Last Updated on October 8, 2026 8:50 am by INDIAN AWAAZ

AMN / NEWS DESK
हिंदी और मराठी सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का गुरुवार को 75 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह लंबे समय से भारतीय फिल्म जगत में अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी और अलग तरह के किरदारों के लिए पहचाने जाते थे। गोवा स्थित अपने आवास पर उन्हें गंभीर हृदयाघात आया, जिसके बाद अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।
नाना पाटेकर के बेटे मल्हार पाटेकर ने भी उनके निधन की पुष्टि की है। उनके निधन की खबर फैलते ही फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर दौड़ गई। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद उनके निधन से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
विष्णुनाथ पाटेकर के रूप में जन्मे नाना पाटेकर ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत रंगमंच से की थी। थिएटर ने उनके अभिनय को वह गहराई और अनुशासन दिया, जो बाद में उनकी फिल्मों में भी दिखाई दिया। उन्होंने 1970 के दशक के अंत में हिंदी सिनेमा में कदम रखा और धीरे-धीरे अपनी अलग पहचान बनाई।
1989 में आई फिल्म ‘परिंदा’ ने उन्हें व्यापक पहचान दिलाई। इसके लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार भी मिला। इसके बाद ‘क्रांतिवीर’, ‘अग्निसाक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’, ‘यशवंत’, ‘अब तक छप्पन’, ‘अपहरण’ और मराठी फिल्म ‘नटसम्राट’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया। ‘क्रांतिवीर’ में उनके दमदार अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
नाना पाटेकर की खासियत यह थी कि वह किसी एक तरह के किरदार में बंधकर नहीं रहे। गंभीर और सामाजिक भूमिकाओं के साथ उन्होंने हास्य भूमिकाओं में भी अपनी छाप छोड़ी। फिल्म ‘वेलकम’ में उदय शेट्टी का उनका किरदार आज भी दर्शकों के बीच लोकप्रिय है। इस भूमिका ने नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी उनकी लोकप्रियता बढ़ाई।
अभिनय के अलावा नाना पाटेकर ने निर्देशन और लेखन में भी काम किया। उनकी फिल्मों और रंगमंच से जुड़ी गतिविधियों में सामाजिक सरोकार स्पष्ट दिखाई देते थे। कला और सिनेमा में उनके योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया गया था।
नाना पाटेकर उन कलाकारों में शामिल थे जिन्होंने अभिनय को केवल नायक-नायिका की पारंपरिक सीमाओं से बाहर निकालकर चरित्रों की ताकत के जरिए अपनी पहचान बनाई। उनकी आवाज, संवाद बोलने का अंदाज और भावनात्मक अभिनय लंबे समय तक दर्शकों की स्मृति में बना रहेगा।
उनके निधन से भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे अभिनेता को खो दिया है, जिसकी जगह भरना आसान नहीं होगा।
