BY Our Business Correspondent

भारतीय शेयर बाजार में शुक्रवार को लगातार दो कारोबारी सत्रों की तेजी थम गई और प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। निजी क्षेत्र के बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) में बिकवाली ने बाजार पर दबाव बनाया। हालांकि सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी), ऑटो और कुछ अन्य क्षेत्रों के शेयरों में मजबूती ने नुकसान को सीमित करने की कोशिश की, लेकिन इसका असर बेंचमार्क सूचकांकों पर हावी रहा।

बीएसई सेंसेक्स 455.59 अंक यानी 0.58 प्रतिशत गिरकर 78,499.17 अंक पर बंद हुआ, जबकि एनएसई निफ्टी 50 65.35 अंक यानी 0.27 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,570.65 अंक पर बंद हुआ। इसके साथ ही निफ्टी 24,600 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे आ गया।

इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में 0.67 प्रतिशत की तेजी आई थी, जबकि निफ्टी में 0.09 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई थी। शुक्रवार की गिरावट को हाल की तेजी के बाद मुनाफावसूली और विभिन्न क्षेत्रों में निवेश के रुख में बदलाव के तौर पर देखा गया।

वित्तीय शेयरों पर सबसे ज्यादा दबाव

शुक्रवार के कारोबार में वित्तीय शेयर बाजार के लिए सबसे बड़ी कमजोरी बने। बजाज फाइनेंस 5.84 प्रतिशत, आईसीआईसीआई बैंक 2.50 प्रतिशत और एक्सिस बैंक 1.43 प्रतिशत गिरा। इन शेयरों में गिरावट ने निफ्टी पर खासा दबाव डाला।

निजी बैंकों और एनबीएफसी में बिकवाली महत्वपूर्ण रही, क्योंकि इनका बेंचमार्क सूचकांकों में बड़ा भार है। ऐसे में इन शेयरों में कमजोरी ने आईटी और ऑटोमोबाइल शेयरों में तेजी से मिलने वाले समर्थन को काफी हद तक निष्प्रभावी कर दिया।

बाजार में हालिया तेजी के बाद कुछ निवेशकों ने मुनाफा वसूली को प्राथमिकता दी। कई शेयरों में ऊंचे मूल्यांकन को देखते हुए कारोबारियों ने उन कंपनियों में मुनाफा बुक किया जिनमें हाल के सत्रों में अच्छी तेजी आई थी।

हालांकि व्यापक बाजार ने बेंचमार्क सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। बीएसई 150 मिडकैप सूचकांक 0.18 प्रतिशत चढ़ा, जबकि बीएसई 250 स्मॉलकैप सूचकांक लगभग स्थिर रहा।

बाजार की चौड़ाई हालांकि कमजोर रही। बीएसई पर 1,985 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए, जबकि 2,283 शेयरों में गिरावट रही। कुल 206 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

प्रमुख बाजार संकेतक

कमोडिटी बाजार में अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 33 सेंट यानी 0.40 प्रतिशत गिरकर 82.16 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। भारत जैसे कच्चे तेल के बड़े आयातक देश के लिए तेल की कीमतें बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेतक बनी हुई हैं। कच्चे तेल की कीमतों में बदलाव का असर महंगाई, चालू खाते, रुपये और कंपनियों की लागत पर पड़ता है।

भारत की 10-वर्षीय बेंचमार्क सरकारी प्रतिभूति पर प्रतिफल बढ़कर 6.771 प्रतिशत हो गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 6.768 प्रतिशत था।

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपये में मामूली मजबूती देखी गई। आंशिक रूप से परिवर्तनीय रुपया 95.1900 प्रति डॉलर के आसपास कारोबार करता दिखा, जबकि पिछले सत्र में यह 95.2250 पर बंद हुआ था।

सोने की कीमतों में भी मजबूती रही। 5 अक्टूबर 2026 की डिलीवरी वाले एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स में 1.56 प्रतिशत की तेजी आई और भाव 1,51,176 रुपये पर पहुंच गया। वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों का रुझान सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर बना हुआ है।

