हमारे बिजनेस संवाददाता

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दबाव बना रहा और प्रमुख सूचकांकों ने गिरावट का सिलसिला आगे बढ़ाया। निफ्टी लगातार छठे कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि सेंसेक्स में लगातार तीसरे दिन कमजोरी दर्ज की गई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी।

ब्रेंट क्रूड के 91 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचने से महंगाई और भारत के आयात बिल को लेकर आशंकाएं बढ़ीं। इसके अलावा वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेत, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और रुपये में कमजोरी ने घरेलू बाजार की धारणा पर दबाव डाला।

साप्ताहिक निफ्टी-50 डेरिवेटिव्स की समाप्ति से पहले बाजार में उतार-चढ़ाव भी तेज रहा। सूचना प्रौद्योगिकी शेयरों में बिकवाली देखने को मिली, जबकि फार्मा, ऑटो और तेल एवं गैस क्षेत्र के शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया।

बीएसई सेंसेक्स 492.70 अंक यानी 0.63 प्रतिशत गिरकर 77,235.46 पर बंद हुआ। निफ्टी-50 सूचकांक 132.75 अंक यानी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 24,154.90 पर बंद हुआ।

लगातार तीन कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में कुल 1.08 प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि निफ्टी पिछले छह सत्रों में 1.74 प्रतिशत टूट चुका है।

आईटी शेयरों में बिकवाली

मंगलवार को आईटी शेयरों पर खास दबाव रहा। इंफोसिस 2.18 प्रतिशत गिरकर निफ्टी के प्रमुख कमजोर शेयरों में शामिल रहा। भारती एयरटेल 1.78 प्रतिशत और एचडीएफसी बैंक 0.82 प्रतिशत नीचे बंद हुए।

हालांकि व्यापक बाजार ने प्रमुख सूचकांकों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया। बीएसई 150 मिडकैप सूचकांक 0.35 प्रतिशत गिरा, जबकि बीएसई 250 स्मॉलकैप सूचकांक 0.19 प्रतिशत चढ़ गया।

बीएसई पर बाजार का रुख नकारात्मक रहा। कुल 1,930 शेयर बढ़कर बंद हुए, जबकि 2,384 शेयरों में गिरावट रही। वहीं 233 शेयरों में कोई बदलाव नहीं हुआ।

बाजार में यह अंतर भी देखने को मिला कि जहां बड़े और प्रमुख शेयरों में बिकवाली हावी रही, वहीं कुछ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों ने खरीदारी जारी रखी।

91 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड

वैश्विक बाजारों के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार के लिए भी कच्चे तेल की कीमतें प्रमुख जोखिम बनकर उभरी हैं। अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 18 सेंट यानी 0.20 प्रतिशत बढ़कर 91.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयातित कच्चे तेल पर निर्भर है। ऐसे में लंबे समय तक ऊंची तेल कीमतें बनी रहने पर देश के आयात बिल, चालू खाते, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।

कच्चे तेल में तेजी का असर परिवहन, लॉजिस्टिक्स और कई विनिर्माण क्षेत्रों की लागत पर भी पड़ सकता है। इससे कंपनियों के मार्जिन प्रभावित होने की आशंका रहती है। दूसरी ओर, तेल एवं गैस क्षेत्र की कुछ कंपनियों को ऊंची कीमतों से लाभ मिलने की उम्मीद रहती है।

रुपये और बॉन्ड यील्ड पर भी दबाव

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया भी कमजोर हुआ। आंशिक रूप से परिवर्तनीय रुपया 95.6500 प्रति डॉलर के स्तर पर रहा, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.4200 पर बंद हुआ था।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और रुपये की कमजोरी का एक साथ असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। चूंकि कच्चे तेल का भुगतान मुख्य रूप से डॉलर में किया जाता है, इसलिए कमजोर रुपया आयात की लागत को और बढ़ा सकता है।

घरेलू बॉन्ड बाजार में भी सतर्कता दिखाई दी। भारत सरकार की 10 वर्षीय बेंचमार्क प्रतिभूति पर यील्ड बढ़कर 6.824 प्रतिशत हो गई, जबकि पिछले सत्र में यह 6.804 प्रतिशत थी।

कमोडिटी बाजार में 5 अक्टूबर 2026 की समाप्ति वाले एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स 0.42 प्रतिशत गिरकर 1,52,282 रुपये पर आ गए।

