BY Our Business Correspondent

भारतीय शेयर बाजार सोमवार को मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। निवेशकों ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के कंपनियों के वित्तीय नतीजों का आकलन किया, वहीं अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों और मानसून की स्थिति को लेकर भी बाजार में सतर्कता बनी रही। प्रमुख सूचकांक पूरे कारोबारी सत्र के दौरान सीमित दायरे में कारोबार करते रहे और अंत में बेहद मामूली बढ़त दर्ज की।

पिछले सप्ताह शुरू किए गए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) तंत्र को लेकर भी बाजार प्रतिभागियों की निगाहें बनी हुई हैं। इसके लागू होने के बाद हाल के कारोबारी सत्रों में बाजार बंद होने से ठीक पहले उतार-चढ़ाव बढ़ा है। ऐसे में निवेशक अंतिम मिनटों के कारोबार और इस नई व्यवस्था के प्रभाव का भी आकलन कर रहे हैं।

सोमवार को एसएंडपी बीएसई सेंसेक्स 43.27 अंक यानी 0.06 प्रतिशत बढ़कर 78,542.44 अंक पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 में 13.15 अंक यानी 0.05 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई और यह 24,583.80 अंक पर बंद हुआ। निफ्टी 24,550 के महत्वपूर्ण स्तर से ऊपर बंद होने में सफल रहा, लेकिन बेहद सीमित बढ़त ने बाजार में मौजूद सतर्कता को उजागर किया।

निजी बैंकों और उपभोक्ता शेयरों से सहारा

बाजार में चुनिंदा निजी बैंकों, उपभोक्ता क्षेत्र और आभूषण कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली। टाइटन कंपनी का शेयर 3.02 प्रतिशत चढ़ा, जबकि बजाज फाइनेंस 2.24 प्रतिशत और आईसीआईसीआई बैंक 0.76 प्रतिशत मजबूत हुआ। इन शेयरों ने निफ्टी को सहारा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

टाइटन के शेयरों में तेजी कंपनी के मजबूत तिमाही नतीजों के बाद आई। कंपनी का समेकित कर-पश्चात लाभ (PAT) वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 62.9 प्रतिशत बढ़कर 1,777 करोड़ रुपये हो गया। इस दौरान कंपनी की कुल आय 29.3 प्रतिशत बढ़कर 21,502 करोड़ रुपये रही।

हालांकि, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और तेल एवं गैस कंपनियों के कुछ शेयरों में कमजोरी ने बाजार की तेजी को सीमित कर दिया। इस तरह बाजार में व्यापक तेजी के बजाय चुनिंदा शेयरों में खरीदारी का रुझान देखने को मिला।

व्यापक बाजार में बीएसई 150 मिडकैप इंडेक्स 0.17 प्रतिशत बढ़ा, जबकि बीएसई 250 स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.04 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई।

हालांकि बाजार का रुख व्यापक स्तर पर कमजोर रहा। बीएसई पर 2,225 शेयर बढ़कर बंद हुए, जबकि 2,226 शेयरों में गिरावट रही और 207 शेयर अपरिवर्तित रहे।

निकट अवधि में बाजार की अस्थिरता का संकेत देने वाला इंडिया वीआईएक्स 1.41 प्रतिशत बढ़कर 12.33 पर पहुंच गया। इससे संकेत मिलता है कि प्रमुख सूचकांकों में सीमित उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों की सतर्कता बनी हुई है।

कच्चा तेल और रुपये पर दबाव

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जुड़े घटनाक्रमों ने बाजार की धारणा पर दबाव बनाए रखा। वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेजी बनी रही।

अक्टूबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 46 सेंट यानी 0.55 प्रतिशत बढ़कर 84.01 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया।

कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए आयात पर निर्भर है। यदि तेल की कीमतों में तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इससे भारत के आयात बिल, महंगाई, चालू खाते और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा तेल की ऊंची कीमतों से कई आयात-निर्भर कंपनियों की लागत भी बढ़ सकती है।

