Last Updated on October 7, 2026 11:12 pm by INDIAN AWAAZ

बिजनेस संवाददाता
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को लगातार दो सत्रों की तेजी पर ब्रेक लग गया। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा नीतिगत रेपो दर में 25 आधार अंक की बढ़ोतरी और मौद्रिक नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ यानी चरणबद्ध सख्ती किए जाने के बाद निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया। कमजोर वैश्विक संकेतों, ऊंची बॉन्ड यील्ड, 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चे तेल और रुपये में कमजोरी ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया।
बीएसई सेंसेक्स 429.11 अंक यानी 0.59 प्रतिशत गिरकर 72,638.70 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 173.05 अंक यानी 0.76 प्रतिशत टूटकर 22,603.05 अंक पर आ गया। इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी में क्रमशः 1.61 प्रतिशत और 1.58 प्रतिशत की तेजी आई थी।
बुधवार की गिरावट में खासतौर पर आईटी, ऑटो और मेटल शेयरों पर दबाव रहा। हालांकि बैंकिंग शेयरों में अपेक्षाकृत मजबूती ने बाजार को और बड़ी गिरावट से बचाया।
निफ्टी में इंफोसिस 2.16 प्रतिशत, लार्सन एंड टुब्रो 1.82 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक 1.22 प्रतिशत टूटे और प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में रहे।
आरबीआई ने बढ़ाई रेपो दर
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने 5 से 7 अक्टूबर तक चली बैठक में सर्वसम्मति से रेपो दर को 25 आधार अंक बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत कर दिया। इससे पहले यह दर 5.25 प्रतिशत थी।
करीब तीन साल बाद आरबीआई ने रेपो दर में बढ़ोतरी की है। हालांकि बाजार को इस फैसले की काफी हद तक उम्मीद थी, लेकिन मौद्रिक नीति के रुख में बदलाव ने निवेशकों को अधिक सतर्क कर दिया।
आरबीआई ने अपनी नीति का रुख ‘न्यूट्रल’ से बदलकर ‘कैलिब्रेटेड टाइटनिंग’ कर दिया है। इसका अर्थ है कि केंद्रीय बैंक महंगाई के दबाव को देखते हुए मौद्रिक परिस्थितियों को जरूरत के मुताबिक और सख्त करने के लिए तैयार है।
आरबीआई ने स्टैंडिंग डिपॉजिट फैसिलिटी (एसडीएफ) दर को बढ़ाकर 5.25 प्रतिशत कर दिया, जबकि मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी (एमएसएफ) दर और बैंक दर को 5.75 प्रतिशत पर बरकरार रखा।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए आर्थिक वृद्धि का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत किया है, लेकिन महंगाई का अनुमान भी बढ़ाकर 5.2 प्रतिशत कर दिया। मजबूत आर्थिक गतिविधियों के साथ बढ़ता महंगाई जोखिम केंद्रीय बैंक के लिए नीतिगत चुनौती बना हुआ है।
ऊंचा कच्चा तेल चिंता का कारण
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारतीय बाजार की चिंता बढ़ाई। ब्रेंट क्रूड दिसंबर 2026 वायदा 1.35 डॉलर यानी 1.34 प्रतिशत बढ़कर 101.93 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए तेल की कीमतों में लगातार तेजी से आयात बिल, चालू खाते, महंगाई और कंपनियों की लागत पर असर पड़ सकता है। इससे रुपये पर भी दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ युद्ध को खत्म करने के संकेत दिए हैं और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के जरिए तेल आपूर्ति में सुधार की बात कही है, लेकिन वैश्विक तेल प्रवाह अभी भी युद्ध से पहले के स्तर से नीचे बताया जा रहा है।
बॉन्ड यील्ड और रुपये पर दबाव
अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर करीब 5.315 प्रतिशत हो गई। भारत में 10 साल के बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड भी पिछले सत्र के 7.198 प्रतिशत से बढ़कर 7.222 प्रतिशत पहुंच गई।
