Last Updated on December 11, 2020 12:11 am by INDIAN AWAAZ

वरिष्ठ कवि एवं पत्रकार मंगलेश डबराल का बुधवार को निधन हो गया है. वे 72 साल के थे और कोरोना से संक्रमित थे. साहित्यकार आनंद स्वरूप वर्मा ने बीबीसी को बताया कि मंगलेश डबराल ने दिल्ली के एम्स अस्पताल में बुधवार देर शाम आख़िरी सांस ली.
साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित कवि-लेखक मंगलेश डबराल समकालीन हिंदी के चर्चित कवियों में शुमार थे. उनके निधन पर साहित्य जगत से जुड़े कई लोगों ने अपनी संवेदनाएं जताई हैं.
पहाड़ पर लालटेन, घर का रास्ता, हम जो देखते हैं, आवाज़ भी एक जगह है और नये युग में शत्रु- मंगलेश डबराल के 5 काव्य संग्रह हैं.
सत्तर और अस्सी के दशकों में नक्सल आंदोलन से प्रेरित-प्रभावित हिंदी कविता को उन्होंने ‘पहाड़ पर लालटेन’ जैसा अद्भुत संग्रह दिया और बताया कि बहुत तीखे क्रोध और विरोध को कैसे मार्मिक और मद्धिम आवाज़ में भी पूरी तीव्रता से व्यक्त किया जा सकता है, बल्कि उसमें सुलगते-कौंधते रूपकों और बिंबों की मार्फ़त कैसे अर्थों की नई तहें पैदा की जा सकती हैं. उन अर्थों की, जो एक बहुत संवेदनशील जीवन की जुगनू जैसी ख़ुशियों और असमाप्त होते दुखों के बीच बनते थे.
मंगलेश डबराल ने कविता, डायरी, गद्य, अनुवाद, संपादन, पत्रकारिता और पटकथा लेखन जैसी साहित्य की विविध विधाओं में अपना हाथ आज़माया.
