दान में कथित करोड़ों रुपये की हेराफेरी की जांच के बीच SIT ने आठ लोगों को गिरफ्तार किया। कार्रवाई के अगले ही दिन राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने पद छोड़ दिय. दोनों के इस्तीफों के बाद एसआईटी की जांच और तेज होने की संभावना है। जांच एजेंसियां दान प्रबंधन से जुड़े दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। वहीं गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को 29 जून तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। 

NEWS DESK

 राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के मामले ने अब बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक मोड़ ले लिया है। उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम (SIT) द्वारा आठ लोगों की गिरफ्तारी के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। ट्रस्ट के एक अन्य सदस्य अनिल मिश्रा ने भी पद छोड़ दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों में चंपत राय के ड्राइवर और करीबी सहयोगी रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू भी शामिल हैं। इसी के बाद ट्रस्ट के शीर्ष स्तर पर यह बड़ा फैसला सामने आया। एसआईटी की जांच मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान की कथित चोरी और गबन के आरोपों से जुड़ी है। इसी महीने गठित जांच टीम ने गुरुवार को इस मामले में एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद लगातार कार्रवाई करते हुए आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया।

गिरफ्तार आरोपियों में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, रामाशंकर मिश्रा, मनीष यादव, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव और करुणेश पांडेय के नाम भी शामिल हैं। आज शुक्रवार को सभी 8 आरोपियों का मेडिकल कराने के बाद इन्हें कोर्ट में पेश किया गया। सीजेएम कोर्ट ने सभी आरोपियों को 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है। हालांकि पुलिस ने अभी तक कथित घोटाले की रकम का आधिकारिक खुलासा नहीं किया है, लेकिन आरोप है कि मंदिर के चढ़ावे से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की गई। सभी आरोपियों से कुल 79 लाख 85 हजार 493 रुपए बरामद किए गए हैं।

मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट ने शुरुआती दौर में इन आरोपों को खारिज करते हुए इसे राम मंदिर की छवि धूमिल करने और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचाने की साजिश बताया था। लेकिन एसआईटी (SIT) की कार्रवाई और गिरफ्तारियों के बाद मामला और गंभीर हो गया है।

राम मंदिर की धार्मिक और राजनीतिक अहमियत को देखते हुए यह मामला अब उत्तर प्रदेश की राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बन गया है। अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले विपक्ष ने इस मामले को लेकर भाजपा सरकार पर हमला तेज कर दिया है। समाजवादी पार्टी ने दावा किया कि उसकी ओर से पहले लगाए गए आरोप अब सही साबित हो रहे हैं। पार्टी प्रवक्ता मोहम्मद आजम ने कहा कि राम मंदिर में चोरी की बात अब सरकारी जांच में सामने आ चुकी है और यह राम भक्तों की जीत है।

चढ़ावा चोरों की गिरफ्तारी और चंपत राय व अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, ”भाजपा का लंका कांड अयोध्या में ही होगा। आखिर ‘दानभक्तों’ का मुखौटा उतर ही गया क्योंकि प्रभु की अलौकिक शक्ति ने अपना चमत्कार दिखा ही दिया। अब भाजपाइयों के अहंकार की चमचमाती लंका के साम्राज्य का भी अंत होगा और लंकाधिपति का भी। भाजपा के लिए अमृतकाल काल बनकर आया है।”

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष से इस मामले का राजनीतिकरण न करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सरकार पहले दिन से ही ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है और दोषी कोई भी हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा। सीएम योगी ने कहा कि यदि किसी के पास कोई सबूत है तो उसे एसआईटी के सामने पेश किया जाए, ताकि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि राम भक्तों की आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा।

कौन हैं चंपत राय?

80 वर्षीय चंपत राय उत्तर प्रदेश के बिजनौर के रहने वाले हैं। सार्वजनिक जीवन में आने से पहले वह रसायन विज्ञान के प्राध्यापक रहे। कम उम्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े और वर्ष 1980 में विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) का हिस्सा बने। राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरों में उनकी गिनती होती रही है। आपातकाल के दौरान वह 18 महीने तक जेल में भी रहे। वर्ष 2020 में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद उन्हें महासचिव बनाया गया था। मंदिर निर्माण, प्रशासन और दान प्रबंधन की जिम्मेदारी उनके पास थी।

अनिल मिश्रा की क्या थी भूमिका?
अनिल मिश्रा श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी थे। वह अयोध्या के सामाजिक और प्रशासनिक कार्यों से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। ट्रस्ट में उनकी भूमिका मंदिर के प्रशासनिक कार्यों, चढ़ावे और दान व्यवस्था की निगरानी से जुड़ी थी। स्थानीय स्तर पर उनकी मजबूत पकड़ के चलते उन्हें ट्रस्ट में शामिल किया गया था।