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया भी थोड़ा कमजोर हुआ। आंशिक रूप से परिवर्तनीय रुपया 95.3050 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर था, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.1750 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

घरेलू बॉन्ड बाजार में हालांकि स्थिरता बनी रही। भारत सरकार के बेंचमार्क 10-वर्षीय बॉन्ड पर प्रतिफल पिछले सत्र के 6.766 प्रतिशत से घटकर 6.764 प्रतिशत रह गया।

सोने की कीमतों में भी बढ़ोतरी रही। एमसीएक्स पर 5 अक्टूबर 2026 को समाप्त होने वाले गोल्ड फ्यूचर्स में 0.38 प्रतिशत की तेजी आई और यह 1,52,400 रुपये पर पहुंच गया।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में यूएस डॉलर इंडेक्स 0.16 प्रतिशत बढ़कर 99.70 हो गया। वहीं अमेरिका के 10-वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड का प्रतिफल 0.02 प्रतिशत घटकर 4.659 प्रतिशत रह गया।

वैश्विक बाजारों में मिला-जुला रुख

वैश्विक बाजारों में सोमवार को मिला-जुला रुख देखने को मिला। यूरोपीय बाजारों के अधिकांश प्रमुख सूचकांक कमजोर रहे। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव तथा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया।

इसके विपरीत, एशियाई बाजारों में अधिकांश सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। अमेरिका में उम्मीद से कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद निकट भविष्य में ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना कम हुई, जिससे एशियाई बाजारों को कुछ समर्थन मिला।

हालांकि, खाड़ी क्षेत्र में शांति वार्ता में किसी ठोस प्रगति के अभाव और तेल आपूर्ति को लेकर चिंता के कारण कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बना रहा।

ईरान ने रविवार को कहा कि ओमान के साथ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से होकर नए शिपिंग मार्ग स्थापित करने को लेकर समझौता अंतिम चरण में है। हालांकि तेहरान ने यह भी दोहराया कि अमेरिका द्वारा अतिरिक्त शर्तें पूरी किए जाने के बाद ही जलमार्ग को फिर से खोला जाएगा। इस स्थिति ने वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता को कायम रखा है।

जापान में भी मौद्रिक नीति को लेकर महत्वपूर्ण संकेत मिले। बैंक ऑफ जापान के नीति-निर्माताओं ने बढ़ती महंगाई के जोखिम को लेकर चिंता जताई। जुलाई की बैठक के विचारों के सारांश से सितंबर में ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी को लेकर बाजार की उम्मीदें मजबूत हुई हैं।

कमजोर अमेरिकी रोजगार आंकड़ों से दरों पर उम्मीद बदली

अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को बढ़त के साथ बंद हुए थे। अमेरिका के ताजा रोजगार आंकड़ों में जुलाई में अप्रत्याशित गिरावट सामने आने के बाद निवेशकों को उम्मीद है कि फेडरल रिजर्व सितंबर में ब्याज दर बढ़ाने से बच सकता है।

शुक्रवार को डॉव जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 151.83 अंक यानी 0.28 प्रतिशत बढ़कर 54,036.93 अंक पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 में 47.68 अंक यानी 0.62 प्रतिशत की बढ़त रही और यह 7,757.64 अंक पर बंद हुआ। वहीं नैस्डैक कंपोजिट 342.26 अंक यानी 1.30 प्रतिशत उछलकर 26,690.62 अंक पर पहुंच गया।

अमेरिकी श्रम विभाग के अनुसार जुलाई में गैर-कृषि पेरोल में 23,000 की कमी आई, जबकि बाजार में लगभग 80,000 नौकरियों की वृद्धि की उम्मीद थी। इससे पहले के दो महीनों के रोजगार आंकड़ों में भी बड़ी कटौती की गई।

हालांकि बेरोजगारी दर जून के 4.2 प्रतिशत से घटकर 4.1 प्रतिशत रही। यह गिरावट आंशिक रूप से श्रमबल भागीदारी में कमी से जुड़ी रही।

