Last Updated on May 24, 2026 8:15 pm by INDIAN AWAAZ

HEALTH DESK

दुनिया भर में बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन ने लोगों की सेहत के लिए नया खतरा पैदा कर दिया है। कई देशों में तापमान लगातार रिकॉर्ड तोड़ रहा है, जबकि विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि हीट वेव अब सिर्फ मौसम की समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर स्वास्थ्य संकट बन चुकी है। ऐसे में हीट स्ट्रोक के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, लेकिन चिंता की बात यह है कि अधिकतर लोग इसकी शुरुआती चेतावनियों को सामान्य थकान या कमजोरी समझकर अनदेखा कर देते हैं।

डॉक्टरों के मुताबिक यही लापरवाही कई बार जानलेवा साबित हो सकती है।

क्या होता है हीट स्ट्रोक?

हीट स्ट्रोक शरीर की वह खतरनाक स्थिति है, जब अत्यधिक गर्मी के कारण शरीर अपना तापमान नियंत्रित करने की क्षमता खो देता है। सामान्य परिस्थितियों में शरीर पसीने के जरिए खुद को ठंडा रखता है, लेकिन तेज गर्मी और लंबे समय तक धूप में रहने से यह प्रक्रिया प्रभावित होने लगती है।

जब शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाता है, तो दिमाग, दिल, किडनी और शरीर के दूसरे महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होने लगते हैं। समय पर इलाज न मिले तो यह स्थिति जानलेवा भी बन सकती है।

अक्सर लोगों को लगता है कि हीट स्ट्रोक केवल बेहोशी या अचानक गिरने से होता है, जबकि इसके पहले शरीर कई चेतावनी देता है। समस्या यह है कि लोग इन संकेतों को सामान्य कमजोरी या डिहाइड्रेशन समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार ये लक्षण खतरे की घंटी हो सकते हैं—

  • लगातार तेज सिरदर्द
  • असामान्य थकान और कमजोरी
  • चक्कर आना या भ्रम की स्थिति
  • जी मिचलाना और उल्टी
  • सांस लेने में दिक्कत
  • दिल की धड़कन तेज होना
  • शरीर और त्वचा का अत्यधिक गर्म महसूस होना
  • पसीना बंद हो जाना या त्वचा का सूख जाना
  • मांसपेशियों में दर्द और ऐंठन
  • बेहोशी या अर्ध बेहोशी जैसी स्थिति

डॉक्टरों का कहना है कि यदि इन लक्षणों के साथ तेज बुखार महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

किन लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?

हालांकि हीट स्ट्रोक किसी को भी हो सकता है, लेकिन कुछ लोगों में इसका खतरा अधिक होता है।

बच्चे और बुजुर्ग

छोटे बच्चों और बुजुर्गों का शरीर तापमान को नियंत्रित करने में कमजोर होता है, इसलिए वे गर्मी से जल्दी प्रभावित होते हैं।

धूप में काम करने वाले लोग

मजदूर, किसान, ट्रैफिक पुलिसकर्मी, रिक्शा चालक और निर्माण कार्य से जुड़े लोग लंबे समय तक धूप में रहने के कारण ज्यादा जोखिम में रहते हैं।

गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग

डायबिटीज, दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर और किडनी के मरीजों पर गर्मी का असर ज्यादा पड़ता है। कुछ दवाइयां भी शरीर में पानी की कमी बढ़ा देती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की चेतावनी

World Health Organization के अनुसार अत्यधिक गर्मी दुनिया भर में मौसम से जुड़ी मौतों की बड़ी वजह बन चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि तेज गर्मी न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करती है।

हीट स्ट्रोक से बचाव कैसे करें?

विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ आसान सावधानियां अपनाकर इस खतरे से बचा जा सकता है—

  • दोपहर के समय धूप में निकलने से बचें
  • पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ पिएं
  • हल्के रंग और सूती कपड़े पहनें
  • बाहर निकलते समय सिर और चेहरा ढकें
  • बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें
  • ज्यादा मसालेदार और कैफीन वाली चीजें कम लें
  • कमजोरी या चक्कर महसूस होते ही आराम करें

डॉक्टरों का कहना है कि गर्मी के मौसम में सिरदर्द, थकान या कमजोरी को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यही मामूली लक्षण बाद में गंभीर हीट स्ट्रोक का रूप ले सकते हैं। बढ़ती गर्मी के इस दौर में सावधानी और समय पर उपचार ही सबसे बड़ा बचाव है।