Last Updated on March 16, 2026 12:37 am by INDIAN AWAAZ

— अंदलीब अख़्तर
नई दिल्ली: देश में होने जा रहे महत्वपूर्ण विधानसभा चुनाव ऐसे समय में होने वाले हैं जब बढ़ती वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और घरेलू स्तर पर ईंधन आपूर्ति से जुड़ी चिंताएँ राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकती हैं। कई विश्लेषकों का मानना है कि एलपीजी सिलेंडर की उपलब्धता, ऊर्जा आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में अस्थिरता जैसे मुद्दे चुनावी बहस का हिस्सा बन सकते हैं।
देश में एक दशक से अधिक समय से सत्ता में रही केंद्र सरकार, जिसका नेतृत्व Narendra Modi कर रहे हैं, अब उन राज्यों में राजनीतिक विस्तार की कोशिश कर रही है जहाँ उसे अब तक अपेक्षित सफलता नहीं मिली है। इनमें प्रमुख रूप से Tamil Nadu, West Bengal और Kerala शामिल हैं। आने वाले चुनाव यह तय करेंगे कि क्या ये राज्य प्रधानमंत्री के लिए राजनीतिक रूप से नए अवसर खोलेंगे या फिर उनकी यह महत्वाकांक्षा अधूरी ही रह जाएगी।
इस बीच Election Commission of India ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा चुनावों की तारीखों की घोषणा कर दी है। इसके तहत Assam और Kerala में 9 अप्रैल को मतदान होगा, जबकि Tamil Nadu और Puducherry में 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। West Bengal में मतदान दो चरणों में—23 और 29 अप्रैल—को होगा। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे।
राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार इस बार के चुनाव ऐसे समय में हो रहे हैं जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव—विशेष रूप से United States, Israel और Iran से जुड़ी घटनाओं—ने ऊर्जा बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसके साथ ही घरेलू स्तर पर एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति को लेकर उठ रही चिंताएँ भी राजनीतिक चर्चा का विषय बन सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ईंधन की कीमतों या आपूर्ति से जुड़ी समस्याएँ बढ़ती हैं तो इसका असर मतदाताओं की प्राथमिकताओं पर पड़ सकता है। ग्रामीण और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए रसोई गैस की उपलब्धता और कीमत एक संवेदनशील मुद्दा है, जो चुनावी बहस में प्रमुख स्थान ले सकता है।
इन चुनावों में कई मौजूदा मुख्यमंत्रियों के लिए भी यह मुकाबला ऐतिहासिक साबित हो सकता है। Mamata Banerjee चौथी बार लगातार सत्ता में लौटने का लक्ष्य लेकर मैदान में हैं। वहीं M. K. Stalin दूसरी बार लगातार जनादेश पाने की कोशिश कर रहे हैं। Himanta Biswa Sarma भी असम में दूसरी बार सरकार बनाने की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि Pinarayi Vijayan केरल में लगातार तीसरी बार सत्ता में लौटने का दुर्लभ रिकॉर्ड बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
इन चुनावों में देश के अलग-अलग क्षेत्रों से पाँच मौजूदा मुख्यमंत्रियों की राजनीतिक प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई है—दक्षिण भारत से तीन, पूर्वी क्षेत्र से एक और पूर्वोत्तर से एक। यही कारण है कि इन चुनावों को केवल क्षेत्रीय ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
जैसे-जैसे चुनाव प्रचार तेज होगा, यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या ईंधन संकट और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता वास्तव में मतदाताओं के फैसलों को प्रभावित करती है या फिर स्थानीय मुद्दे ही चुनावी राजनीति में प्रमुख भूमिका निभाते हैं। फिलहाल देश की राजनीतिक नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब मतगणना के साथ इन राज्यों का राजनीतिक भविष्य तय होगा।
