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सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में सुस्ती का माहौल रहा और दोनों प्रमुख सूचकांक लगभग अपने पिछले स्तरों के करीब ही बंद हुए। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और पश्चिम एशिया में अस्थिरता के कारण निवेशकों ने ‘वेट एंड वॉच’ (ठहरो और देखो) की नीति अपनाई। वैश्विक स्तर पर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बनी अनिश्चितता ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
NSE निफ्टी 50 मामूली 11.30 अंक (0.05%) की बढ़त के साथ 24,364.85 पर बंद हुआ, जबकि BSE सेंसेक्स भी महज 26.76 अंक (0.03%) चढ़कर 78,520.30 के स्तर पर स्थिर रहा।
सेक्टरवार प्रदर्शन: मीडिया और ऑटो में खरीदारी, बाकी जगह बिकवाली
बाजार में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जहाँ कुछ रक्षात्मक क्षेत्रों में खरीदारी दिखी, वहीं निर्यात और बुनियादी ढांचे से जुड़े क्षेत्रों में दबाव रहा।
| सेक्टर | प्रदर्शन | स्थिति |
| निफ्टी मीडिया | +0.65% | सेक्टर में सबसे अधिक तेजी देखी गई। |
| निफ्टी ऑटो | +0.16% | कच्चे तेल की कीमतों के बावजूद मामूली बढ़त बनाने में सफल रहा। |
| IT, FMCG, मेटल | लाल निशान में | वैश्विक अनिश्चितता के कारण इन क्षेत्रों में मुनाफावसूली हावी रही। |
| फार्मा और रियल्टी | लाल निशान में | निवेशकों ने जोखिम कम करने के लिए इन क्षेत्रों से दूरी बनाई। |
कच्चे तेल में उबाल: $94 के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड
बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी रही। होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने की आशंका के चलते ब्रेंट क्रूड 4% से अधिक उछलकर $94.48 प्रति बैरल पर पहुंच गया। भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह महंगाई और व्यापार घाटे की दृष्टि से एक नकारात्मक संकेत है।
कमोडिटी बाजार: सोना स्थिर, चांदी फिसली
सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी रही, जबकि औद्योगिक मांग में कमी की आशंका से चांदी में गिरावट दर्ज की गई:
- सोना (24 कैरेट): ₹1,53,362 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करता दिखा।
- चांदी: 2.24% की गिरावट के साथ ₹2,51,381 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई।
विशेषज्ञ की राय: बाजार विश्लेषकों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता, तब तक घरेलू बाजार में बड़ी तेजी की संभावना कम है। निवेशकों को आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के रुख पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