इस बीच डॉलर इंडेक्स मामूली रूप से घटकर 99.63 रहा। अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 4.736 प्रतिशत तक पहुंच गई।

वैश्विक बाजारों में भी जोखिम से बचने की प्रवृत्ति

भारतीय बाजार में कमजोरी के बीच यूरोपीय शेयर बाजारों में भी मंगलवार को बिकवाली का दबाव जारी रहा। पश्चिम एशिया में नए सिरे से तनाव बढ़ने के कारण क्षेत्रीय सूचकांक करीब दो सप्ताह के निचले स्तर तक पहुंच गए।

एशियाई बाजारों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा। अमेरिका-ईरान संघर्ष विराम को लेकर अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने वैश्विक महंगाई को लेकर नई चिंता पैदा कर दी।

ऊंची तेल कीमतों के कारण अमेरिका के लंबी अवधि के ट्रेजरी बॉन्ड की यील्ड में भी वृद्धि हुई। इससे वैश्विक शेयर बाजारों के मूल्यांकन पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ 60 दिन के समझौते को आगे बढ़ाने से इनकार किया और ओमान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी। इस बीच वाशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत भी गतिरोध में बनी रही।

वॉल स्ट्रीट में गिरावट, फेड की बैठक के मिनट्स पर नजर

अमेरिकी शेयर बाजार भी सोमवार को कमजोर बंद हुए। डॉव जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज 0.51 प्रतिशत, एसएंडपी 500 0.52 प्रतिशत और नैस्डैक कंपोजिट 0.32 प्रतिशत नीचे बंद हुआ।

अब निवेशकों की नजर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की जुलाई बैठक के मिनट्स पर है, जो बुधवार को जारी होने वाले हैं। निवेशक इससे अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा के बारे में संकेत तलाशेंगे।

28-29 जुलाई को हुई बैठक में फेडरल रिजर्व ने अपनी प्रमुख ब्याज दर को 3.50-3.75 प्रतिशत पर बरकरार रखा था। हालांकि फैसला सर्वसम्मत नहीं था और तीन नीति निर्माताओं ने ब्याज दर बढ़ाने के पक्ष में असहमति जताई थी।

फेड के मिनट्स से महंगाई, आर्थिक वृद्धि और भविष्य की ब्याज दर नीति को लेकर केंद्रीय बैंक के रुख का बेहतर अंदाजा लग सकता है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी से उभरते बाजारों पर भी दबाव बढ़ता है क्योंकि ऊंची अमेरिकी दरें विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी परिसंपत्तियों को अधिक आकर्षक बना सकती हैं।

चीन की अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी

दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन से भी कमजोर आर्थिक संकेत मिले। जुलाई में चीन की आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार धीमी पड़ी और उपभोक्ता खर्च, निवेश तथा औद्योगिक उत्पादन पर दबाव बढ़ा।

जुलाई में खुदरा बिक्री की सालाना वृद्धि दर केवल 0.6 प्रतिशत रही, जबकि जून में यह 1 प्रतिशत थी।

पहले सात महीनों में शहरी स्थिर परिसंपत्ति निवेश में 6.7 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि पहली छमाही में गिरावट 5.7 प्रतिशत थी।

औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर भी जून के 5.3 प्रतिशत से घटकर 4.5 प्रतिशत रह गई। वहीं शहरी बेरोजगारी दर 5 प्रतिशत से बढ़कर 5.2 प्रतिशत हो गई।

चीन के कमजोर आंकड़ों ने ऐसे समय में वैश्विक आर्थिक वृद्धि को लेकर चिंता बढ़ाई है, जब कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई को बढ़ाने का खतरा पैदा कर रही हैं।

मिल्की मिस्ट डेयरी फूड की शानदार शुरुआत

प्राथमिक बाजार में हालांकि निवेशकों को कुछ राहत मिली। मिल्की मिस्ट डेयरी फूड ने शेयर बाजार में मजबूत शुरुआत की।

बीएसई पर कंपनी का शेयर 181.45 रुपये पर बंद हुआ, जो 140 रुपये के इश्यू मूल्य से 29.61 प्रतिशत अधिक है। शेयर ने 165 रुपये पर शुरुआत की थी, जो इश्यू मूल्य से 17.86 प्रतिशत का प्रीमियम था।

