Last Updated on January 2, 2026 7:06 pm by INDIAN AWAAZ

AMN / NEWS DESK
इंदौर। इंदौर में दूषित पानी पीने से हुई मौतों ने मध्य प्रदेश की राजनीति को गरमा दिया है। इस हादसे में अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 100 से अधिक लोग अस्पतालों में भर्ती हैं और कई अन्य बीमार बताए जा रहे हैं। देश के सबसे स्वच्छ शहर के रूप में सम्मानित इंदौर में हुई इस त्रासदी को लेकर भाजपा की वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपनी ही पार्टी की राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है।
उमा भारती ने कहा कि वर्ष 2025 के अंत में गंदा और जहरीला पानी पीने से लोगों की मौत होना पूरे प्रदेश, सरकार और व्यवस्था के लिए शर्मनाक और कलंककारी है। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस शहर को स्वच्छता के लिए पुरस्कार मिले हों, वहां इस स्तर की गंदगी और लापरवाही कैसे स्वीकार की जा सकती है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “जिंदगी की कीमत दो लाख रुपए नहीं होती। मृतकों के परिजन जीवन भर इस दुख के साथ जीते हैं। यह ऐसा पाप है जिसका कोई औचित्य नहीं ठहराया जा सकता। इसका घोर प्रायश्चित होना चाहिए।”
उन्होंने मांग की कि पीड़ित परिवारों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगी जाए और इस मामले में नीचे से लेकर ऊपर तक जो भी दोषी हैं, उन्हें अधिकतम सजा दी जाए। उमा भारती ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह उनके नेतृत्व की परीक्षा की घड़ी है। उन्होंने कहा, “जब आपकी व्यवस्था नहीं चल रही थी, तब आप पद पर रहते हुए बोतलबंद पानी क्यों पीते रहे? जनता के बीच जाकर उनकी तकलीफ क्यों नहीं साझा की?”
इस मुद्दे पर कांग्रेस ने भी सरकार पर तीखा हमला बोला है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि दूषित पानी से 15 लोगों की मौत को केवल प्रशासनिक चूक बताना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता का अहंकार और भ्रष्टाचार इस त्रासदी की असली वजह है। पटवारी ने कहा कि भाजपा सरकार अधिकारियों को आगे कर अपने भ्रष्टाचार को छिपाने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस नेता ने मांग की कि इस मामले में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा लिया जाए, महापौर और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।
इंदौर की यह घटना न केवल प्रशासनिक विफलता को उजागर करती है, बल्कि स्वच्छता के दावों और जमीनी हकीकत के बीच के अंतर को भी सामने लाती है।
