Last Updated on June 22, 2026 11:41 pm by INDIAN AWAAZ

AMN / नई दिल्ली

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने देश में मुसलमानों के खिलाफ कथित रूप से बढ़ते भेदभाव, सामाजिक हाशियाकरण और लक्षित कार्रवाइयों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए इन मुद्दों पर राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू करने की घोषणा की है।

राजधानी दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बोर्ड के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. एस. क्यू. आर. इलियास ने कहा कि हाल ही में हुई बोर्ड की कार्यकारिणी समिति की बैठक में देश और विशेष रूप से मुस्लिम समुदाय की वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा की गई। बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए गए।

डॉ. इलियास ने कहा कि कार्यकारिणी ने उन घटनाओं पर चिंता जताई है जिनमें भीड़ हिंसा (लिंचिंग), मस्जिदों और मदरसों पर कार्रवाई, बुलडोजर अभियान, धार्मिक मामलों में सरकारी हस्तक्षेप तथा विभिन्न राज्यों में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने की दिशा में हो रही पहलें शामिल हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों में मुसलमानों के जीवन, संपत्ति, सम्मान, धार्मिक संस्थानों और संवैधानिक अधिकारों पर दबाव बढ़ा है तथा समाज में अविश्वास और सांप्रदायिक तनाव का माहौल पैदा हो रहा है। बोर्ड का कहना है कि इस तरह की घटनाएं केवल किसी एक समुदाय का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक संतुलन के लिए भी चुनौती हैं।

प्रेस वार्ता में डॉ. इलियास ने यह भी कहा कि नफरत फैलाने वाले बयानों और सांप्रदायिक तनाव पैदा करने वाली घटनाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं होने को लेकर बोर्ड चिंतित है। उन्होंने कहा कि संविधान द्वारा प्रदत्त अधिकारों की रक्षा और सभी नागरिकों के लिए समान व्यवहार सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

बोर्ड ने घोषणा की कि वह मुसलमानों की स्थिति, सांप्रदायिक तनाव और कथित संवैधानिक अधिकारों के उल्लंघन पर एक विस्तृत दस्तावेज तैयार करेगा। इसके माध्यम से नागरिक समाज, लोकतांत्रिक संस्थाओं और संवैधानिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले लोगों को जागरूक करने का प्रयास किया जाएगा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में मध्य प्रदेश के कमाल मौला मस्जिद/भोजशाला विवाद का भी उल्लेख किया गया। बोर्ड ने संबंधित न्यायिक फैसले पर असहमति जताते हुए कहा कि ऐतिहासिक अभिलेखों और लंबे समय से चली आ रही धार्मिक परंपराओं को महत्व दिया जाना चाहिए। साथ ही, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रही कानूनी प्रक्रिया को समर्थन देने की बात कही गई।

बोर्ड ने स्कूलों और सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में ‘वंदे मातरम्’ को अनिवार्य बनाने के प्रयासों का भी विरोध किया। डॉ. इलियास ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता और व्यक्तिगत आस्था का सम्मान किया जाना चाहिए और किसी भी प्रकार की अनिवार्यता संविधान की भावना के अनुरूप नहीं मानी जा सकती।

समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर भी AIMPLB ने अपनी आपत्ति दोहराते हुए कहा कि भारत की विविधतापूर्ण सामाजिक संरचना और धार्मिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखा जाना चाहिए। बोर्ड ने संकेत दिया कि आवश्यक होने पर वह इस विषय पर कानूनी लड़ाई भी जारी रखेगा।

अपने अगले कदम की घोषणा करते हुए बोर्ड ने कहा कि मुसलमानों के सामाजिक और राजनीतिक हाशियाकरण, सांप्रदायिक तनाव तथा संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के मुद्दे पर वह देशभर में अभियान चलाएगा। इसके लिए एक विशेष एक्शन कमेटी गठित की जाएगी।