Last Updated on February 12, 2026 5:52 pm by INDIAN AWAAZ
वंदे मातरम् के सभी पदों का पाठ अनिवार्य करना असंवैधानिक: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

Staff Reporter / New Delhi
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने केंद्र सरकार द्वारा जारी उस हालिया अधिसूचना पर कड़ा ऐतराज जताया है, जिसमें सरकारी कार्यक्रमों और स्कूलों में राष्ट्रगान “जन गण मन” से पहले “वंदे मातरम्” के सभी पदों का पाठ अनिवार्य करने का निर्देश दिया गया है। बोर्ड ने इस निर्णय को असंवैधानिक, धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ और अस्वीकार्य बताया है।
बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद फज़लुर रहीम मुजद्दिदी ने जारी प्रेस बयान में कहा कि सरकार का यह कदम धर्मनिरपेक्षता के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध है और यह सुप्रीम कोर्ट के फैसलों तथा संविधान में प्रदत्त धार्मिक स्वतंत्रता से भी टकराता है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय मुसलमानों की धार्मिक आस्था से सीधे तौर पर टकराता है, इसलिए इसे किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
मौलाना ने कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह और संविधान सभा में विचार-विमर्श के बाद यह सहमति बनी थी कि वंदे मातरम् के केवल पहले दो पदों का ही उपयोग किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि कोई भी धर्मनिरपेक्ष सरकार किसी एक धर्म की मान्यताओं को दूसरे धर्म के अनुयायियों पर जबरन थोप नहीं सकती।
उन्होंने यह भी कहा कि गीत के अन्य पदों में दुर्गा और अन्य देवी-देवताओं की वंदना से जुड़े संदर्भ आते हैं, जो इस्लाम के मूल सिद्धांतों से मेल नहीं खाते। मौलाना के अनुसार, मुसलमान केवल एक ईश्वर अल्लाह की उपासना करते हैं और इस्लाम में किसी को ईश्वर के साथ साझीदार ठहराने की अनुमति नहीं है।
बोर्ड ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल चुनावों के मद्देनजर इस फैसले के पीछे राजनीतिक उद्देश्य हो सकते हैं, लेकिन मुस्लिम समुदाय इसे अपनी आस्था के खिलाफ मानते हुए स्वीकार नहीं करेगा।
महासचिव ने कहा कि भारतीय न्यायालयों ने भी कई बार यह स्पष्ट किया है कि वंदे मातरम् के अन्य पदों का पाठ धर्मनिरपेक्षता के अनुरूप नहीं है, इसलिए इनके पाठ पर सीमाएं लगाई गई थीं।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र सरकार से मांग की है कि वह इस अधिसूचना को तत्काल वापस ले, अन्यथा बोर्ड इस फैसले को अदालत में चुनौती देगा।
