Last Updated on October 8, 2026 7:44 pm by INDIAN AWAAZ

हमारे बिजनेस संवाददाता से

बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के सख्त मौद्रिक रुख, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी और वैश्विक बाजारों में कमजोर माहौल के बीच भारतीय शेयर बाजार गुरुवार को भारी बिकवाली की चपेट में आ गया। लगातार दूसरे कारोबारी सत्र में हुई गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी और प्रमुख सूचकांक करीब 18 महीनों के निचले स्तर पर पहुंच गए।

बाजार में बिकवाली इतनी व्यापक रही कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) के सभी सेक्टोरल इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में और भी अधिक दबाव देखने को मिला। हालांकि आईटी क्षेत्र के कुछ शेयर बेहतर तिमाही नतीजों की उम्मीद में अपेक्षाकृत मजबूत रहे, लेकिन समग्र बाजार धारणा नकारात्मक बनी रही।

बीएसई सेंसेक्स 1,045.46 अंक यानी 1.44 प्रतिशत टूटकर 71,593.24 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी-50 371.25 अंक यानी 1.64 प्रतिशत गिरकर 22,231.80 पर आ गया। निफ्टी पहली बार कई महीनों बाद 22,250 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे बंद हुआ। पिछले दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 2 प्रतिशत से अधिक और निफ्टी करीब 2.4 प्रतिशत फिसल चुका है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें बनीं सबसे बड़ा खतरा

बाजार में गिरावट का सबसे बड़ा कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल रहा। मध्य-पूर्व में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव के कारण आपूर्ति बाधित होने की आशंकाओं के बीच ब्रेंट क्रूड 104 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया।

भारत अपनी तेल आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की कीमतों में लगातार वृद्धि देश की अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती मानी जाती है। ऊंची तेल कीमतों से आयातित महंगाई बढ़ सकती है, चालू खाते का घाटा चौड़ा हो सकता है और रुपया अतिरिक्त दबाव में आ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बनी रहती हैं तो विमानन, परिवहन, रसायन, पेंट, ऑटोमोबाइल और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों की लागत बढ़ेगी, जिससे कंपनियों के लाभांश पर असर पड़ सकता है।

कमोडिटी बाजार में दिसंबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 4.28 प्रतिशत बढ़कर 104.49 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

आरबीआई की सख्त नीति से बढ़ी निवेशकों की चिंता

बाजार पर दबाव का दूसरा बड़ा कारण आरबीआई की मौद्रिक नीति रही। केंद्रीय बैंक ने बुधवार को रेपो दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया तथा अपनी नीति का रुख ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ में बदल दिया।

आरबीआई का यह कदम मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने की दिशा में उठाया गया है, लेकिन शेयर बाजार ने इसे ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने के संकेत के रूप में लिया। ऊंची ब्याज दरों से कंपनियों और उपभोक्ताओं के लिए उधारी महंगी होती है, जिससे मांग और निवेश गतिविधियों पर असर पड़ सकता है।

यही कारण रहा कि बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं, रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल जैसे ब्याज दर संवेदनशील क्षेत्रों में भारी बिकवाली देखने को मिली।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में भी सख्त रुख बनाए रखता है तो कॉरपोरेट आय और इक्विटी वैल्यूएशन दोनों पर दबाव बन सकता है।

वैश्विक संकेत भी रहे नकारात्मक

भारतीय बाजार को वैश्विक बाजारों से भी कोई राहत नहीं मिली। एशियाई शेयर बाजारों में व्यापक गिरावट दर्ज की गई क्योंकि अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड लगातार ऊंचे स्तरों पर बनी हुई है। निवेशकों को आशंका है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व अभी ब्याज दरों में और बढ़ोतरी कर सकता है।

अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.345 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो वैश्विक निवेशकों के लिए सुरक्षित और आकर्षक प्रतिफल का संकेत है। इसके परिणामस्वरूप उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का खतरा बढ़ जाता है।

फेडरल रिजर्व की सितंबर बैठक के मिनट्स ने भी बाजार की चिंताओं को बढ़ाया। दस्तावेजों से संकेत मिला कि अधिकांश नीति निर्माता वर्ष के अंत तक एक और ब्याज दर वृद्धि के पक्ष में हैं।

यूरोपीय बाजारों में भी दबाव देखने को मिला। फ्रांस की वित्तीय स्थिति को लेकर बढ़ती चिंताओं तथा बढ़ते सरकारी घाटे ने निवेशकों को सतर्क बना दिया। इससे वैश्विक जोखिम लेने की क्षमता कमजोर हुई।

अमेरिकी बाजारों के लिए भी संकेत कमजोर रहे। डॉव जोन्स फ्यूचर्स करीब 484 अंक नीचे कारोबार करते दिखे, जिससे वॉल स्ट्रीट में भी कमजोर शुरुआत की आशंका बनी रही।

व्यापक बाजार में भारी तबाही

गिरावट केवल लार्जकैप शेयरों तक सीमित नहीं रही बल्कि व्यापक बाजार में और अधिक नुकसान हुआ।

बीएसई मिडकैप इंडेक्स 2.48 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 2.49 प्रतिशत गिरा। यह दर्शाता है कि खुदरा निवेशकों के बीच भी जोखिम लेने की इच्छा कमजोर पड़ रही है।

बाजार की चौड़ाई अत्यंत कमजोर रही। बीएसई में केवल 1,003 शेयरों में बढ़त दर्ज हुई, जबकि 3,426 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। 225 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

