Last Updated on January 1, 2026 8:02 pm by INDIAN AWAAZ

आर. सूर्यामूर्ति

भारत की पहली बुलेट ट्रेन 15 अगस्त 2027 से चरणबद्ध तरीके से परिचालन शुरू करेगी। केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने गुरुवार को पत्रकारों से बातचीत में यह जानकारी दी। यह हाई-स्पीड रेल सेवा मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर चलाई जाएगी।

रेल मंत्री के अनुसार, पहले चरण में बुलेट ट्रेन सेवा गुजरात में सूरत से बिलीमोरा के बीच शुरू होगी। इसके बाद वापी–सूरत खंड, फिर वापी–अहमदाबाद खंड को चालू किया जाएगा। इसके पश्चात ठाणे से अहमदाबाद तक सेवाओं का विस्तार होगा, जबकि अंतिम चरण में मुंबई और अहमदाबाद को सीधे जोड़ा जाएगा, जिससे पूरा कॉरिडोर पूरा हो जाएगा।

अश्विनी वैष्णव ने कहा,
“स्वतंत्रता दिवस 2027 के मौके पर लोग भारत की पहली बुलेट ट्रेन के लिए टिकट खरीद सकेंगे।”

मुंबई–अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना 508 किलोमीटर लंबी है और इसे जापान की शिंकानसेन तकनीक से विकसित किया जा रहा है। इस कॉरिडोर पर ट्रेनें अधिकतम 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने के लिए डिज़ाइन की गई हैं, जिससे पूरा मार्ग चालू होने के बाद मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय लगभग दो घंटे रह जाएगा।

यह कॉरिडोर गुजरात, दादरा और नगर हवेली तथा महाराष्ट्र से होकर गुजरता है। इसमें लगभग 352 किलोमीटर हिस्सा गुजरात और दादरा–नगर हवेली में तथा 156 किलोमीटर हिस्सा महाराष्ट्र में है। परियोजना के तहत अहमदाबाद, वडोदरा, भरूच, सूरत, वापी, ठाणे और मुंबई जैसे प्रमुख शहरों को जोड़ा जाएगा।

नेशनल हाई-स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (NHSRCL) के अनुसार, कॉरिडोर का 85 प्रतिशत से अधिक हिस्सा एलिवेटेड वायाडक्ट्स पर बनाया जा रहा है। अब तक 326 किलोमीटर से अधिक एलिवेटेड संरचनाएं पूरी हो चुकी हैं और 25 में से 17 नदी पुलों का निर्माण कर लिया गया है। 47 किलोमीटर लंबा सूरत–बिलीमोरा खंड परियोजना के सबसे उन्नत हिस्सों में शामिल है, जहां प्रमुख सिविल कार्य और ट्रैक-बेड की तैयारी पूरी हो चुकी है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नवंबर में गुजरात दौरे के दौरान इस परियोजना की प्रगति की समीक्षा की थी और निर्माणाधीन सूरत बुलेट ट्रेन स्टेशन का निरीक्षण किया था। हीरा उद्योग से प्रेरित इस स्टेशन का ढांचागत कार्य पूरा हो चुका है और फिलहाल आंतरिक सजावट तथा यात्रियों की सुविधाओं पर काम चल रहा है।

बुलेट ट्रेन परियोजना की शुरुआत 2017 में हुई थी और इसे मूल रूप से दिसंबर 2023 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। हालांकि भूमि अधिग्रहण और कार्यान्वयन से जुड़ी चुनौतियों के कारण समयसीमा में संशोधन किया गया। यह परियोजना जापान सरकार की तकनीकी और वित्तीय सहायता से लागू की जा रही है।

अश्विनी वैष्णव ने वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनों की सफलता का भी उल्लेख किया और कहा कि उनकी लोकप्रियता ने रेलवे के आधुनिकीकरण पर भरोसा बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि रात भर की यात्राओं के लिए वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें भी इसी स्तर की सुविधा और सुरक्षा के साथ जल्द शुरू की जाएंगी।