Last Updated on January 4, 2026 11:23 pm by INDIAN AWAAZ

शंकर जालान / कोलकाता

अगले चार-पांच महीने में पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुनाव होना है। अप्रैल-मई में होने वाले चुनाव में तृणमूल कांग्रेस जहां जीत का चौका लगाना चाहती है। वही, भाजपा राज्य में पहली बार सरकार बनाने को आतुर है। इस, बीच कांग्रेस और वाममोर्चा भी अपने खोए जनाधार वापस पाने को इच्छुक नजर आ रहा है। कांग्रेस के इस एलान के बाद की वह अकेले चुनाव लड़ेगी यह साफ हो गया है कि अबकी विधानसभा चुनाव में चौतरफा मुकाबला होगा।

प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष शुभंकर सरकार ने कहा- लोग चाहते हैं कि कांग्रेस अकेले ही चुनाव लड़ें। अभी हमारे पास जो ताकत है, उससे हम अकेले जा सकते हैं। हमने पार्टी हाईकमान को अपनी मंशा से अवगत करवा दिया है।

मालूम हो कि वर्ष 2011 से बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व में ममता बनर्जी की सरकार चल रही है। पिछला यानी 2021 का विधानसभा चुनाव तृणमूल कांग्रेस अकेले लड़ी थी, जबकि कांग्रेस व वाममोर्चा एक साथ चुनाव लड़े थे और दोनों का खाता भी नहीं खुला था। वहीं भाजपा ने 77 सीट जीतकर ऐतिहासिक जीत हासिल की थी

इस बार उम्मीद थी कि कांग्रेस व वाममोर्चा के बीच फिर गठबंधन होगा, लेकिन प्रदेश कांग्रेस ने साफ कर दिया कि वो वाममोर्चा के साथ चुनाव लड़ने की पक्ष में नहीं है। इस लिहाज से बंगाल में चौतरफा मुकाबला होने की आसार दिख रहे हैं। कांग्रेस, वाममोर्चा, भाजपा और तृणमूल कांग्रेस। इन चार पार्टी के अलावा मायावती की बहुजन समाजवादी पार्टी (बीएसपी), हुमायूं कबीर की जनता उन्नयन पार्टी (जेयूपी), असदुद्दीन ओवैसी की आल इंडिया मजलिस ए इत्तेहालदुल मुसलमान (एआईएमआइएम) और पीरजादा कासिम की इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) भी चुनावी दंगल में होंगे। हालांकि मुख्य मुकाबला कांग्रेस, वाममोर्चा, भाजपा और तृणमूल के बीच होता नजर आ रहा है, लेकिन बीएसपी, जेयूपी, एआईएमआइएम और आईएसएफ के उम्मीदवार भले ही जीत न पाएं पर जीत-हार का गणित अवश्य बदल सकते हैं।