Last Updated on February 21, 2026 12:07 pm by INDIAN AWAAZ

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अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा लगाए गए व्यापक वैश्विक टैरिफ (शुल्क) को रद्द कर दिया। यह फैसला ट्रंप की प्रमुख आर्थिक नीतियों में से एक के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
फैसले के बाद ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा, “टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला बेहद निराशाजनक है। मैं अदालत के कुछ सदस्यों से शर्मिंदा हूं, क्योंकि उन्होंने हमारे देश के लिए सही कदम उठाने का साहस नहीं दिखाया।”
6-3 के बहुमत से दिए गए निर्णय में अदालत ने कहा कि ट्रंप ने संघीय आपातकालीन कानून का इस्तेमाल करते हुए अपनी अधिकार-सीमा का उल्लंघन किया। यह कानून International Emergency Economic Powers Act (अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम) कहलाता है। इसके तहत राष्ट्रपति राष्ट्रीय आपातकाल घोषित कर “किसी असामान्य और असाधारण खतरे” से निपटने के लिए आयात और निर्यात को नियंत्रित कर सकते हैं।
अदालत का यह फैसला ट्रंप द्वारा लगाए गए अधिकांश टैरिफ पर लागू होता है। इसमें कई देशों और क्षेत्रों, जिनमें Japan भी शामिल है, से आने वाले विभिन्न सामानों पर लगाए गए शुल्क शामिल हैं। साथ ही चीन, कनाडा और मेक्सिको पर फेंटानिल मुद्दे से जुड़े अतिरिक्त टैरिफ भी इस फैसले के दायरे में आते हैं।
हालांकि, अदालत ने ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स, स्टील और एल्युमिनियम पर लगाए गए शुल्कों पर फैसला नहीं दिया, क्योंकि वे अलग-अलग कानूनों के तहत लगाए गए थे।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक तब पहुंचा जब निचली अदालतों ने भी इन टैरिफ के खिलाफ निर्णय दिया था। इस बड़े कानूनी झटके के बाद अब ट्रंप प्रशासन को वसूले गए शुल्कों की “वापसी” (रिफंड) के मुद्दे का सामना करना पड़ सकता है।
इसके बावजूद ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने 10 प्रतिशत का नया वैश्विक टैरिफ लागू करने के आदेश पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। उन्होंने पहले संकेत दिया था कि यह नया कदम किसी अन्य कानून के तहत उठाया जाएगा।
