Last Updated on January 23, 2026 9:16 pm by INDIAN AWAAZ

AMN / BIZ DESK

भारतीय इक्विटी बाज़ार शुक्रवार को तेज़ गिरावट के साथ बंद हुए। एनएसई निफ्टी50 241 अंक या 0.95% गिरकर 25,048.65 पर बंद हुआ, जबकि बीएसई सेंसेक्स 769 अंक या 0.94% गिरकर 81,537.7 पर आ गया। 5 जनवरी को रिकॉर्ड ऊँचाई छूने के बाद से निफ्टी 5% और सेंसेक्स 4,300 अंक नीचे आ चुका है।

सप्ताहिक आधार पर निफ्टी 2.4% और सेंसेक्स 2.3% गिरा। बाज़ार की चौड़ाई भी कमजोर रही—बीएसई पर 4,269 शेयरों में से 2,861 गिरे और केवल 1,259 बढ़े।


रियल्टी और मीडिया सेक्टर में सबसे ज़्यादा दबाव
सभी सेक्टर लाल निशान में रहे। रियल्टी शेयरों में 3.3% और मीडिया में 2.5% की गिरावट दर्ज हुई। ब्याज-संवेदनशील और उपभोक्ता-आधारित क्षेत्रों में निवेशकों की सतर्कता साफ दिखी।


अदाणी समूह पर शिकंजा
अदाणी समूह के शेयरों में भारी गिरावट आई। अमेरिकी सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) ने अदाणी धोखाधड़ी मामले को आगे बढ़ाने के लिए अदालत से अनुमति माँगी है। अदाणी ग्रीन एनर्जी 10% टूटा, जबकि अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस और अदाणी एंटरप्राइज़ेज़ 9% गिरे। अदाणी टोटल गैस और अदाणी पावर भी 7% से अधिक नीचे रहे। SEC का आरोप है कि गौतम और सागर अदाणी ने अदाणी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के बारे में भ्रामक जानकारी दी थी। इस खबर ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी और बाज़ार पर दबाव बना।


विदेशी निवेशकों की बिकवाली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) जनवरी में अब तक ₹31,334 करोड़ की बिकवाली कर चुके हैं। 2025 में उन्होंने कुल ₹1.66 ट्रिलियन की शुद्ध बिकवाली की थी। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार ने कहा कि एफपीआई की लगातार बिकवाली और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी का पैटर्न 2026 में भी जारी है। निवेशक अब 1 फरवरी को आने वाले बजट से बाज़ार-हितैषी संकेतों की उम्मीद कर रहे हैं।


कमजोर तिमाही नतीजे
अक्टूबर-दिसंबर 2025 (Q3FY26) के शुरुआती कंपनियों के नतीजे निराशाजनक रहे। जीएसटी दरों में कटौती के बावजूद राजस्व वृद्धि केवल एकल अंक में रही। सेंसेक्स का ट्रेलिंग ईपीएस मात्र 1.3% बढ़ा—पिछले 17 तिमाहियों में सबसे कम।

भू-राजनीतिक तनाव
वैश्विक अनिश्चितताओं ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप पर शुल्क लगाने की धमकी वापस ली और ग्रीनलैंड पर “फ्रेमवर्क” समझौते की घोषणा की। इसके बावजूद भू-राजनीतिक तनाव ने दलाल स्ट्रीट को दबाव में रखा।

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