
विशेष संवाददाता, पटना
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने रविवार को राज्य सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि नीट पेपर लीक आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किए गए छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों को तत्काल रिहा नहीं किया गया तथा उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए, तो विपक्ष पूरे बिहार में बड़ा आंदोलन करेगा।
पटना पहुंचने के बाद पत्रकारों से बातचीत में तेजस्वी यादव ने कहा कि नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वाले छात्रों ने अपने बेहतर भविष्य और अधिकारों के लिए संघर्ष किया है। उन्होंने कहा कि इस आंदोलन को सभी प्रमुख विपक्षी दलों का समर्थन मिला और उनकी पार्टी भी छात्रों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रही।
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि आंदोलन समाप्त होने और सरकार के साथ सहमति बनने के बाद यह तय हुआ था कि आंदोलन में शामिल लोगों पर दर्ज सभी मुकदमे वापस लिए जाएंगे। इसके बावजूद बिहार में छात्रों और विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई जारी है।
उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न जिलों में सैकड़ों छात्रों को हिरासत में लिया गया, उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए गए और कई लोगों को जेल भेज दिया गया। उन्होंने कहा कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन है।
तेजस्वी यादव ने कहा, “हम आग्रह नहीं, चेतावनी दे रहे हैं कि जिन छात्रों और अन्य लोगों को जेल भेजा गया है, उन्हें तुरंत रिहा किया जाए और सभी मुकदमे वापस लिए जाएं। यदि ऐसा नहीं हुआ तो हम पूरे बिहार में बड़ा आंदोलन करेंगे।”
उन्होंने आरोप लगाया कि कई विपक्षी नेताओं और विधायकों को भी हिरासत में लिया गया, जिनमें उनके बड़े भाई और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव भी शामिल हैं।
सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
तेजस्वी यादव ने बिहार सरकार पर लोकतांत्रिक विरोध को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस का इस्तेमाल छात्रों की आवाज़ दबाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य के कई जिलों में छात्रों पर बल प्रयोग किया गया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन को कठोर कार्रवाई के जरिए दबाने की कोशिश हुई।
सिवान की घटना का उल्लेख करते हुए तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों पर पुलिस ने गोली चलाई। उन्होंने दोषी पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
बिहार बंद के दौरान हुई थी कार्रवाई
पूर्व मंत्री और जनशक्ति जनता दल के प्रमुख तेज प्रताप यादव को शनिवार देर रात गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में पटना की बेऊर जेल भेज दिया गया। इससे पहले वे 25 जुलाई को आयोजित बिहार बंद में शामिल हुए थे। दिन में उन्हें कुछ समय के लिए हिरासत में लेकर छोड़ दिया गया था, लेकिन बाद में दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया।
हिरासत में लिए जाने के दौरान तेज प्रताप यादव का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह पुलिस वाहन के दरवाजे से लटकते हुए छात्रों के समर्थन में नारे लगाते दिखाई दिए। उन्होंने कहा कि वह छात्रों के अधिकारों की लड़ाई में हर कुर्बानी देने को तैयार हैं।
कई जिलों में हिंसा और झड़पें
25 जुलाई को बिहार बंद के दौरान राज्य के कई जिलों में प्रदर्शन हिंसक हो गया। सिवान में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसमें कई लोग घायल हुए। पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। पुलिस अधिकारियों ने स्वीकार किया कि झड़प के दौरान गोलीबारी हुई।
सिवान के पुलिस अधीक्षक पूरन कुमार झा ने कहा कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा पुलिस पर फायरिंग किए जाने के बाद आत्मरक्षा में पुलिस ने गोली चलाई। उन्होंने कहा कि यह जांच की जा रही है कि घायल लोग पुलिस की गोली से घायल हुए या दूसरी ओर से हुई फायरिंग में।
छपरा सहित अन्य जिलों में भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प, पथराव, सरकारी वाहनों में तोड़फोड़ तथा पुलिस की ओर से लाठीचार्ज और आंसू गैस के इस्तेमाल की घटनाएं सामने आईं।
अब तेजस्वी यादव द्वारा गिरफ्तार छात्रों और अन्य प्रदर्शनकारियों की रिहाई तथा मुकदमे वापस लेने की मांग को लेकर बिहार सरकार को दी गई आंदोलन की चेतावनी से राज्य की राजनीति एक बार फिर गर्माने के संकेत मिल रहे हैं।
