Last Updated on June 19, 2026 11:57 pm by INDIAN AWAAZ

स्टाफ रिपोर्टर / नई दिल्ली
दल-बदल को लेकर अपनी राजनीतिक लड़ाई तेज करते हुए तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने शुक्रवार को लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष 20 अलग-अलग याचिकाएं दायर कर पार्टी के बागी सांसदों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग की।
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ नेताओं कल्याण बनर्जी, सौगत राय, महुआ मोइत्रा और राज्यसभा सांसद डेरेक ओ’ब्रायन के साथ लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल ने तर्क दिया कि बागी सांसद संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अलग विधायी समूह के रूप में मान्यता पाने की कानूनी शर्तों को पूरा नहीं करते।
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में लोकसभा में टीएमसी के नेता अभिषेक बनर्जी ने कहा कि संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 2(1)(a) के अनुसार किसी भी विधायक या सांसद को अलग समूह बनाने का दावा करने से पहले उस राजनीतिक दल की सदस्यता छोड़नी होती है, जिसके टिकट पर वह निर्वाचित हुआ हो। उन्होंने कहा कि संबंधित 20 सांसदों ने न तो पार्टी से इस्तीफा दिया है और न ही कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया है, इसके बावजूद वे स्वयं को अलग समूह के रूप में पेश कर रहे हैं।
उन्होंने आगे कहा कि दसवीं अनुसूची के पैरा 4 के तहत किसी राजनीतिक दल के विलय की अनुमति तभी दी जाती है, जब संगठनात्मक और विधायी स्तर पर कम से कम दो-तिहाई सदस्य किसी अन्य दल में विलय के पक्ष में निर्णय लें। उनके अनुसार मौजूदा मामले में ऐसी कोई शर्त पूरी नहीं हुई है।
अभिषेक बनर्जी ने यह आरोप भी लगाया कि पार्टी छोड़ने वाले सांसदों को आर्थिक प्रलोभन और दबाव के जरिए अलग होने के लिए प्रेरित किया गया। उन्होंने दावा किया कि पार्टी के पास इन आरोपों का समर्थन करने वाले साक्ष्य मौजूद हैं।
कानूनी प्रक्रिया पर भरोसा जताते हुए उन्होंने कहा कि टीएमसी को उम्मीद है कि लोकसभा अध्यक्ष तीन महीने के भीतर इन अयोग्यता याचिकाओं पर निर्णय लेंगे। उन्होंने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय के उन निर्णयों का हवाला दिया जिनमें ऐसे मामलों के शीघ्र निपटारे पर बल दिया गया है।