ऊंची बॉन्ड यील्ड शेयर बाजार के लिए प्रतिकूल मानी जाती है, क्योंकि इससे निवेशकों को अपेक्षाकृत सुरक्षित डेट इंस्ट्रूमेंट में बेहतर रिटर्न मिलने लगता है। इसके अलावा ऊंची ब्याज दरें कंपनियों की वित्तीय लागत बढ़ा सकती हैं और ब्याज-संवेदनशील क्षेत्रों में मांग प्रभावित कर सकती हैं।
विदेशी मुद्रा बाजार में भी रुपया कमजोर रहा। डॉलर के मुकाबले रुपया करीब 96.7850 पर कारोबार करता रहा, जबकि पिछले सत्र में यह 96.3575 पर बंद हुआ था। डॉलर इंडेक्स 0.44 प्रतिशत बढ़कर 102.28 पर पहुंच गया।
एमसीएक्स पर 4 दिसंबर 2026 की डिलीवरी वाला सोना वायदा 0.40 प्रतिशत गिरकर 1,51,800 रुपये पर आ गया।
मिडकैप और स्मॉलकैप भी दबाव में
बुधवार की गिरावट केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स 0.64 प्रतिशत गिरा, जबकि बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स 0.02 प्रतिशत नीचे रहा।
बाजार का रुख कमजोर रहा। बीएसई पर 2,013 शेयर बढ़कर बंद हुए, जबकि 2,360 शेयरों में गिरावट रही। कुल 248 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
बाजार में निकट अवधि की अस्थिरता को मापने वाला इंडिया VIX 2.25 प्रतिशत बढ़कर 13.93 पर पहुंच गया।
वैश्विक बाजारों में भी सतर्कता
वैश्विक स्तर पर भी निवेशकों का रुख सतर्क रहा। एशियाई बाजारों में बुधवार को अधिकांश प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए। चीन के मुख्यभूमि बाजार छुट्टी के कारण बंद रहे।
ऊंची सरकारी बॉन्ड यील्ड, मध्य-पूर्व में तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने एशियाई बाजारों की धारणा प्रभावित की।
यूरोपीय बाजारों में भी कमजोरी रही। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा द्वारा फ्रांस से राजकोषीय घाटा कम करने की अपील के बाद यूरोपीय बाजारों में निवेशकों की चिंता बढ़ी।
हालांकि, अमेरिकी शेयर बाजार मंगलवार को मजबूत रहा। डाउ जोंस 253.38 अंक यानी 0.49 प्रतिशत बढ़कर 51,521.28 अंक पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 में 45 अंक यानी 0.58 प्रतिशत की तेजी आई और यह 7,818.93 अंक पर पहुंचा। नैस्डैक कंपोजिट 122.48 अंक यानी 0.45 प्रतिशत बढ़कर 27,599.79 अंक पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 और नैस्डैक दोनों नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचे।
अमेरिकी बाजार में टेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े शेयरों में तेजी बनी रही। सेमीकंडक्टर कंपनियों को एआई डेटा सेंटर और इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश से लाभ मिलने की उम्मीद है।
ऊर्जा क्षेत्र में कॉन्स्टेलेशन एनर्जी के शेयरों में जोरदार तेजी रही। कंपनी ने गूगल के साथ दीर्घकालिक बिजली आपूर्ति समझौते की घोषणा की है। यह समझौता एआई डेटा सेंटरों के लिए लगातार बढ़ती बिजली जरूरतों को दर्शाता है। कंपनी अपने परमाणु ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाने के लिए 4.3 अरब डॉलर से अधिक निवेश करने की योजना बना रही है।
अमेरिकी व्यापार घाटा भी बढ़ा
अमेरिका का व्यापार घाटा अगस्त में 13.7 प्रतिशत बढ़कर 105.6 अरब डॉलर हो गया। आयात में तेज वृद्धि इसके पीछे प्रमुख कारण रही। कच्चे तेल, सेमीकंडक्टर और अन्य वस्तुओं के आयात में बढ़ोतरी हुई।
अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स और तीसरी तिमाही के कॉरपोरेट नतीजों पर है। अमेरिकी ब्याज दरों को लेकर संकेत वैश्विक बाजारों की दिशा के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
टाइटन में तेज गिरावट
