Last Updated on March 12, 2026 11:47 pm by INDIAN AWAAZ

AMN / नई दिल्ली

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण भारत में एलपीजी (रसोई गैस) की आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है। भारत के आयात का बड़ा हिस्सा रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz से होकर आता है, जहां हालिया घटनाओं के कारण आपूर्ति बाधित हो गई है। अधिकारियों के अनुसार भारत के आधे से अधिक एलपीजी आयात प्रभावित हुए हैं, जिससे देश में गैस की कमी की स्थिति बनती दिखाई दे रही है।

इस संकट से निपटने के लिए सरकार और उद्योग दोनों ने त्वरित कदम उठाए हैं। रिफाइनिंग कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि वे C3–C4 हाइड्रोकार्बन स्ट्रीम को एलपीजी उत्पादन की ओर मोड़कर घरेलू उत्पादन बढ़ाएं। इन उपायों के कारण एलपीजी उत्पादन में लगभग 25–28 प्रतिशत तक वृद्धि दर्ज की गई है।

इसके साथ ही भारत ने आयात के स्रोतों का विस्तार भी किया है। अब खाड़ी देशों के अलावा United States, Norway, Canada, Algeria और Russia से भी एलपीजी की खरीद बढ़ाई जा रही है ताकि आपूर्ति को स्थिर रखा जा सके।

आवश्यक सेवाओं को प्राथमिकता

सरकार ने एलपीजी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए कुछ अस्थायी व्यवस्थाएं लागू की हैं। अस्पतालों, शैक्षणिक संस्थानों और आवश्यक सेवाओं से जुड़े वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। वहीं रेस्तरां को उनकी औसत मासिक आवश्यकता का केवल 20 प्रतिशत एलपीजी आवंटित किया जाएगा।

एलपीजी की बचत के लिए छोटे और मध्यम उद्योगों, होटल और रेस्तरां को एक महीने के लिए वैकल्पिक ईंधनों जैसे कोयला, केरोसिन, बायोमास और RDF पेलेट का उपयोग करने की अनुमति दी गई है।

सरकार ने राज्यों को 48,000 किलोलीटर केरोसिन भी जारी किया है और कुछ औद्योगिक तथा वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को फ्यूल ऑयल के उपयोग की अनुमति दी है।

सरकार की निगरानी

स्थिति की उच्च स्तर पर निगरानी की जा रही है। प्रधानमंत्री Narendra Modi और वरिष्ठ मंत्रियों को नियमित रूप से स्थिति की जानकारी दी जा रही है। साथ ही तेल विपणन कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों की एक समिति गठित की गई है जो वाणिज्यिक एलपीजी आपूर्ति की निगरानी कर रही है।

राज्य सरकारों को भी निर्देश दिया गया है कि वे लाभार्थियों की पहचान करें और सिलेंडरों के वितरण की निगरानी करें ताकि जमाखोरी और काला बाजारी को रोका जा सके।

उद्योगों में बदलाव

एलपीजी की कमी के कारण कई कंपनियों और संस्थानों को अपने संचालन में बदलाव करना पड़ रहा है। HCLTech और Infosys जैसी कंपनियां इंडक्शन कुकिंग, बॉयलर और बायोफ्यूल का उपयोग कर रही हैं। कुछ संस्थानों ने एलपीजी की खपत कम करने के लिए कैंटीन के मेनू भी सीमित कर दिए हैं।

कुछ मामलों में HCLTech ने कर्मचारियों को उन दिनों घर से काम करने की सलाह दी है जब कैंटीन सेवाएं प्रभावित होती हैं।

असंगठित क्षेत्र पर असर

एलपीजी की कमी का सबसे अधिक असर असंगठित क्षेत्र पर पड़ रहा है। फूड डिलीवरी से जुड़े गिग वर्कर्स और सड़क किनारे खाने के ठेले लगाने वाले विक्रेताओं के सामने आर्थिक दबाव बढ़ गया है। कई छोटे विक्रेता काम जारी रखने के लिए सस्ते और कभी-कभी पर्यावरण के लिए हानिकारक ईंधनों का सहारा लेने को मजबूर हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबा खिंचता है तो एलपीजी की उपलब्धता और कीमतों पर दबाव और बढ़ सकता है, जिससे यह भारत के लिए निकट भविष्य की एक बड़ी ऊर्जा चुनौती बन सकता है।