Last Updated on August 21, 2025 9:54 pm by INDIAN AWAAZ

BIZ DESK

भारतीय शेयर बाज़ारों में गुरुवार को दिनभर सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव के बाद प्रमुख सूचकांक हल्की बढ़त के साथ बंद हुए। निवेशकों की नज़र वैश्विक संकेतों और घरेलू कारकों पर टिकी रही, जिसके चलते कारोबार में सतर्क रुख दिखाई दिया।

बीएसई सेंसेक्स 143 अंकों की बढ़त (0.17%) के साथ 82,001 पर बंद हुआ। इसी तरह, एनएसई निफ्टी 50 33 अंक (0.13%) मज़बूत होकर 25,084 पर ठहरा। हालांकि, मिडकैप सूचकांक में 0.1% से अधिक की गिरावट दर्ज हुई और स्मॉलकैप सूचकांक बिना किसी बदलाव के सपाट बंद हुआ।

सेंसेक्स शेयरों का हाल

30 में से 16 कंपनियों के शेयर लाल निशान में बंद हुए। प्रमुख गिरावट वाले शेयरों में पावर ग्रिड और एटर्नल लगभग 1.5% टूटे, जबकि हिंदुस्तान यूनिलीवर में 1% से अधिक की कमजोरी आई। दूसरी ओर, बजाज फिनसर्व 1.1% चढ़ा, आईसीआईसीआई बैंक में लगभग 1.1% की तेजी दर्ज हुई और बजाज फाइनेंस 0.9% मज़बूत हुआ।

सेक्टोरल प्रदर्शन

बीएसई के 21 सेक्टोरल सूचकांकों में से 11 हरे निशान में बंद हुए। हेल्थकेयर 0.6%, रियल्टी 0.4%, और इंडस्ट्रियल्स 0.2% बढ़त के साथ शीर्ष लाभार्थी रहे। वहीं, पावर सेक्टर 0.9%, यूटिलिटीज 0.6% और सर्विसेज 0.5% तक गिरे।

बाज़ार का रूझान

कुल मिलाकर बीएसई में बाज़ार की चौड़ाई हल्की सकारात्मक रही। 2,094 शेयरों में बढ़त, 2,000 शेयरों में गिरावट, जबकि 154 शेयर बिना बदलाव के बंद हुए। विश्लेषकों के अनुसार, यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुख फिलहाल सतर्क है और वे बड़े निर्णय लेने से पहले नए संकेतों का इंतज़ार कर रहे हैं।

वैश्विक और घरेलू संकेत

वैश्विक स्तर पर एशियाई बाज़ारों में मिला-जुला कारोबार रहा। अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की ब्याज़ दरों को लेकर संकेतों और कच्चे तेल की ऊँची कीमतों ने निवेशकों को चिंतित किया। घरेलू स्तर पर ध्यान अब सितंबर की शुरुआत में होने वाली आरबीआई की मौद्रिक नीति बैठक, प्रमुख कंपनियों के तिमाही नतीजों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की गतिविधियों पर केंद्रित है।

हाल के दिनों में एफआईआई ने बिकवाली का रुख अपनाया है, जिससे अस्थिरता बढ़ी है। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और खुदरा निवेशकों की मज़बूत भागीदारी ने बाज़ार को गिरावट से संभाले रखा। एक मुंबई-आधारित फंड मैनेजर ने कहा, “बाज़ार फिलहाल रिकॉर्ड स्तरों के पास समेकन की स्थिति में है। निवेशक नतीजों और नीतिगत टिप्पणियों के साथ-साथ वैश्विक संकेतों से नए ट्रिगर्स का इंतज़ार कर रहे हैं।”

आगे की राह

विशेषज्ञों का मानना है कि निकट भविष्य में अस्थिरता बनी रह सकती है क्योंकि फेड की नीतियाँ, मुद्रा में उतार-चढ़ाव और कमोडिटी कीमतें निवेश धारणा पर असर डालेंगी। हालांकि, भारत की मज़बूत मैक्रो-इकोनॉमिक स्थिति और कंपनियों के लगातार बेहतर नतीजे मध्यम और लंबी अवधि में इक्विटी बाज़ार को सहारा देते रहेंगे।