कारोबारी सत्र के दौरान शेयर 165 से 181.45 रुपये के दायरे में रहा। बीएसई पर कंपनी के 69.28 लाख से अधिक शेयरों का कारोबार हुआ।

सिग्मा एडवांस्ड सिस्टम्स में अपर सर्किट

सिग्मा एडवांस्ड सिस्टम्स का शेयर 5 प्रतिशत की ऊपरी सर्किट सीमा पर पहुंच गया। कंपनी ने बताया कि उसे भारत सरकार से लगभग 155 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले हैं।

ये ऑर्डर कंपनी के इंद्रजाल रेंजर एंटी-ड्रोन पेट्रोल वाहन से जुड़े हैं। ऑर्डर मिलने से रक्षा और काउंटर-ड्रोन तकनीक क्षेत्र में कंपनी की संभावनाओं को लेकर निवेशकों का उत्साह बढ़ा।

पेटीएम और नेल्को पर दबाव

वन97 कम्युनिकेशंस, जो पेटीएम की मूल कंपनी है, का शेयर 2.15 प्रतिशत गिरा। शुरुआती कारोबार में कंपनी के शेयर में बड़े ब्लॉक सौदे की खबर के बाद दबाव देखा गया।

कंपनी ने सोमवार को बताया था कि पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर शर्मा से जुड़ी इकाई रेजिलिएंट एसेट मैनेजमेंट बी.वी. कंपनी में अपनी 4.98 प्रतिशत तक हिस्सेदारी ब्लॉक मार्केट सौदे के माध्यम से बेचने का प्रस्ताव कर रही है।

यह प्रस्ताव रेजिलिएंट और एंटफिन (नीदरलैंड्स) होल्डिंग बी.वी. के बीच मौजूदा ऑप्शनली कन्वर्टिबल डिबेंचर समझौते के तहत है।

नेल्को में 12.62 प्रतिशत की तेज गिरावट दर्ज हुई। कंपनी ने अमेरिकी प्री-रेवेन्यू सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनी लूनार होल्डको इंक., जिसे एल्वियो मोबाइल के नाम से कारोबार किया जाता है, में 20 मिलियन डॉलर के रणनीतिक निवेश की घोषणा की है।

यह निवेश 7 प्रतिशत सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न वाले कंपल्सरीली कन्वर्टिबल डिबेंचर के माध्यम से किया गया है। कंपनी डायरेक्ट-टू-डिवाइस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स और मोबाइल सैटेलाइट कनेक्टिविटी के लिए नई पीढ़ी का एनजीएसओ नेटवर्क विकसित कर रही है।

निवेशकों की चिंता मुख्य रूप से इस बात को लेकर रही कि नेल्को एक ऐसी कंपनी में 20 मिलियन डॉलर लगा रही है, जो अभी राजस्व अर्जित नहीं कर रही है। इसके अलावा लूनार में नेल्को की संभावित हिस्सेदारी फिलहाल तय नहीं है। नेल्को ने स्पष्ट किया है कि इस निवेश से उसे लूनार पर नियंत्रण प्राप्त नहीं होगा।

अन्य प्रमुख शेयरों का प्रदर्शन

डीसीएक्स सिस्टम्स 3.19 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी और उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली इकाई रेनियल एडवांस्ड सिस्टम्स को कुल 18.28 करोड़ रुपये के खरीद आदेश मिले हैं।

नेटवेब टेक्नोलॉजीज इंडिया 2.16 प्रतिशत बढ़ा। कंपनी ने अपना योग्य संस्थागत प्लेसमेंट यानी क्यूआईपी इश्यू खोला और इसका फ्लोर प्राइस 4,885.90 रुपये प्रति शेयर तय किया।

केपीआई ग्रीन एनर्जी 1.95 प्रतिशत चढ़ी। कंपनी ने गुजरात के भरूच में अपने विंड-सोलर हाइब्रिड पावर प्रोजेक्ट के तहत 130 मेगावाट एसी/195 मेगावाट डीसी सौर क्षमता को चालू करने की घोषणा की।

हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर 4.03 प्रतिशत उछला। कंपनी को तमिलनाडु में पालायम फी प्लाजा के संचालन के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण से 80.16 करोड़ रुपये का लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस मिला।

