Last Updated on October 2, 2026 10:50 am by INDIAN AWAAZ

स्टाफ रिपोर्टर / नई दिल्ली
चुनाव आयोग ने उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में विशेष अभियान चलाने का निर्देश दिया है, जहां मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। अभियान के तहत पुनरीक्षण के दौरान मतदाता सूची से छूट गए पात्र मतदाताओं की पहचान कर उन्हें दोबारा सूची में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को ऐसे मतदाताओं की पहचान करने को कहा गया है, जिनके नाम “अनमैप्ड” या “लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी” के आधार पर सूची से हटाए गए हैं। बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर ऐसे मतदाताओं की मदद करेंगे और मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए वैधानिक फॉर्म-6 भरवाएंगे। पहली बार मतदान करने वाले मतदाता भी इस अभियान के तहत फॉर्म-6 के जरिए आवेदन कर सकेंगे।
यह कदम चुनाव आयोग के भीतर SIR को लेकर उठे सवालों और विवाद की पृष्ठभूमि में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR के दौरान मतदाता नामों को हटाने, चुनावी आंकड़ों के प्रबंधन और फॉर्म-6 में किए गए बदलावों सहित कई मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।
विवाद का एक प्रमुख मुद्दा ऑनलाइन फॉर्म-6 में जुलाई में जोड़ा गया अतिरिक्त सवाल था। इसमें नए मतदाताओं से पूछा गया था कि क्या उनके माता-पिता या दादा-दादी पिछले SIR की मतदाता सूची में दर्ज थे। रिपोर्ट के अनुसार, एक चुनाव आयुक्त ने इस बदलाव को “अनधिकृत” और “अवैध” करार दिया था।
अब जिन राज्यों में SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, वहां फॉर्म-6 के सामान्य वैधानिक प्रारूप का इस्तेमाल किया जाएगा। यानी ऐसे राज्यों में छूटे हुए मतदाताओं और पहली बार मतदाता बनने वाले लोगों से पिछले SIR में उनके परिवार के सदस्यों के नाम से संबंधित अतिरिक्त जानकारी नहीं मांगी जाएगी।
SIR को लेकर मतदाता नामों की बड़े पैमाने पर कटौती, पात्र मतदाताओं के नाम छूटने, चुनावी आंकड़ों तक पहुंच और चुनाव आयोग के भीतर निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों तथा विभिन्न संगठनों की ओर से सवाल उठाए गए हैं। ऐसे में आयोग का यह विशेष अभियान छूटे हुए पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में वापस शामिल करने के लिहाज से अहम है।
