Last Updated on January 28, 2026 10:34 pm by INDIAN AWAAZ

BIZ DESK

भारतीय शेयर बाज़ार बुधवार को लगातार दूसरे दिन मज़बूत रहे। यूरोपीय संघ (EU) के साथ हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते और आगामी केंद्रीय बजट से जुड़ी पूंजीगत व्यय उम्मीदों ने निवेशकों का उत्साह बढ़ाया। सेंसेक्स 487.20 अंक (0.60%) उछलकर 82,344.68 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 सूचकांक 167.35 अंक (0.66%) बढ़कर 25,342.75 पर पहुँचा। दो सत्रों में दोनों सूचकांकों में लगभग 1% की बढ़त दर्ज हुई।

ऊर्जा और धातु
ऊर्जा शेयरों में सबसे अधिक तेजी रही, सूचकांक 4.2% चढ़ा। कच्चे तेल की मज़बूत कीमतों ने इस सेक्टर को सहारा दिया। धातु कंपनियों के शेयर भी 2.3% बढ़े, बेस मेटल्स की ऊँची कीमतों से निवेशकों का भरोसा बढ़ा।

रक्षा और सार्वजनिक उपक्रम
रक्षा क्षेत्र का सूचकांक 7% उछला। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) का शेयर 8.9% की छलांग लगाकर रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा। सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (PSU) में 4.6% की बढ़त रही, जिससे सरकारी पूंजीगत खर्च पर भरोसा झलकता है।

अवसंरचना और पूंजीगत वस्तुएँ
इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों में 1.1% की बढ़त रही। बजट से इस क्षेत्र में लक्षित प्रोत्साहन की उम्मीदें बनी हुई हैं। एलएंडटी (L&T) जैसी कंपनियों के नतीजे निवेशकों की नज़र में हैं।

मिड-कैप और स्मॉल-कैप
मिड-कैप सूचकांक 1.7% और स्मॉल-कैप 2.3% बढ़े। खुदरा और घरेलू संस्थागत निवेशकों की सक्रियता ने इन शेयरों को मज़बूत किया। डेरिवेटिव्स-प्रधान शेयरों में शॉर्ट-कवरिंग ने भी तेजी को सहारा दिया।

उपभोक्ता और सेवाएँ
एशियन पेंट्स का शेयर 4.2% गिरा, दिसंबर तिमाही में कमजोर वॉल्यूम ग्रोथ के कारण। वहीं महिंद्रा लॉजिस्टिक्स 15% और मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज 7.5% उछले, मज़बूत नतीजों की बदौलत।

मुद्रा और बॉन्ड
रुपया डॉलर के मुकाबले 0.07% गिरकर 91.7825 पर बंद हुआ। आयातकों की माँग ने दबाव बनाया, हालाँकि वैश्विक स्तर पर डॉलर कमजोर रहा। 10-वर्षीय सरकारी बॉन्ड का यील्ड 2 बेसिस पॉइंट घटकर 6.6997% पर रहा।

मनी मार्केट
ओवरनाइट कॉल मनी रेट 4.9% और TREPS रेट 5.43% पर रहा, जिससे तरलता संतुलित दिखी।

वैश्विक और नीतिगत परिदृश्य
निवेशकों की नज़र अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की नीति बैठक पर है, जहाँ दरें यथावत रहने की उम्मीद है। भारत–ईयू व्यापार समझौता मध्यम अवधि में निर्यात-उन्मुख क्षेत्रों और सप्लाई चेन विविधीकरण के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।

आगे की राह
हालाँकि बाज़ार में उत्साह है, लेकिन कमजोर रुपया, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की बिकवाली और भू-राजनीतिक जोखिम आगे की बढ़त को सीमित कर सकते हैं। आगामी बजट को कम प्रभाव वाला माना जा रहा है, जहाँ व्यापक प्रोत्साहन की बजाय लक्षित उपायों पर ध्यान होगा।

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