अमेरिकी डॉलर सूचकांक (DXY) 0.01 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 99.80 पर रहा, जबकि अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 0.21 प्रतिशत गिरकर 4.660 प्रतिशत पर आ गई।

वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेत

वैश्विक बाजारों से भारतीय शेयर बाजार को शुक्रवार को मिश्रित संकेत मिले। यूरोपीय शेयर बाजारों में तेजी रही और क्षेत्रीय बाजार जून के अंत के बाद अपने सबसे मजबूत साप्ताहिक प्रदर्शन की ओर बढ़ते दिखे। कंपनियों के बेहतर तिमाही नतीजों ने यूरोपीय बाजारों में निवेशकों का भरोसा मजबूत किया।

एशियाई बाजारों में भी अधिकांश सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। निवेशकों को उम्मीद थी कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से संबंधित परिस्थितियों में सुधार से कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आ सकती है और इससे वैश्विक महंगाई पर दबाव कम हो सकता है।

चीन के व्यापार आंकड़ों ने भी वैश्विक बाजारों का ध्यान आकर्षित किया। आधिकारिक सीमा शुल्क आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीन का निर्यात अमेरिकी डॉलर के आधार पर सालाना 23 प्रतिशत बढ़ा। हालांकि यह जून में दर्ज 27 प्रतिशत वृद्धि से कम था। जून की वृद्धि अक्टूबर 2021 के बाद सबसे तेज थी।

जुलाई में चीन का आयात सालाना आधार पर 27.5 प्रतिशत बढ़ा, जबकि जून में इसमें 36 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। इसके चलते चीन का व्यापार अधिशेष जून के 125.6 अरब डॉलर से घटकर जुलाई में 112.5 अरब डॉलर रह गया।

इस बीच ईरान से जुड़े घटनाक्रमों ने कच्चे तेल की कीमतों को प्रभावित किया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले कुछ जहाजों पर प्रतिबंध लगाने संबंधी ईरान के प्रस्ताव की खबरों ने वैश्विक तेल आपूर्ति में संभावित व्यवधान की चिंता फिर बढ़ा दी।

वॉल स्ट्रीट भी दबाव में

भारतीय बाजार खुलने से पहले अमेरिकी शेयर बाजार भी कमजोरी के साथ बंद हुआ था। डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 460 अंक यानी 0.9 प्रतिशत गिरकर 53,885.10 पर बंद हुआ, जिससे उसकी लगातार पांच सत्रों की तेजी थम गई।

एसएंडपी 500 में 0.2 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 7,709.36 पर बंद हुआ, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 0.1 प्रतिशत गिरकर 26,348.35 पर रहा।

अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर बाजार की नजर

शुक्रवार को वैश्विक निवेशकों की नजर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर थी। अमेरिकी श्रम बाजार की स्थिति फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति के लिए महत्वपूर्ण संकेतक है।

रिपोर्ट जारी होने से पहले अर्थशास्त्रियों ने जुलाई में अमेरिकी अर्थव्यवस्था में करीब 80,000 नई नौकरियां जुड़ने का अनुमान लगाया था, जबकि जून में 57,000 नौकरियां बढ़ी थीं। बेरोजगारी दर के 4.2 प्रतिशत पर स्थिर रहने का अनुमान था।

हालांकि वास्तविक आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। जुलाई में अमेरिका में गैर-कृषि पेरोल रोजगार में 23,000 की कमी दर्ज की गई, जबकि बेरोजगारी दर घटकर 4.1 प्रतिशत हो गई। पिछले महीनों के आंकड़ों में भी बड़े पैमाने पर संशोधन किया गया, जिससे अमेरिकी श्रम बाजार की वास्तविक मजबूती को लेकर नए सवाल खड़े हुए।

कमजोर रोजगार आंकड़े फेडरल रिजर्व की भविष्य की मौद्रिक नीति को प्रभावित कर सकते हैं। यदि श्रम बाजार में कमजोरी बनी रहती है तो ब्याज दरों में नरमी की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि महंगाई का स्तर अभी भी फेड के लिए एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है।

भारत के लिए अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे विदेशी पोर्टफोलियो निवेश, रुपये की विनिमय दर, बॉन्ड यील्ड और भारतीय शेयरों के मूल्यांकन पर असर पड़ सकता है।