बढ़ती अनिश्चितता के बीच बाजार का भय सूचकांक इंडिया वीआईएक्स 10.38 प्रतिशत बढ़कर 15.33 पर पहुंच गया, जो आने वाले दिनों में बाजार में अधिक उतार-चढ़ाव का संकेत देता है।

दिग्गज शेयर बने गिरावट की वजह

निफ्टी को नीचे खींचने वाले प्रमुख शेयरों में आईटीसी, रिलायंस इंडस्ट्रीज और एचडीएफसी बैंक शामिल रहे।

आईटीसी में 4.03 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि रिलायंस इंडस्ट्रीज 2.46 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक 1.49 प्रतिशत टूट गया। इन बड़ी कंपनियों के शेयरों में कमजोरी ने सूचकांकों पर अतिरिक्त दबाव बनाया।

टीसीएस के नतीजे उम्मीद से बेहतर, लेकिन शेयर सुस्त

तिमाही नतीजों के मौसम की शुरुआत देश की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के साथ हुई। कंपनी ने दूसरी तिमाही में स्थिर प्रदर्शन दर्ज किया।

टीसीएस का समेकित राजस्व 73,188 करोड़ रुपये रहा, जो पिछली तिमाही की तुलना में 1.3 प्रतिशत और पिछले वर्ष की समान तिमाही के मुकाबले 11.2 प्रतिशत अधिक है।

कंपनी का शुद्ध लाभ 13,884 करोड़ रुपये रहा, जिसमें तिमाही आधार पर 4 प्रतिशत और वार्षिक आधार पर लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई। परिचालन मार्जिन 24 प्रतिशत रहा।

टीसीएस ने 12 रुपये प्रति शेयर का अंतरिम लाभांश भी घोषित किया, लेकिन बाजार की समग्र कमजोरी के कारण शेयर मामूली गिरावट के साथ बंद हुआ।

फोकस में रहे ये शेयर

वन 97 कम्युनिकेशंस (पेटीएम) का शेयर 5.23 प्रतिशत टूट गया। आरबीआई ने जानकारी दी कि पेटीएम पेमेंट्स बैंक को आरबीआई अधिनियम की दूसरी अनुसूची से बाहर कर दिया गया है, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ी।

पीसी ज्वेलर लगभग 6 प्रतिशत चढ़ गया। कंपनी ने सितंबर तिमाही में करीब 28 प्रतिशत राजस्व वृद्धि की जानकारी दी।

फिनो पेमेंट्स बैंक 11.46 प्रतिशत उछला। कंपनी के औसत जमा आधार में 13 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई।

सेंको गोल्ड में 3 प्रतिशत से अधिक तेजी आई। त्योहारी मांग मजबूत रहने के कारण कंपनी का खुदरा राजस्व 29 प्रतिशत बढ़ा।

वहीं जीएम ब्रुअरीज लगभग 10 प्रतिशत टूट गया, जबकि कंपनी ने लाभ और बिक्री दोनों में दोहरे अंक की वृद्धि दर्ज की थी। बाजार ने भविष्य की मांग और मूल्यांकन को लेकर सतर्क रुख अपनाया।

मैट्रिमोनी डॉट कॉम और इंटरआर्क बिल्डिंग सॉल्यूशंस भी दबाव में रहे, हालांकि दोनों कंपनियों ने सकारात्मक व्यावसायिक अपडेट जारी किए।

IPO बाजार में मिला-जुला प्रदर्शन

प्राथमिक बाजार में भी निवेशकों की मिश्रित प्रतिक्रिया देखने को मिली।

नित्यास जेम्स एंड ज्वेलरी का शेयर 75 रुपये के इश्यू मूल्य के मुकाबले 12.2 प्रतिशत प्रीमियम के साथ 84.15 रुपये पर बंद हुआ। इससे निवेशकों की मजबूत रुचि का संकेत मिला।

इसके विपरीत विशाल निर्माणी का शेयर 220 रुपये के इश्यू मूल्य के मुकाबले 7.16 प्रतिशत डिस्काउंट पर 204.25 रुपये पर बंद हुआ, जो कमजोर बाजार वातावरण को दर्शाता है।

रुपया और बॉन्ड बाजार भी दबाव में

शेयर बाजार की कमजोरी का असर मुद्रा और बॉन्ड बाजारों पर भी दिखाई दिया।

रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96.85 के स्तर पर पहुंच गया। बढ़ते तेल आयात बिल और विदेशी निवेशकों की निकासी ने रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनाया।

भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.285 प्रतिशत पहुंच गई, जो सख्त मौद्रिक परिस्थितियों का संकेत है।

इस बीच सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की मांग बनी रही। एमसीएक्स पर दिसंबर डिलीवरी वाला सोना 1,49,319 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर तक पहुंच गया।

आगे की राह

अब निवेशकों की नजरें आगामी तिमाही नतीजों पर टिकी हैं। बाजार यह देखना चाहेगा कि बढ़ती लागत, ऊंची ब्याज दरों और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय कंपनियां कितना मजबूत प्रदर्शन कर पाती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतें, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां, रुपये की चाल और कॉरपोरेट आय बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।

फिलहाल बाजार में बढ़ी अस्थिरता और व्यापक बिकवाली यह संकेत दे रही है कि निवेशक जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनाकर अधिक सतर्क रणनीति अपना रहे हैं। यदि वैश्विक परिस्थितियों में सुधार नहीं होता और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार पर निकट अवधि में दबाव जारी रह सकता है।