Last Updated on January 9, 2026 11:07 pm by INDIAN AWAAZ
बाजार में गिरावट, सितंबर 2025 के बाद सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन

AMN / बिज़ डेस्क
भारतीय शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में शुक्रवार को लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। इसके साथ ही बाजार ने सितंबर 2025 के बाद का सबसे खराब साप्ताहिक प्रदर्शन दर्ज किया। कमजोर वैश्विक संकेतों, बढ़ती बॉन्ड यील्ड और निवेशकों की सतर्कता के कारण बाजार पर दबाव बना रहा। शुक्रवार के कारोबार में रियल्टी, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा बिकवाली देखने को मिली।
कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 604.72 अंकों या 0.72 प्रतिशत की गिरावट के साथ 83,576.24 पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी50 193.55 अंकों या 0.75 प्रतिशत टूटकर 25,683.30 पर आ गया। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स में 2.4 प्रतिशत और निफ्टी में 2.45 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जो 26 सितंबर 2025 को समाप्त सप्ताह के बाद सबसे कमजोर प्रदर्शन है।
बाजार में अस्थिरता भी तेज़ी से बढ़ी। इंडिया VIX में इस सप्ताह 15.6 प्रतिशत की उछाल दर्ज की गई, जो मई 2025 के बाद सबसे अधिक है। इससे निवेशकों के बीच अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति स्पष्ट होती है।
सेंसेक्स शेयरों का हाल
सेंसेक्स के 30 शेयरों में एशियन पेंट्स, एचसीएल टेक, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL), इटरनल, रिलायंस इंडस्ट्रीज और भारतीय स्टेट बैंक के शेयरों में सीमित बढ़त देखी गई। वहीं एनटीपीसी, अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन, आईसीआईसीआई बैंक, भारती एयरटेल और सन फार्मा के शेयरों में गिरावट ने बाजार को नीचे खींचा।
मिडकैप और स्मॉलकैप पर दबाव
व्यापक बाजार में बिकवाली ज्यादा तेज़ रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.79 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 1.81 प्रतिशत गिरकर बंद हुआ। हिताची एनर्जी इंडिया, जीई वर्नोवा एंड टीएंडडी, एलेकोन इंजीनियरिंग, इंडियन एनर्जी एक्सचेंज और गोदरेज प्रॉपर्टीज जैसे शेयर सबसे ज्यादा नुकसान उठाने वालों में रहे।
सेक्टरवार प्रदर्शन
सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में 2.2 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज की गई, जबकि निफ्टी केमिकल्स इंडेक्स 1.16 प्रतिशत टूट गया। इसके उलट निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी आईटी इंडेक्स में सीमित बढ़त देखने को मिली, जिससे बाजार को कुछ सहारा मिला।
निवेश प्रवाह और आउटलुक
एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने भारतीय इक्विटी बाजार से करीब 12,000 करोड़ रुपये की निकासी की है। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के अनुसार, कमजोर वैश्विक संकेतों और बढ़ती वैश्विक बॉन्ड यील्ड के चलते बाजार फिलहाल कंसोलिडेशन के दौर में है, हालांकि तीसरी तिमाही के नतीजों को लेकर उम्मीदें अब भी सकारात्मक बनी हुई हैं।
