Last Updated on October 1, 2026 2:10 pm by INDIAN AWAAZ

स्टाफ रिपोर्टर / नई दिल्ली:
विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने ऑनलाइन फॉर्म-6 में किए गए विवादित बदलाव को लेकर चुनाव आयोग (ECI) से जवाब मांगा है। उन्होंने सवाल उठाया है कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को इस बदलाव के लिए निर्देश किस अधिकारी ने दिया और TCS में इसे मंजूरी किसने दी।
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर सवाल किया, “ECI में किसने TCS को यह बदलाव करने का आदेश दिया? TCS में इसे किसने मंजूरी दी? और क्या ऐसा करने के लिए उन पर कोई दबाव डाला गया था?”
उनके सवाल ऐसे समय आए हैं जब उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार चुनाव आयोग के आयुक्तों ने भी ऑनलाइन फॉर्म में किए गए बदलाव पर आपत्ति जताई थी। राहुल गांधी ने बदलाव की पूरी स्वीकृति प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका सवाल है कि ECI के किस अधिकारी ने TCS को ऑनलाइन फॉर्म में संशोधन का निर्देश दिया, TCS में किस अधिकारी ने इसे मंजूरी दी और क्या इस बदलाव को लागू करने के लिए कंपनी पर किसी तरह का दबाव था।
विवाद ऑनलाइन फॉर्म-6 में SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) से संबंधित एक घोषणा जोड़े जाने को लेकर है। फॉर्म-6 का इस्तेमाल नागरिकों द्वारा मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किया जाता है। चुनाव आयोग का कहना है कि वैधानिक फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया, बल्कि ऑनलाइन प्रक्रिया में एक अतिरिक्त घोषणा जोड़ी गई थी।
हालांकि, उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस बदलाव पर आपत्ति दर्ज की थी। संधू ने कथित तौर पर इसे “अनधिकृत और अवैध” बताया था।
इसी के बाद यह सवाल उठता है कि यदि सॉफ्टवेयर में किया गया बदलाव अनधिकृत था, तो इसे लागू करने का निर्देश किसने दिया था? यदि TCS ने चुनाव आयोग के निर्देश पर यह बदलाव किया था, तो उस निर्देश का लिखित रिकॉर्ड कहां है, उसे किस अधिकारी ने जारी किया, किसने मंजूरी दी और बदलाव को सिस्टम में लागू करने की अंतिम स्वीकृति किसने दी?
अब तक चुनाव आयोग की ओर से सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि ऑनलाइन फॉर्म में बदलाव का निर्देश देने वाला अधिकारी कौन था। इसी तरह, TCS की ओर से इस बदलाव को मंजूरी देने वाले अधिकारी की पहचान से संबंधित कोई सार्वजनिक दस्तावेज भी सामने नहीं आया है।
राहुल गांधी के सवालों के बाद मामला महज ऑनलाइन फॉर्म में तकनीकी बदलाव तक सीमित नहीं रह गया है। इससे यह सवाल जुड़ गया है कि मतदाता पंजीकरण की प्रक्रिया में बदलाव का अधिकार किस स्तर पर इस्तेमाल किया गया और क्या इसके लिए निर्धारित प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति प्रक्रिया का पालन किया गया था।
मामले में अब मुख्य सवाल यही हैं—बदलाव का निर्देश किसने दिया, उसे किसने मंजूरी दी, संबंधित अधिकारियों की भूमिका क्या थी और TCS की ओर से अंतिम स्वीकृति किसने दी। इन सवालों के जवाब के लिए संबंधित दस्तावेज और पूरी अनुमति प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग उठ रही है।
