Last Updated on January 31, 2026 12:27 pm by INDIAN AWAAZ
अनुच्छेद 21 के तहत मासिक धर्म स्वास्थ्य मौलिक अधिकार: सुप्रीम कोर्ट

स्टाफ रिपोर्टर / नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि मासिक धर्म स्वच्छता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और स्कूलों को किशोरियों और महिलाओं की गरिमा, स्वास्थ्य और समानता सुनिश्चित करने के लिए कई बाध्यकारी निर्देश जारी किए।
न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि प्रत्येक स्कूल में किशोर बालिकाओं को निःशुल्क जैव-अपघटनीय (बायोडिग्रेडेबल) सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाएं।

पीठ ने कहा कि मासिक धर्म को लेकर बुनियादी सुविधाओं की कमी और सामाजिक कलंक सीधे तौर पर लड़कियों के स्वास्थ्य, शिक्षा और निजता को प्रभावित करते हैं। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि स्कूलों में कार्यशील, स्वच्छ और लैंगिक रूप से अलग-अलग शौचालय उपलब्ध कराए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की राष्ट्रीय नीति—‘स्कूल जाने वाली बालिकाओं के लिए मासिक धर्म स्वच्छता नीति’—को कक्षा 6 से 12 तक की किशोरियों के लिए देशभर के स्कूलों में अनिवार्य रूप से लागू करने का निर्देश दिया। यह मामला स्कूल छात्राओं को निःशुल्क सैनिटरी पैड और पर्याप्त स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इन निर्देशों का पालन सरकारी और निजी—दोनों प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों के लिए अनिवार्य होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर निजी स्कूलों की मान्यता रद्द की जा सकती है, विशेषकर यदि वे लड़कियों और लड़कों के लिए अलग शौचालय उपलब्ध नहीं कराते या छात्राओं को निःशुल्क सैनिटरी पैड की सुविधा नहीं देते।
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