एसपीआर ऑटो टेक्नोलॉजीज 1.43 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी ने क्यूआईपी इश्यू शुरू किया और इसका फ्लोर प्राइस 4,438.20 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया।

गोल्डियम इंटरनेशनल 3.31 प्रतिशत गिरा, हालांकि कंपनी ने अमेरिका स्थित अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों से 50 करोड़ रुपये के निर्यात ऑर्डर मिलने की जानकारी दी।

सीगल इंडिया 2.50 प्रतिशत गिरा। कंपनी और सुशी इंफ्रा माइनिंग को अरुणाचल प्रदेश में एनएच-913 पर 204 किलोमीटर लंबी इंटरमीडिएट-लेन सड़कों के निर्माण के लिए सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय से चार लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस मिले हैं। इन परियोजनाओं की कुल बोली लागत 2,149.62 करोड़ रुपये है।

प्रोटीन ईगव टेक्नोलॉजीज 0.49 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी को अरुणाचल प्रदेश सरकार से 5.99 करोड़ रुपये का वर्क ऑर्डर मिला है। इसके तहत अरुण परिवार पत्र राज्य परिवार रजिस्ट्री प्लेटफॉर्म का डिजाइन, विकास, कार्यान्वयन और रखरखाव किया जाएगा।

आईपीओ बाजार में मिला-जुला रुझान

प्राथमिक बाजार में मंगलवार को भी निवेशकों की सक्रियता बनी रही, हालांकि अलग-अलग इश्यू को लेकर निवेशकों की प्रतिक्रिया में बड़ा अंतर देखने को मिला।

सनशाइन पिक्चर्स को 54,86,051 शेयरों के मुकाबले 2,34,97,633 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इस तरह इश्यू पहले दिन 4.28 गुना सब्सक्राइब हुआ। आईपीओ 18 अगस्त को खुला है और 20 अगस्त को बंद होगा। इसका मूल्य दायरा 342-360 रुपये प्रति शेयर है।

शंकेश ज्वेलर्स को 2,76,37,400 शेयरों के मुकाबले 98,12,320 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इश्यू 0.36 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका मूल्य दायरा 88-93 रुपये है और बोली 20 अगस्त तक लगाई जा सकती है।

होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क्स के आईपीओ को 25,13,56,273 शेयरों के मुकाबले 5,93,40,250 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इश्यू 0.24 गुना सब्सक्राइब हुआ। आईपीओ 17 अगस्त को खुला था और 19 अगस्त को बंद होगा। इसका मूल्य दायरा 57-60 रुपये प्रति शेयर है।

वहीं ललिता ज्वैलरी मार्ट को अपेक्षाकृत मजबूत प्रतिक्रिया मिली। कंपनी के 6,27,61,403 शेयरों के मुकाबले 19,18,08,000 शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुईं। इश्यू 3.06 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसका मूल्य दायरा 190-201 रुपये प्रति शेयर है और आईपीओ 19 अगस्त को बंद होगा।

आगे बाजार की दिशा तय करेंगे तेल, भू-राजनीति और ब्याज दरें

आने वाले कारोबारी सत्रों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड से तय होने की संभावना है।

91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कच्चा तेल, रुपये में कमजोरी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी भारतीय शेयर बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण संयोजन है। हालांकि घरेलू निवेशकों की भागीदारी, चुनिंदा क्षेत्रों में मजबूती और प्राथमिक बाजार में जारी गतिविधियां बाजार को कुछ सहारा दे सकती हैं।

निवेशकों की नजर अब साप्ताहिक डेरिवेटिव्स एक्सपायरी, वैश्विक केंद्रीय बैंकों के संकेत और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के मिनट्स पर रहेगी। पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आने से बाजार को राहत मिल सकती है। इसके विपरीत तनाव बढ़ने पर अस्थिरता और तेज हो सकती है।

निफ्टी के लगातार छह कारोबारी सत्रों से गिरने के बाद निवेशकों को अब बाजार में स्थिरता के संकेतों का इंतजार रहेगा। फिलहाल बड़े शेयरों में बिकवाली का दबाव अधिक है और ऐसे माहौल में निवेशकों के लिए चयनात्मक रुख अपनाना महत्वपूर्ण होगा। आने वाले सत्र यह तय करने में अहम होंगे कि मौजूदा गिरावट के बाद बाजार स्थिर होता है या सुधार का दौर अभी कुछ और आगे जारी रहता है।