हमारे व्यापार संवाददाता | 24 अप्रैल, 2026

भारतीय शेयर बाजार के लिए पिछला सप्ताह किसी दुःस्वप्न से कम नहीं रहा। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भारत के विकास अनुमानों में कटौती के ‘दोहरे झटके’ ने निवेशकों के भरोसे को हिलाकर रख दिया। पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड $105 प्रति बैरल के पार निकल गया, जिससे बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स और निफ्टी ने इस साल की अपनी सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की।


बाजार का लेखा-जोखा: गिरावट के आंकड़े

सप्ताह की शुरुआत बढ़त के साथ हुई थी, लेकिन बुधवार से शुरू हुआ बिकवाली का दौर शुक्रवार तक जारी रहा। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की लगातार निकासी ने दबाव को और बढ़ा दिया।

इंडेक्ससमापन स्तरसाप्ताहिक बदलाव (अंक)प्रतिशत बदलाव
S&P BSE सेंसेक्स76,664.21-1,829.33-2.33%
निफ्टी 5023,897.95-455.60-1.87%
BSE 150 मिड-कैप16,036.82-0.58%
BSE 250 स्मॉल-कैप6,532.53-0.21%

साप्ताहिक हलचल: सोमवार और मंगलवार को बाजार में हरियाली रही और सेंसेक्स 79,200 के स्तर को पार कर गया था। हालांकि, सप्ताह के अंतिम तीन दिनों में बाजार ने अपनी पूरी बढ़त गंवा दी और भारी गिरावट के साथ बंद हुआ।


अर्थव्यवस्था: विकास की चिंता और तेल का दबाव

बाजार में गिरावट की मुख्य वजह रेटिंग एजेंसी मूडीज (Moody’s) की रिपोर्ट रही, जिसने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत का जीडीपी अनुमान 6.8% से घटाकर 6% कर दिया। इसके पीछे निम्नलिखित कारण बताए गए:

  • ऊर्जा सुरक्षा: पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कच्चे तेल और उर्वरक आयात पर संकट।
  • घरेलू मांग में कमी: औद्योगिक उत्पादन और खपत के आंकड़ों में सुस्ती के संकेत।
  • राजकोषीय घाटा: आयात बिल बढ़ने से सरकारी खजाने पर दबाव की आशंका।

इसके अतिरिक्त, मार्च 2026 में आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों (Core Sector) के उत्पादन में 0.4% की गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी।

सरकार की सफाई: चुनाव के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में ₹25-28 की बढ़ोतरी की खबरों को पेट्रोलियम मंत्रालय ने “भ्रामक” करार दिया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि कीमतों में वृद्धि का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।


शेयरों का हाल: IT सेक्टर में ‘सुनामी’, बैंकिंग भी सुस्त

चौथी तिमाही (Q4 FY26) के नतीजों का असर भी चुनिंदा शेयरों पर साफ दिखा।

टॉप लूजर्स (गिरावट वाले शेयर)

  • IT सेक्टर पस्त: HCL टेक में 16.61% की भारी गिरावट आई। इसके अलावा इंफोसिस (-12.44%) और परसिस्टेंट सिस्टम्स (-12.77%) के शेयर भी धड़ाम हो गए। मार्जिन पर दबाव और कमजोर गाइडेंस ने इस सेक्टर को सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया।
  • बैंकिंग दिग्गज: HDFC बैंक (-1.80%) और ICICI बैंक (-1.70%) मुनाफे में बढ़त के बावजूद बिकवाली के दबाव से नहीं बच सके।

टॉप गेनर्स (बढ़त वाले शेयर)

  • नेस्ले इंडिया: शुद्ध लाभ में 25.8% की शानदार वृद्धि के बाद शेयर 10.37% उछला।
  • BHEL: कंपनी का ऑर्डर बुक ₹2.4 लाख करोड़ पहुंचने की खबर से शेयर 6.40% चढ़ा।
  • सरकारी बैंक: बैंक ऑफ महाराष्ट्र ने शानदार तिमाही नतीजों के दम पर 7.75% की रैली की।
  • हिमाद्री स्पेशियलिटी: मुनाफे में 29% की बढ़त के बाद शेयर 14.36% भागा।

वैश्विक संकेत: महंगाई का डर बरकरार

अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी स्थिति तनावपूर्ण है। ब्रिटेन में महंगाई दर बढ़कर 3.3% हो गई है, जबकि जर्मनी में ऊर्जा की कीमतों के कारण प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) में तेज उछाल आया है। हालांकि, जापान और दक्षिण कोरिया की अर्थव्यवस्थाओं से बेहतर आंकड़े आए हैं, लेकिन पश्चिम एशिया का संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था पर काले बादल की तरह मंडरा रहा है।

बाजार की दिशा: आने वाले सप्ताह में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की चाल और वैश्विक भू-राजनीतिक गतिविधियों पर रहेगी। फिलहाल बाजार में ‘सावधानी’ बरतने की सलाह दी जा रही है।