Last Updated on January 3, 2026 11:55 am by INDIAN AWAAZ

127 वर्षों के बाद वापस लाए गए अवशेषों की लगेगी प्रदर्शनी


एस एन वर्मा
नई दिल्ली। संस्कृति मंत्रालय राय पिथोरा सांस्कृतिक परिसर में पिपरावा से प्राप्त अवशेषों, अस्थि-कलशों और रत्न अवशेषों की एक ऐतिहासिक प्रदर्शनी का आयोजन कर रहा है। इन अवशेषों को हाल ही में भारत वापस लाया गया है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3 जनवरी को करेंगे।


यह ऐतिहासिक प्रदर्शनी 127 वर्षों के बाद वापस लाए गए भगवान बुद्ध के पिपरावा रत्न अवशेषों को फिर से दुनिया को दिखाने के लिए है। इसके साथ ही 1898 और फिर 1971-1975 में पिपरावा स्थल पर हुई खुदाई से प्राप्त अवशेषों, रत्न अवशेषों और अवशेष पात्रों का भी एक बार फिर संगम हुआ है।


’प्रकाश और कमल प्रबुद्ध व्यक्ति के अवशेष’ शीर्षक वाली यह प्रदर्शनी संस्कृति मंत्रालय के अधीन विभिन्न सांस्कृतिक संस्थानों से सम्बंधित प्राचीन वस्तुओं और कलाकृतियों को विषयगत रूप से प्रदर्शित करती है। ये अवशेष बुद्ध से सम्बंधित सबसे व्यापक संग्रह का प्रतिनिधित्व करते हैं। यह गहन दार्शनिक अर्थ, उत्कृष्ट शिल्प कौशल और वैश्विक आध्यात्मिक महत्व का प्रतीक हैं। प्रदर्शनी में छठी शताब्दी ईसा पूर्व से लेकर वर्तमान तक की 80 से अधिक वस्तुएं शामिल हैं, इनमें मूर्तियां, पांडुलिपियां, थांगका और अनुष्ठानिक वस्तुएं शामिल हैं।


यह अभूतपूर्व आयोजन संस्कृति मंत्रालय द्वारा जुलाई 2025 में सार्वजनिक-निजी साझेदारी के माध्यम से हासिल की गई कलाकृतियों की सफल वापसी की याद में आयोजित किया गया है। इसके चलते सोथबीज़ हांगकांग में नीलामी रोक दी गई थी। 1898 की खुदाई के बाद पहली बार, इस प्रदर्शनी में निम्नलिखित अवशेषों को एक साथ लाया गया है।


कोलकाता स्थित भारतीय संग्रहालय से प्राप्त अवशेष और रत्नजड़ित खजाने पेप्पे परिवार के संग्रह से हाल ही में वापस लाई गई कलाकृतियां वह अखंड पत्थर का संदूक जिसके भीतर मूल रूप से रत्न अवशेष और अस्थि-पात्र पाए गए थे।


पवित्र बुद्ध अवशेषों की खोज विलियम क्लैक्सटन पेप्पे ने 1898 में कपिलवस्तु के प्राचीन स्तूप में की थी। इनकी खोज के बाद, इनके कुछ हिस्से विश्व स्तर पर वितरित किए गए, इनमें से एक हिस्सा सियाम के राजा को भेंट किया गया, दूसरा इंग्लैंड ले जाया गया और तीसरा कोलकाता के भारतीय संग्रहालय में संरक्षित किया गया। 2025 में, पेप्पे परिवार का हिस्सा संस्कृति मंत्रालय के निर्णायक कदम और विश्व भर के बौद्ध समुदायों के समर्थन से स्वदेश वापस लाया गया।


यह प्रदर्शनी बौद्ध धर्म के जन्मस्थान के रूप में देश की भूमिका को रेखांकित करती है और वैश्विक आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक नेता के रूप में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करती है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, वैश्विक भागीदारी में भारत की सभ्यतागत एवं आध्यात्मिक विरासत का अधिक से अधिक उपयोग हो रहा है। 642 प्राचीन वस्तुएं भारत वापस लाई गई हैं। पिपरावा अवशेषों की वापसी एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।