कंपनियों के शेयरों पर नजर

टाइटन कंपनी 1.14 प्रतिशत गिरकर बंद हुई, हालांकि कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया। समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 62.9 प्रतिशत बढ़कर 1,777 करोड़ रुपये रहा। कुल आय 40.4 प्रतिशत बढ़कर 20,753 करोड़ रुपये हो गई।

कंपनी का ईबीआईटी 58.9 प्रतिशत बढ़कर 2,782 करोड़ रुपये रहा और ईबीआईटी मार्जिन 156 आधार अंक सुधरकर 13.4 प्रतिशत हो गया। आभूषण कारोबार में 43 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 18,253 करोड़ रुपये रहा। घड़ी कारोबार 21 प्रतिशत बढ़कर 1,543 करोड़ रुपये और आईकेयर कारोबार भी 21 प्रतिशत बढ़कर 289 करोड़ रुपये रहा।

टाटा टेक्नोलॉजीज में 8.92 प्रतिशत की जोरदार तेजी आई। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया था कि होंडा मोटर ने नए वाहन प्लेटफॉर्म के विकास का काम कंपनी को दिया है। हालांकि टाटा टेक्नोलॉजीज ने स्पष्ट किया कि जापान की एक ऑटो कंपनी से वाहन विकास कार्यक्रम मिलने की जानकारी पहले ही वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही और वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के कारोबारी अपडेट में दी जा चुकी थी। कंपनी ने ग्राहक की पहचान गोपनीयता संबंधी दायित्वों के कारण बताने से इनकार किया।

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का शेयर 1.12 प्रतिशत चढ़ा। बैंक का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ पहली तिमाही में सालाना आधार पर 10.23 प्रतिशत बढ़कर 21,121.22 करोड़ रुपये हो गया। कुल आय 6.26 प्रतिशत बढ़कर 1,43,819.15 करोड़ रुपये रही। शुद्ध ब्याज आय 14.88 प्रतिशत बढ़कर 46,992 करोड़ रुपये पहुंच गई।

वरोक इंजीनियरिंग में 9.19 प्रतिशत की तेजी रही। कंपनी का समायोजित समेकित शुद्ध लाभ 30.1 प्रतिशत बढ़कर 77.27 करोड़ रुपये हो गया, जबकि शुद्ध बिक्री 29.9 प्रतिशत बढ़कर 2,634.24 करोड़ रुपये रही।

भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) 1.66 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ 22.81 प्रतिशत बढ़कर 13,492.03 करोड़ रुपये रहा। कुल आय 7.01 प्रतिशत बढ़कर 2,40,390.96 करोड़ रुपये हो गई।

हीरो मोटोकॉर्प का शेयर 3.14 प्रतिशत मजबूत हुआ। कंपनी का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ 29 प्रतिशत बढ़कर 1,454 करोड़ रुपये रहा, जबकि परिचालन से आय 36 प्रतिशत बढ़कर 12,999 करोड़ रुपये हो गई।

ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज 1.96 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 13.56 प्रतिशत बढ़कर 591.35 करोड़ रुपये रहा और शुद्ध बिक्री 8.17 प्रतिशत बढ़कर 4,999.97 करोड़ रुपये हो गई।

फोर्टिस हेल्थकेयर में 3.82 प्रतिशत की तेजी आई। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 2.26 प्रतिशत बढ़कर 259.23 करोड़ रुपये और शुद्ध राजस्व 17.46 प्रतिशत बढ़कर 2,545.03 करोड़ रुपये रहा।

इसके विपरीत सैक्ससॉफ्ट 5.79 प्रतिशत गिरा। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 9.4 प्रतिशत घटकर 29.29 करोड़ रुपये रहा, जबकि बिक्री 0.2 प्रतिशत घटकर 248.62 करोड़ रुपये रही।

जीआर इंफ्राप्रोजेक्ट्स 2.51 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 46.40 प्रतिशत बढ़कर 357.29 करोड़ रुपये रहा, जबकि परिचालन से राजस्व 40.06 प्रतिशत बढ़कर 2,784.11 करोड़ रुपये हो गया।

