DIGITALA UPI

Last Updated on September 15, 2026 9:36 pm by INDIAN AWAAZ

AMN/ WEB DESK

वित्‍त मंत्रालय ने स्‍पष्‍ट किया है कि व्‍यक्तियों के बीच यूपीआई से कितनी भी राशि के लेन-देन पर कोई शुल्‍क नहीं लगेगा। मंत्रालय ने कहा कि छोटे व्‍यापारियों के लिए शून्‍य एमडीआर रूपरेखा के तहत दो हजार रुपये तक का लेन-देन नि:शुल्‍क रहेगा। इस प्रकार व्‍यक्तियों से व्‍यापारियों को लगभग 96 प्रतिशत लेन-देन अप्रभावित रहेगा। एमडीआर केवल दो हजार रुपये से अधिक के विशिष्‍ट व्‍यापारी लेन-देन पर ही लागू होगा। मंत्रालय ने कहा कि एमडीआर न तो कर है और न सरकार या एनपीसीआई द्वारा वसूला जाने वाला प्रभार है। एनपीसीआई ने कहा है कि संशोधित यूपीआई मर्चेंट डिस्‍काउंट रेट फ्रेमवर्क को चुनिंदा व्‍यापारिक लेन-देन के लिए शुरू किया गया है। यह 15 अक्‍टूबर से लागू होगा।

हमारे संवाददाता ने बताया है कि कुल एमडीआर संग्रह के पांच प्रतिशत अंशदान के साथ छोटे व्‍यापारियों के लिए यूपीआई के इस्‍तेमाल को प्रोत्‍साहन देने के लिए समर्पित निधि बनाई जाएगी।

वित्‍त मंत्रालय ने बैंकों को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी है कि व्‍यवसायी या कारोबारी यह शुल्‍क यूपीआई से भुगतान करने वाले ग्राहकों पर न लगाएं। दो हज़ार रुपये से ज़्यादा के व्‍यक्ति से व्‍यवसायी लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत का मामूली एमडीआर लगेगा, जबकि 75 हज़ार रुपये और उससे अधिक के हाई-वैल्यू ट्रांज़ैक्शन के लिए, एमडीआर की सीमा तीन सौ रुपये प्रति लेनदेन होगी। मंत्रालय ने बताया कि व्‍यक्ति से व्‍यक्ति व्‍यवसायी वर्गीकरण के तहत यूपीआई क्‍यूआर कोड के ज़रिए हर महीने एक लाख रुपये तक पाने वाले छोटे व्‍यवसायी को सभी लेनदेन के लिए ज़रूरी ज़ीरो एमडीआर मिलता रहेगा। इसके अलावा, रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन क्षेत्र, कृषि इनपुट दो हज़ार रुपये से ज़्यादा के प्रत्‍येक लेनदेन पर पाँच रुपये का एक समान एमडीआर देंगे।

यह भी स्‍पष्‍ट किया गया है कि व्‍यक्तियों के लिए नि:शुल्‍क यूपीआई लेन-देन और उसकी मात्रा पर कोई मासिक सीमा नहीं है।

सरकार ने भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 में संशोधन किया है ताकि विशिष्‍ट डिजिटल भुगतान पर कोई शुल्‍क न लगे।