Last Updated on July 9, 2026 12:46 am by INDIAN AWAAZ
सफाई कर्मचारी आंदोलन ने तत्काल कार्रवाई की मांग की

AMN नई दिल्ली
देशभर में वर्ष 2026 के पहले 188 दिनों के दौरान सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान कम से कम 101 सफाई कर्मियों की मौत हुई है। यह दावा सफाई कर्मचारी आंदोलन (एसकेए) द्वारा जारी आंकड़ों में किया गया है। संगठन के अनुसार, हाल ही में मध्य प्रदेश में दो अलग-अलग घटनाओं में तीन सफाई कर्मियों की मौत के बाद यह संख्या 101 तक पहुंच गई है।
संगठन के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-एनसीआर) में अब तक 12 मौतें दर्ज की गई हैं। एसकेए का कहना है कि इस वर्ष मौतों की रफ्तार चिंताजनक है, क्योंकि पूरे वर्ष 2025 में कुल 121 मौतें दर्ज की गई थीं। संगठन के अनुसार, इस वर्ष अब तक 16 राज्यों से सीवर और सेप्टिक टैंक में मौतों के मामले सामने आए हैं, यानी औसतन हर 45 घंटे में एक सफाई कर्मी की जान जा रही है।
एसकेए ने आरोप लगाया कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों और ‘हाथ से मैला ढोने के कार्य का प्रतिषेध एवं उनका पुनर्वास अधिनियम, 2013’ लागू होने के बावजूद इन हादसों पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी है। संगठन का दावा है कि वर्ष 2013 में कानून लागू होने के बाद से अब तक देशभर में ऐसे 1,726 लोगों की मौत दर्ज की गई है। इनमें सबसे अधिक मौतें तमिलनाडु (332), गुजरात (216), दिल्ली-एनसीआर (157), महाराष्ट्र (155), उत्तर प्रदेश (148), हरियाणा (104) और बिहार (91) में हुई हैं।
संगठन ने कहा कि पिछले एक दशक में इस प्रकार की मौतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उसके अनुसार, वर्ष 2016 में 39 मौतें दर्ज हुई थीं, जो 2017 में बढ़कर 137 हो गईं। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है।
एसकेए ने केंद्र सरकार की वर्ष 2023 में शुरू की गई नमस्ते (नेशनल एक्शन फॉर मैकेनाइज्ड सैनिटेशन इकोसिस्टम) योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि सीवर सफाई के पूर्ण मशीनीकरण की दिशा में पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है और कई स्थानों पर अब भी सफाई कर्मियों को बिना पर्याप्त सुरक्षा के सीवरों में उतरना पड़ता है।
संगठन ने केंद्र सरकार से सीवर और सेप्टिक टैंक की सफाई को पूरी तरह मशीनीकृत बनाने, सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने, कानून का प्रभावी क्रियान्वयन करने तथा सफाई कर्मियों की मौतों पर तत्काल रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