कमजोर रोजगार आंकड़ों के बाद अमेरिकी फेडरल रिजर्व की अगली बैठक में ब्याज दर बढ़ने की संभावना को लेकर बाजार की उम्मीदें कम हुईं। सीएमई फेडवॉच टूल के अनुसार अगली बैठक में दर वृद्धि की संभावना करीब 44 प्रतिशत रह गई, जो पिछले सत्र में 55 प्रतिशत और एक सप्ताह पहले 67 प्रतिशत थी।

भारत के शेयर बाजार के लिए अमेरिका में ब्याज दरों को लेकर नरम उम्मीदें वैश्विक पूंजी प्रवाह के लिहाज से सकारात्मक हो सकती हैं। हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और भू-राजनीतिक जोखिम इस सकारात्मक प्रभाव को सीमित कर सकते हैं।

ये शेयर रहे फोकस में

पावर मेक प्रोजेक्ट्स का शेयर 3.26 प्रतिशत गिरा। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 44 प्रतिशत घटकर 79.78 करोड़ रुपये रह गया, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में यह 142.55 करोड़ रुपये था। हालांकि तिमाही में शुद्ध बिक्री सालाना आधार पर 25.53 प्रतिशत बढ़कर 1,623.68 करोड़ रुपये रही।

स्काई गोल्ड एंड डायमंड्स का शेयर 8.42 प्रतिशत उछला। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 136.94 प्रतिशत बढ़कर 103.28 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 43.59 करोड़ रुपये था। परिचालन से राजस्व भी 77.93 प्रतिशत बढ़कर 2,012.79 करोड़ रुपये हो गया।

ऑयल इंडिया में 2.30 प्रतिशत की तेजी रही। कंपनी का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 252.83 प्रतिशत बढ़कर 2,870.21 करोड़ रुपये पहुंच गया। परिचालन से राजस्व 58.77 प्रतिशत बढ़कर 7,958.05 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के प्रदर्शन को अधिक कच्चे तेल उत्पादन और बेहतर कीमत प्राप्ति से समर्थन मिला।

केन्स टेक्नोलॉजी इंडिया का शेयर 3.14 प्रतिशत कमजोर हुआ। कंपनी का परिचालन से राजस्व सालाना आधार पर 40.47 प्रतिशत बढ़कर 946.02 करोड़ रुपये हुआ, लेकिन समेकित शुद्ध लाभ 24.37 प्रतिशत घटकर 56.43 करोड़ रुपये रह गया।

टाइटन कंपनी का शेयर 3.02 प्रतिशत चढ़ा। कंपनी के समेकित PAT में 62.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह 1,777 करोड़ रुपये रहा। कुल आय 29.3 प्रतिशत बढ़कर 21,502 करोड़ रुपये पहुंच गई।

आरती फार्मालैब्स का शेयर 20 प्रतिशत के ऊपरी सर्किट पर पहुंच गया। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 65.4 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 24.6 प्रतिशत बढ़कर 76.14 करोड़ रुपये हो गया। परिचालन से राजस्व सालाना आधार पर 38.7 प्रतिशत बढ़कर 535.80 करोड़ रुपये रहा।

यूनिवर्सल केबल्स भी 20 प्रतिशत के ऊपरी सर्किट पर पहुंच गया। कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ 108.8 प्रतिशत बढ़कर 70.14 करोड़ रुपये हो गया। राजस्व 57.5 प्रतिशत बढ़कर 945.06 करोड़ रुपये रहा, जो कंपनी का अब तक का सबसे अधिक पहली तिमाही का कारोबार रहा।

डेल्हीवरी में 1.07 प्रतिशत की तेजी रही। हालांकि कंपनी का समेकित शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 64.95 प्रतिशत घटकर 32 करोड़ रुपये रह गया। ईकॉम इंटीग्रेशन लागत को शामिल करने से पहले समायोजित PAT 62 करोड़ रुपये रहा। सेवाओं से राजस्व 27.8 प्रतिशत बढ़कर 2,931 करोड़ रुपये हो गया।

