डिफेंस कमेटी और स्थानीय रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन के सदस्य भी मौजूद थे। ये वॉलंटियर्स आसपास की सड़कों पर भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस की मदद कर रहे थे।

राहुल गांधी ने रैली में शामिल होने के लिए दिल्ली पहुंच रहे लोगों से स्थानीय दुकानदारों और छोटे व्यापारियों से खरीदारी करने की भी अपील की है। उन्होंने कहा कि दीपावली, छठ और भाई दूज के त्योहारों के दौरान दिल्ली के बाजारों में खरीदारी करके स्थानीय कारोबारियों को समर्थन दिया जाना चाहिए। व्यापारिक संगठनों की ओर से त्योहारों के दौरान संभावित व्यवधान को लेकर जताई गई चिंताओं पर राहुल गांधी ने भाजपा पर अफवाह फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रैली से स्थानीय कारोबार को कोई नुकसान नहीं होगा।

दूसरी ओर, भाजपा ने विपक्ष के प्रतीकात्मक जनमहाभियोग और चुनावी सूची में गड़बड़ी के आरोपों को लोकतंत्र का मजाक बताया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कांग्रेस और INDIA ब्लॉक पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष को राहुल गांधी को अपना ‘मॉक प्रधानमंत्री’ घोषित कर देना चाहिए। उन्होंने SIR में गड़बड़ी के आरोपों को खारिज करते हुए जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री बनने को लेकर भी विवादास्पद टिप्पणी की और दावा किया कि नेहरू ने सरदार वल्लभभाई पटेल की जगह लेकर प्रधानमंत्री पद हासिल किया था। पात्रा ने राहुल गांधी को ऐसा ‘सैटेलाइट’ बताया, जो कभी लॉन्च नहीं होगा। भाजपा के इस हमले से साफ है कि चुनाव आयोग और SIR के सवाल पर विपक्ष तथा सत्तारूढ़ दल के बीच राजनीतिक टकराव और तीखा होने वाला है।