Last Updated on October 11, 2026 2:26 pm by INDIAN AWAAZ

अरुण श्रीवास्तव

नई दिल्ली। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी-शाह की जोड़ी के भीतर “तानाशाही की चरम सीमा” तक पहुंच चुकी मानसिकता दिखाई दे रही है। ठाकरे ने सरकार की लोकतांत्रिक प्रतिबद्धता और नागरिकों के विरोध करने के अधिकार पर भी सवाल उठाए।

शनिवार को सोशल मीडिया पर जारी एक पोस्ट में राज ठाकरे ने संविधान निर्माता डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के उस कथन का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि कोई भी राष्ट्र अपनी स्वतंत्रता की कीमत पर कृतज्ञ नहीं हो सकता। ठाकरे ने आरोप लगाया कि सत्ता हासिल करने और उसे बनाए रखने के लिए देश की संस्थाओं पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने सवाल किया, “क्या अब इस देश में प्रदर्शन नहीं होने चाहिए? क्या सरकार से सवाल नहीं पूछे जाने चाहिए? विरोध करने का अधिकार छीनने वाले आप कौन होते हैं?”

राज ठाकरे की यह प्रतिक्रिया दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकroach जनता पार्टी (सीजेपी) द्वारा प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस कार्रवाई के बाद आई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर यह प्रदर्शन बुलाया गया था। इस दौरान पूर्व केरल मुख्यमंत्री पिनराई विजयन सहित सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया गया।

ठाकरे ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस का इस्तेमाल प्रदर्शनकारियों को रोकने और प्रदर्शन की कवरेज कर रहीं महिला पत्रकारों को परेशान करने के लिए किया गया। उन्होंने मेट्रो सेवाओं को बंद करने, सड़कों पर अवरोध लगाने, इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी लगाने और विमान से दिल्ली पहुंचने वाले प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने संबंधी कार्रवाई की भी आलोचना की।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल

मनसे प्रमुख ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह एक स्वतंत्र संस्था है। यदि मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यकाल में चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं, तो क्या उन्हें इस्तीफा नहीं देना चाहिए? उन्होंने कहा कि मतदाताओं को अपने वोट की निष्पक्षता और उसके इस्तेमाल को लेकर सवाल पूछने का अधिकार है।

ठाकरे ने आरोप लगाया कि भाजपा नेतृत्व का विरोध प्रदर्शनों को लेकर दोहरा रवैया रहा है। उनके अनुसार, सत्ता से बाहर रहने पर भाजपा आंदोलन का समर्थन करती थी, जबकि सत्ता में आने के बाद सरकार के खिलाफ उठने वाली आवाजों को दबाने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करने की अपील करते हुए सरकार को महात्मा गांधी और भारतीय इतिहास से सबक लेने की सलाह दी। ठाकरे ने चेतावनी दी कि लोकतांत्रिक अधिकारों को कुचलने की कोशिश का जनता विरोध कर सकती है।

राज ठाकरे के बयान से दिल्ली में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई, चुनावी पारदर्शिता और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को लेकर केंद्र सरकार पर विपक्ष का दबाव और बढ़ गया है।