Last Updated on August 19, 2026 12:31 am by INDIAN AWAAZ

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Our Correspondent / New Delhi

नेशनल टेस्टिंग Agency (NTA) ने अपनी परीक्षा प्रणाली में एक व्यापक संरचनात्मक बदलाव (structural overhaul) करते हुए 600 विशेषज्ञों को हटा दिया है और उनकी जगह नए विशेषज्ञों को शामिल किया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी के नेतृत्व में किए गए इस बदलाव के तहत, परीक्षा में किसी भी तरह की खामियों को दूर करने और जांच प्रक्रिया को कड़ा करने के लिए चार-स्तरीय (four-tier) प्रश्न पत्र जांच प्रणाली लागू की जा रही है।

यह पुनर्गठन उन ऐतिहासिक सुरक्षा और शुचिता से जुड़ी कमजोरियों को दूर करने के लिए है, जिन्होंने हाल के वर्षों में NEET और JEE जैसी प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं को प्रभावित किया था। भौतिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए, NTA के कार्यालयों को एक नए, अत्यधिक सुरक्षित परिसर में स्थानांतरित किया जा रहा है, जहां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की टीमें सुरक्षा संभालेंगी। इसके अलावा, प्रशासनिक निगरानी को सुव्यवस्थित करने और परीक्षाओं का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए एजेंसी अगले कुछ हफ्तों में 25 वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल करने की योजना बना रही है।

NTA विवादों के घेरे में क्यों रहा है?

नेशनल Testing Agency (NTA) हाल के वर्षों में बड़े पैमाने पर विवादों के केंद्र में रही है। इसका मुख्य कारण उच्च-स्तरीय राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षाओं में परिचालन संबंधी खामियां (operational lapses), लॉजिस्टिक विफलताएं और सुरक्षा में सेंध लगना रहा है। इसकी खराब साख के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  • पेपर लीक और धांधली: NEET-UG जैसी अत्यधिक महत्वपूर्ण परीक्षाएं प्रश्न पत्र लीक होने, संगठित नेटवर्क के जरिए उनके अनधिकृत प्रसार और स्थानीय स्तर पर हुई धोखाधड़ी के गंभीर आरोपों से घिरी रहीं (जैसे बिहार और गुजरात में सामने आए मामले), जिससे परीक्षा की पवित्रता और शुचिता खतरे में पड़ गई।
  • परिणाम में अनियमितताएं और ग्रेस मार्क्स: परिणामों की अचानक घोषणा से अभूतपूर्व विसंगतियां सामने आईं। इनमें 720/720 अंक पाने वाले टॉपर्स की असामान्य रूप से अधिक संख्या और समय के नुकसान के लिए दिए गए विवादित “ग्रेस मार्क्स” शामिल हैं, जिसके कारण देश भर में छात्रों का प्रदर्शन हुआ और कानूनी हस्तक्षेप की स्थिति पैदा हुई।
  • परीक्षाओं का रद्द और स्थगित होना: डार्कनेट पर लीक होने के कारण यूजीसी-नेट (UGC-NET) परीक्षा को उसके आयोजन के कुछ ही घंटों के भीतर रद्द किए जाने जैसी घटनाओं ने एजेंसी की कार्यकुशलता और तैयारी पर जनता के भरोसे को गहरा आघात पहुंचाया।
  • बुनियादी ढांचे और जवाबदेही से जुड़ी चिंताएं: आलोचकों और विशेषज्ञ समितियों ने ट्रांजिट सुरक्षा, भौतिक भंडारण सुरक्षा और प्रशासनिक क्षमता में गंभीर कमियों को उजागर किया, जिससे सरकार पर एजेंसी के नेतृत्व और सुरक्षा ढांचे को पूरी तरह से पुनर्गठित करने का भारी दबाव बन गया।