Last Updated on February 22, 2026 1:16 pm by INDIAN AWAAZ

गृहमंत्री अमित शाह ने कहा-31 मार्च तक देश से नक्सलवाद का सफाया हो जाएगा

इंद्र वशिष्ठ
केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने एक बार फिर से दोहराया कि 31 मार्च 2026 को देश को माओवादी समस्या से पूर्ण रूप से मुक्त करा देंगे। माओवाद का सम्पूर्ण उन्मूलन हो जाएगा। शनिवार को असम के गुवाहाटी में केन्द्रीय रिज़र्व पुलिस बल के 87 वें स्थापना दिवस समारोह में अमित शाह ने कहा कि देश के 12 राज्यों और अनगिनत ज़िलों में नक्सलवाद फैला हुआ था।

इतना बड़ा, विकट और दुष्कर काम मात्र तीन साल में ही समाप्त कर दिया गया और सीआरपीएफ के जवानों के भरोसे कह सकते हैं कि 31 मार्च, 2026 को देश नक्सलवाद से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। नक्सलवादियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट को विषम भौगोलिक परिस्थितियों में 46 डिग्री तापमान में 21 दिन तक कड़ी धूप में सीआरपीएफ के जवानों ने अंजाम दिया और नक्सलियों के आश्रय और रणनीतिक स्थान को समाप्त कर दिया। 

गृहमंत्री ने कहा कि जब देश  लाल आतंक से मुक्त हो जाएगा तो इसमें सीआरपीएफ और कोबरा बटालियन का बहुत बड़ा योगदान है। देश को सुरक्षित रखने में सीआरपीएफ के 2270 जवान अपना सर्वोच्च बलिदान दे चुके हैं। 

अमित शाह ने कहा कि 11-12 साल पहले देश में 3 बड़े हॉटस्पॉट- जम्मू और कश्मीर, वामपंथी उग्रवाद-प्रभावित क्षेत्र और उत्तर-पूर्वी राज्य देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए नासूर बने हुए थे। आज इन तीनों जगह पर शांति स्थापित करने में हमें सफलता मिली है। सीआरपीएफ के इन बलिदानियों के बिना इन तीनों हॉटस्पॉट को विकास के रास्ते पर ले जाना असंभव था।

 1939 में सिर्फ 2 बटालियन के साथ सीआरपीएफ का सफर शुरू हुआ था और आज 248 बटालियन और 3 लाख 25 हज़ार के संख्याबल के साथ सीआरपीएफ विश्व का सबसे बड़ी सीएपीएफ बन गया है। 9 अप्रैल, 1965 को कच्छ के रण में सीआरपीएफ ने सरदार पोस्ट पर बहादुरी दिखाते हुए पाकिस्तानी सेना का सामना किया था और इसी कारण हर वर्ष 9 अप्रैल को शौर्य दिवस के रूप में मनाया जाता है।

गृह मंत्री ने कहा कि जब वामपंथी उग्रवादियों के हमले में कोलकाता में पुलिस के 78 जवानों की हत्या की गई थी तब भी  सीआरपीएफ के जवानों ने मोर्चा संभाला था, संसद पर हुए आतंकी हमले को भी सीआरपीएफ ने नाकाम किया था और 2005 में श्रीरामजन्मभूमि पर हुए हमले को भी सीआरपीएफ नाकाम किया था। कश्मीर से धारा 370 हटने के बाद वहां एक भी गोली नहीं चलानी पड़ी, इसमें भी सीआरपीएफ की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

जम्मू और कश्मीर में पत्थरबाज़ी की घटनाएं शून्य हो गई हैं, उद्योग आ रहे हैं और विकास हो रहा है और इसमें सीआरपीएफ, बीएसएफ और विशेषकर जम्मू और कश्मीर पुलिस का बहुत बड़ा योगदान है। पूर्वोत्तर के राज्यों में शांति बहाली में भी सीआरपीएफ की भूमिका रही।