Last Updated on January 14, 2026 1:19 am by INDIAN AWAAZ

AMN / BIZ DESK

भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक मंगलवार को सीमित गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशकों की सतर्क धारणा, मुनाफावसूली और वैश्विक अनिश्चितताओं ने शुरुआती बढ़त को खत्म कर दिया। बीएसई सेंसेक्स 250 अंक या 0.30 प्रतिशत गिरकर 83,627 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 58 अंक या 0.22 प्रतिशत फिसलकर 25,732 पर आ गया।

बाजार की शुरुआत सकारात्मक रही, जिसे आईटी सेक्टर के बेहतर संकेतों और भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता में प्रगति की उम्मीद से समर्थन मिला। हालांकि, भारी वजन वाले शेयरों में बिकवाली आने से तेजी टिक नहीं पाई। भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक व्यापार नीतियों को लेकर अनिश्चितता के कारण निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता सीमित रही और कारोबार मुख्य रूप से स्टॉक-विशेष तक सिमटा रहा।

निवेशकों की चिंता उस समय और बढ़ गई जब ईरान से व्यापार करने वाले देशों पर संभावित अमेरिकी टैरिफ को लेकर नई आशंकाएँ सामने आईं। इसके अलावा रुपये की कमजोरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और लगातार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली ने भी बाजार पर दबाव बनाए रखा।

हालांकि, सकारात्मक पक्ष पर दिसंबर की खुदरा महंगाई (CPI) भारतीय रिज़र्व बैंक के लक्ष्य दायरे में बनी रही, जिससे भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद मजबूत हुई। इसके बावजूद, तीसरी तिमाही (Q3) के नतीजों की शुरुआत फीकी रही और मिश्रित कॉरपोरेट परिणामों के चलते निवेशकों ने मुनाफावसूली को तरजीह दी।


सेक्टर-वार प्रदर्शन

  • सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी): चुनिंदा कंपनियों के नतीजों से शुरुआती तेजी दिखी, लेकिन बड़े खिलाड़ियों के सतर्क आउटलुक के कारण लाभ टिक नहीं सका।
  • बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं: निजी बैंकों और वित्तीय शेयरों में मुनाफावसूली देखी गई, जबकि पीएसयू बैंक मिलाजुला प्रदर्शन करते रहे।
  • तेल और गैस: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी से डाउनस्ट्रीम कंपनियों पर दबाव रहा।
  • धातु (मेटल): वैश्विक मांग और व्यापार से जुड़ी चिंताओं के कारण मेटल शेयरों में कमजोरी रही।
  • एफएमसीजी: रक्षात्मक प्रकृति के कारण इस सेक्टर ने सीमित सहारा दिया।
  • फार्मा और हेल्थकेयर: निर्यात-आधारित शेयरों में चुनिंदा खरीदारी से मिला-जुला रुख रहा।
  • मिडकैप और स्मॉलकैप: स्मॉलकैप शेयरों में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन देखा गया, जहां निवेशकों ने चुनिंदा शेयरों में निवेश किया।

बाजार का रुझान और आगे की राह

वर्ष 2026 में अब तक सेंसेक्स और निफ्टी लगभग 2 प्रतिशत नीचे हैं। इससे पहले 2025 में दोनों सूचकांकों ने 8–10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की थी, जो हाल के वर्षों की तुलना में धीमी रही।

कमजोर विदेशी निवेश और भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण हाल के महीनों में बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने से निवेशकों की धारणा पर नकारात्मक असर पड़ा है।

पिछले वर्षों पर नजर डालें तो 2024 में सूचकांकों ने 9–10 प्रतिशत, 2023 में 16–17 प्रतिशत और 2022 में करीब 3 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की थी, जो यह दर्शाता है कि वैश्विक और घरेलू चुनौतियों के बीच रिटर्न की गति अब धीमी हो रही है।