टाइटन कंपनी का शेयर 3.80 प्रतिशत टूट गया। कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में अपने उपभोक्ता कारोबार में करीब 25 प्रतिशत सालाना वृद्धि की जानकारी दी। तिमाही के दौरान कंपनी ने 78 नए स्टोर जोड़े और उसका संयुक्त खुदरा नेटवर्क 3,758 स्टोर तक पहुंच गया।
हालांकि, आभूषण कारोबार की वृद्धि पहली तिमाही के 39 प्रतिशत से घटकर दूसरी तिमाही में करीब 21 प्रतिशत रह गई। इसी वजह से निवेशकों ने शेयर में मुनाफावसूली की।
इसके विपरीत कल्याण ज्वेलर्स इंडिया 3.80 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी ने दूसरी तिमाही में समेकित राजस्व में 26 प्रतिशत से अधिक की सालाना वृद्धि दर्ज की। भारत में कारोबार करीब 27 प्रतिशत बढ़ा, जबकि समान स्टोर बिक्री वृद्धि करीब 20 प्रतिशत रही।
भारती एयरटेल में तेजी
भारती एयरटेल 1.29 प्रतिशत मजबूत हुआ। कंपनी ने नए पोस्टपेड प्लान पेश किए हैं, जिनमें मासिक किराया 50 रुपये तक बढ़ाया गया है। नई दरें 8 अक्टूबर से लागू होंगी।
कंपनी के नए पोस्टपेड प्लान 499 रुपये से शुरू होकर 1,799 रुपये तक हैं। इनमें डेटा और कॉलिंग के साथ स्पैम और फ्रॉड सुरक्षा तथा मनोरंजन से जुड़ी सुविधाएं शामिल हैं। ग्राहकों को हर सिम पर साल में एक मुफ्त अंतरराष्ट्रीय रोमिंग यात्रा की सुविधा भी दी जाएगी।
अन्य शेयरों में हलचल
कनोहर इलेक्ट्रिकल्स 13.99 प्रतिशत उछला। कंपनी का वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही का एकल शुद्ध लाभ 140.04 प्रतिशत बढ़कर 27.34 करोड़ रुपये हो गया। परिचालन से राजस्व भी दोगुने से अधिक होकर 137 करोड़ रुपये पहुंच गया।
उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक 3.40 प्रतिशत चढ़ा। दूसरी तिमाही में कुल वितरण 54.9 प्रतिशत बढ़कर 3,525 करोड़ रुपये हो गया। गैर-जेएलजी वितरण में मजबूत वृद्धि दर्ज की गई।
एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी (इंडिया) 10 प्रतिशत के ऊपरी सर्किट पर पहुंच गई। पहली तिमाही में कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 54.15 प्रतिशत बढ़कर 89.15 करोड़ रुपये हो गया। परिचालन से राजस्व में 115.35 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
पीटीसी इंडस्ट्रीज 7.11 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी ने 22,150 रुपये प्रति शेयर के फ्लोर प्राइस पर क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट शुरू करने की घोषणा की है।
लार्सन एंड टुब्रो 1.82 प्रतिशत गिरा। उसकी सहायक कंपनी एलएंडटी एनर्जी कार्बनलाइट सॉल्यूशंस को झारखंड के चंद्रपुरा में 2×800 मेगावाट थर्मल पावर परियोजना के मुख्य प्लांट पैकेज के लिए लिमिटेड नोटिस टू प्रोसीड मिला है।
मार्सन्स 11.09 प्रतिशत उछला। कंपनी ने अमेरिका और कनाडा में ट्रांसफॉर्मर वितरण, सर्विसिंग और विनिर्माण कारोबार बढ़ाने के लिए क्लीनहिल पार्टनर्स के साथ संयुक्त उद्यम बनाने की योजना की घोषणा की है।
आगे बाजार की दिशा
आरबीआई के सख्त रुख, महंगे कच्चे तेल, ऊंची वैश्विक बॉन्ड यील्ड और रुपये की कमजोरी ने शेयर बाजार के लिए निकट अवधि की चुनौतियां बढ़ा दी हैं। हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूत वृद्धि और बेहतर कॉरपोरेट आय बाजार को सहारा दे सकती है।
आने वाले सत्रों में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल, विदेशी निवेश प्रवाह, वैश्विक बॉन्ड यील्ड और कंपनियों के दूसरी तिमाही के नतीजों पर रहेगी। अमेरिकी फेड की अगली नीति दिशा भी भारतीय बाजारों के लिए महत्वपूर्ण होगी।
दो सत्रों की तेजी के बाद बुधवार की गिरावट से संकेत मिलता है कि बाजार फिलहाल महंगाई, ब्याज दरों और वैश्विक जोखिमों के प्रति बेहद संवेदनशील बना हुआ है।
