Last Updated on January 8, 2026 10:36 pm by INDIAN AWAAZ

AMN / BIZ DESK
गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त गिरावट देखने को मिली। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रूस से तेल आयात करने वाले देशों पर 500 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने संबंधी प्रस्तावित कानून को मंज़ूरी दिए जाने की खबरों से निवेशकों की धारणा बुरी तरह प्रभावित हुई। इसके चलते निफ्टी 50 अहम 26,000 के स्तर से नीचे फिसल गया और बाजार ने बीते चार महीनों की सबसे बड़ी एकदिवसीय गिरावट दर्ज की।
बीएसई सेंसेक्स 780.18 अंक यानी 0.92 प्रतिशत टूटकर 84,180.96 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 में 263.90 अंकों यानी 1.01 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 25,876.85 पर बंद हुआ। निफ्टी के लिए यह लगातार चौथा कारोबारी सत्र रहा, जब उसने नकारात्मक क्लोज़िंग दर्ज की।
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ने की आशंका से बाजार पर दबाव बना। अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा प्रस्तावित इस कानून का उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर लगाम लगाना है, लेकिन इसके व्यापक प्रभाव भारत जैसे देशों पर पड़ सकते हैं, जो यूक्रेन युद्ध के बाद से रियायती रूसी कच्चे तेल का बड़ा आयातक बन गए हैं।
सेक्टरवार प्रदर्शन
- मेटल सेक्टर: सबसे ज्यादा दबाव में रहा। निफ्टी मेटल इंडेक्स 3.4 प्रतिशत लुढ़क गया। कमजोर वैश्विक कमोडिटी कीमतों और मांग को लेकर चिंताओं ने इस सेक्टर को झटका दिया।
- तेल और गैस: संभावित टैरिफ और कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण ओएनजीसी सहित कई शेयरों में तेज गिरावट दर्ज की गई।
- आईटी सेक्टर: वैश्विक अनिश्चितता और अमेरिकी बाजार से जुड़ी आशंकाओं के कारण आईटी शेयरों में भी बिकवाली रही।
- बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं: इस सेक्टर में अपेक्षाकृत कम गिरावट रही। चुनिंदा शेयरों जैसे आईसीआईसीआई बैंक और एसबीआई लाइफ ने हल्की बढ़त भी दिखाई, हालांकि कुल मिलाकर इंडेक्स लाल निशान में रहा।
- मिडकैप और स्मॉलकैप: जोखिम से बचने की प्रवृत्ति के चलते सबसे ज्यादा मार झेलनी पड़ी। निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 दोनों में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार की चौड़ाई बेहद नकारात्मक रही। बीएसई पर गिरने वाले शेयरों की संख्या बढ़ने वाले शेयरों से तीन गुना से अधिक रही। रुपये में भी कमजोरी देखने को मिली और यह 6 पैसे फिसलकर 89.93 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जिससे विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव और बढ़ गया।
आगे का रुख
विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अमेरिकी टैरिफ, भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक संकेत बाजार की दिशा तय करेंगे। हालांकि, आगामी तिमाहियों में कॉरपोरेट नतीजों में सुधार की उम्मीद से बाजार को कुछ सहारा मिल सकता है।