साल्जर इलेक्ट्रॉनिक्स का शेयर 5.58 प्रतिशत गिरा। कंपनी का समायोजित समेकित शुद्ध लाभ 53.47 प्रतिशत घटकर 8.04 करोड़ रुपये रह गया। हालांकि परिचालन से राजस्व 12.9 प्रतिशत बढ़कर 498.02 करोड़ रुपये रहा। कंपनी के अनुसार औद्योगिक स्विचगियर, तार, केबल और बिल्डिंग प्रोडक्ट्स कारोबार में मांग बढ़ने से राजस्व को समर्थन मिला।

आईपीओ बाजार में भी सक्रियता

प्राथमिक बाजार में भी सोमवार को गतिविधियां तेज रहीं। कई कंपनियों के सार्वजनिक निर्गम निवेशकों के लिए खुले रहे।

टेक्नोक्राफ्ट वेंचर्स के आईपीओ को 10 अगस्त को शाम 5 बजे तक 83,17,190 शेयरों के मुकाबले 3,93,45,600 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इस तरह इश्यू 4.73 गुना सब्सक्राइब हुआ। आईपीओ 7 अगस्त को खुला था और 11 अगस्त को बंद होगा। शेयर का मूल्य दायरा 200 से 212 रुपये प्रति शेयर है और न्यूनतम बोली 70 शेयरों की है।

धूत ट्रांसमिशन के आईपीओ को 10 अगस्त को शाम 5 बजे तक 2,49,56,363 शेयरों के मुकाबले 1,56,51,645 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं। इस तरह इश्यू 0.63 गुना सब्सक्राइब हुआ। आईपीओ 10 अगस्त को खुला और 12 अगस्त को बंद होगा। इसका मूल्य दायरा 829 से 871 रुपये प्रति शेयर है। न्यूनतम बोली 17 शेयरों की है।

मोलबायो डायग्नोस्टिक्स को 81,58,529 शेयरों के मुकाबले 67,67,496 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं और इश्यू 0.83 गुना सब्सक्राइब हुआ। आईपीओ 10 अगस्त को खुला और 12 अगस्त को बंद होगा। इसका मूल्य दायरा 768 से 807 रुपये प्रति शेयर है और न्यूनतम बोली 18 शेयरों की है।

लीप इंडिया के आईपीओ को 11,49,91,735 शेयरों के मुकाबले 5,62,11,154 शेयरों के लिए बोलियां मिलीं, जिससे इश्यू 0.49 गुना सब्सक्राइब हुआ। यह आईपीओ 7 अगस्त को खुला था और 11 अगस्त को बंद होगा। इसका मूल्य दायरा 151 से 159 रुपये प्रति शेयर है और न्यूनतम बोली 94 शेयरों की है।

बाजार की आगे की दिशा

आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार की दिशा मुख्य रूप से कंपनियों के तिमाही नतीजों, प्रबंधन के भविष्य के अनुमान, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और वैश्विक ब्याज दरों की संभावनाओं से तय होने की उम्मीद है।

घरेलू स्तर पर कंपनियों के मजबूत नतीजे बाजार को सहारा दे सकते हैं, लेकिन अमेरिका-ईरान तनाव और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जुड़े घटनाक्रम बाजार के लिए प्रमुख जोखिम बने हुए हैं। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार तेजी भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ा सकती है, जबकि रुपये की कमजोरी भी निवेशकों की चिंता बढ़ा सकती है।

सोमवार का कारोबार इस बात का संकेत रहा कि घरेलू शेयर बाजार फिलहाल बाहरी जोखिमों के बावजूद मजबूती बनाए हुए है, लेकिन निवेशक आक्रामक दांव लगाने से बच रहे हैं। निफ्टी का 24,550 के ऊपर बंद होना सकारात्मक संकेत है, लेकिन बाजार की बेहद सीमित बढ़त और लगभग संतुलित से कमजोर बाजार चौड़ाई बताती है कि व्यापक स्तर पर खरीदारी का विश्वास अभी मजबूत नहीं हुआ है।

आने वाले सत्रों में कच्चे तेल की दिशा, पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, अमेरिकी फेड की ब्याज दर नीति और शेष कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक होंगे।