एसएनएल बेयरिंग्स 2.87 प्रतिशत मजबूत हुआ। कंपनी का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ 27.67 प्रतिशत बढ़कर 3.46 करोड़ रुपये और परिचालन से राजस्व 23.28 प्रतिशत बढ़कर 15.25 करोड़ रुपये रहा।

जीके एनर्जी में 5.12 प्रतिशत की तेजी रही। कंपनी का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ 61.55 प्रतिशत बढ़कर 59.67 करोड़ रुपये हो गया, जबकि परिचालन से राजस्व 71.10 प्रतिशत बढ़कर 505.19 करोड़ रुपये रहा। कंपनी ने इस वृद्धि के पीछे अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के लगातार क्रियान्वयन और विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा ढांचे की बढ़ती मांग को प्रमुख कारण बताया।

IPO बाजार में भी हलचल

प्राथमिक बाजार में भी निवेशकों की सक्रियता बनी रही।

अर्डी इंडस्ट्रीज के आईपीओ को शुक्रवार शाम 16:57 बजे तक उपलब्ध शेयर बाजार आंकड़ों के अनुसार 5,84,22,516 शेयरों के मुकाबले 7,80,55,08,129 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इस तरह इश्यू 133.60 गुना सब्सक्राइब हुआ। आईपीओ 5 अगस्त को खुला था और 7 अगस्त को बंद हुआ। मूल्य दायरा 50 से 53 रुपये प्रति शेयर था।

टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स को 83,17,190 शेयरों के मुकाबले 2,14,15,030 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इश्यू 2.57 गुना सब्सक्राइब हुआ। आईपीओ 7 अगस्त को खुला और 11 अगस्त को बंद होगा। इसका मूल्य दायरा 200 से 212 रुपये प्रति शेयर है।

लीप इंडिया को 11,49,91,735 शेयरों के मुकाबले 3,01,37,058 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इस तरह इश्यू 0.26 गुना सब्सक्राइब हुआ। यह आईपीओ 7 अगस्त को खुला है और 11 अगस्त को बंद होगा। इसका मूल्य दायरा 151 से 159 रुपये प्रति शेयर है।

आगे बाजार की दिशा

आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा कई घरेलू और वैश्विक कारकों से तय होने की संभावना है। इनमें अमेरिकी मौद्रिक नीति की उम्मीदें, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, रुपये की चाल और कंपनियों के तिमाही नतीजे प्रमुख रहेंगे।

शुक्रवार की गिरावट के बावजूद बाजार में व्यापक स्तर पर घबराहट दिखाई नहीं दी। मिडकैप शेयरों का बेहतर प्रदर्शन और स्मॉलकैप सूचकांक का लगभग स्थिर रहना बताता है कि घरेलू निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता अभी पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है।

हालांकि ऊंचे मूल्यांकन वाले शेयरों में मुनाफावसूली का जोखिम बना हुआ है। खासकर बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र में बिकवाली ने यह संकेत दिया है कि निवेशक अब कंपनियों के मूल्यांकन और आय वृद्धि के बीच संतुलन पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।

निफ्टी के 24,570.65 पर बंद होने के बाद अब बाजार की नजर 24,600 के स्तर पर रहेगी। इसके ऊपर टिकने की क्षमता बाजार में सकारात्मक धारणा को मजबूत कर सकती है, जबकि लगातार कमजोरी की स्थिति में मुनाफावसूली का दबाव और बढ़ सकता है।

आगे चलकर वित्तीय शेयरों की चाल बेंचमार्क सूचकांकों के लिए महत्वपूर्ण रहेगी। वहीं मजबूत तिमाही नतीजे देने वाली कंपनियों और ऑटो, आईटी, अक्षय ऊर्जा तथा इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में स्टॉक-विशिष्ट गतिविधियां बाजार को दिशा दे सकती हैं।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट केवल समाचार एवं सूचनात्मक उद्देश्य के लिए है। इसे किसी शेयर या प्रतिभूति को खरीदने या बेचने की सलाह नहीं माना जाना चाहिए। निवेशकों को कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले स्वयं शोध करने और योग्य वित्तीय सलाहकार से परामर्श करने की सलाह दी जाती है।