Last Updated on March 11, 2026 12:52 am by INDIAN AWAAZ


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जेनेवा: वैश्विक स्तर पर मानवाधिकारों की दिशा में प्रगति के बावजूद, दुनिया भर में बच्चे अभी भी बेचे जाने, यौन शोषण और दुर्व्यवहार के गंभीर और बदलते खतरों का सामना कर रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र मानवाधिकार विशेषज्ञ मम्मा फातिमा सिंघातेह ने सोमवार को अपनी अंतिम रिपोर्ट में यह गंभीर चेतावनी दी।

उपलब्धियों के बीच गहराता संकट

सिंघातेह ने जेनेवा स्थित मानवाधिकार परिषद को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा कि हालांकि अब इन अपराधों के बीच के अंतर्संबंधों (Interconnectedness) को लेकर दुनिया में समझ बढ़ी है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी मजबूत हुआ है, लेकिन बच्चों के खिलाफ होने वाले दुर्व्यवहार की गंभीरता अभी भी ‘चिंताजनक’ बनी हुई है।

उन्होंने कहा, “बहुत सारे बच्चे अभी भी तस्करी और यौन शोषण का शिकार हो रहे हैं। अक्सर इन अपराधों को छिपाया जाता है या समाज में इन्हें सामान्य मान लिया जाता है।”

शोषण के ‘नए मोर्चे’: तकनीक और जलवायु परिवर्तन

रिपोर्ट में उन नए खतरों की पहचान की गई है जो पारंपरिक सुरक्षा प्रणालियों को चुनौती दे रहे हैं:

  • तकनीकी खतरे: इंटरनेट और डिजिटल प्लेटफॉर्म के प्रसार से ऑनलाइन यौन शोषण के मामले तेजी से बढ़े हैं।
  • जलवायु और संघर्ष: युद्ध और जलवायु से जुड़ी आपदाएं बच्चों को असुरक्षित बना रही हैं, जिससे तस्करों को उन्हें निशाना बनाने का मौका मिल रहा है।
  • औद्योगिक विस्तार: खनन और बड़े उद्योगों के प्रसार वाले क्षेत्रों में भी बच्चों की संवेदनशीलता बढ़ी है।

UN विशेषज्ञ द्वारा सुझाए गए बचाव के रास्ते

मम्मा फातिमा ने इन “नए मोर्चों” (New Frontiers) से लड़ने के लिए रणनीतियों पर पुनर्विचार करने का आह्वान किया है। उन्होंने देशों से निम्नलिखित कदम उठाने की अपील की:

  1. कानूनी ढांचा: शोषण के सभी रूपों को अपराध घोषित करने वाले कानूनों को मजबूत और लागू करना।
  2. डिजिटल सुरक्षा: टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म्स के लिए सख्त नियम और डिजिटल सुरक्षा में निवेश।
  3. सीमा पार सहयोग: बाल तस्करी रोकने के लिए देशों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाना।
  4. निजी क्षेत्र की भागीदारी: तकनीकी कंपनियों को सुरक्षा के काम में सक्रिय भागीदार बनाना।

“शोषण अपरिहार्य नहीं, इसे रोका जा सकता है”

रिपोर्ट के अंत में सिंघातेह ने एक शक्तिशाली संदेश दिया। उन्होंने कहा कि बच्चों की खरीद-फरोख्त या शोषण कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे रोका न जा सके।

उन्होंने स्पष्ट किया, “ये समस्याएं राजनीतिक، आर्थिक और तकनीकी विकल्पों (Choices) का परिणाम हैं। इसलिए हमारे पास यह क्षमता है कि हम बच्चों के अधिकारों की रक्षा करना चुनें और एक ऐसी दुनिया बनाएं जहां हर बच्चा शोषण से मुक्त हो।”


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  • Excerpt (सार): संयुक्त राष्ट्र विशेषज्ञ मम्मा फातिमा सिंघातेह ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में डिजिटल खतरों और जलवायु संकट के बीच बच्चों के बढ़ते शोषण पर गंभीर चिंता जताई है।

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