निफ्टी 22,450 के नीचे बंद; मैन्युफैक्चरिंग डेटा मजबूत, लेकिन वैश्विक चिंताओं ने निवेशकों का भरोसा तोड़ा

हमारे बिजनेस संवाददाता से

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को लगातार चौथे कारोबारी सत्र में गिरावट दर्ज की गई। विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की लगातार बिकवाली, रुपये में कमजोरी, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों तथा वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल ने निवेशकों के मनोबल पर नकारात्मक असर डाला। घरेलू स्तर पर विनिर्माण क्षेत्र के मजबूत आंकड़ों के बावजूद बाजार पर वैश्विक जोखिमों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं का दबाव हावी रहा।

कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स 570.59 अंक यानी 0.79 प्रतिशत गिरकर 71,909.70 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी-50 सूचकांक 198.50 अंक यानी 0.88 प्रतिशत फिसलकर 22,421.95 पर आ गया। इस गिरावट के साथ निफ्टी महत्वपूर्ण 22,450 के स्तर से नीचे बंद हुआ।

बीते चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स में कुल 2.69 प्रतिशत और निफ्टी में 3.11 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है, जो बाजार में बढ़ती सतर्कता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाती है।

व्यापक बिकवाली से दबाव में रहा बाजार

सत्र की शुरुआत से ही बाजार में कमजोरी देखने को मिली। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और मजबूत डॉलर के कारण निवेशकों ने जोखिम वाले निवेशों से दूरी बनाई। इसके परिणामस्वरूप अधिकांश सेक्टरों में दबाव देखने को मिला।

निफ्टी पर सबसे अधिक दबाव बजाज ऑटो के शेयरों से आया, जो 7.62 प्रतिशत टूट गया। इसके अलावा महिंद्रा एंड महिंद्रा में 3.05 प्रतिशत तथा रिलायंस इंडस्ट्रीज में 1.63 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।

ऑटोमोबाइल और मेटल शेयरों में सबसे ज्यादा कमजोरी देखने को मिली, जबकि आईटी शेयरों ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन कर बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की।

मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी तेज गिरावट

बाजार की कमजोरी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही। व्यापक बाजार में बिकवाली का दबाव और अधिक दिखाई दिया।

बीएसई मिडकैप इंडेक्स 0.99 प्रतिशत और स्मॉलकैप इंडेक्स 1.23 प्रतिशत नीचे बंद हुए। इससे स्पष्ट है कि निवेशक जोखिम वाले शेयरों में अपनी हिस्सेदारी घटाने के मूड में रहे।

बाजार की चौड़ाई (मार्केट ब्रेड्थ) भी बेहद कमजोर रही। बीएसई पर 1,226 शेयरों में बढ़त दर्ज हुई जबकि 3,204 शेयरों में गिरावट आई। 228 शेयर बिना किसी बदलाव के बंद हुए।

विश्लेषकों का मानना है कि लंबी छुट्टी से पहले भी निवेशकों ने मुनाफावसूली और जोखिम कम करने का रास्ता चुना। भारतीय शेयर बाजार 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती के अवसर पर बंद रहेगा।

मजबूत विनिर्माण आंकड़ों ने दिखाई अर्थव्यवस्था की मजबूती

शेयर बाजार में भले ही दबाव देखने को मिला हो, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर एक सकारात्मक संकेत सामने आया।

एचएसबीसी इंडिया मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई सितंबर में बढ़कर 55.1 पर पहुंच गया, जो अगस्त में 52.8 था। यह पिछले सात महीनों में विनिर्माण क्षेत्र में सबसे तेज सुधार का संकेत है।

रिपोर्ट के अनुसार नए ऑर्डर, उत्पादन और रोजगार सृजन में वृद्धि देखने को मिली। उद्योगों ने भविष्य की मांग को देखते हुए कच्चे माल का भंडारण भी बढ़ाया।

यह आंकड़ा दर्शाता है कि घरेलू मांग और औद्योगिक गतिविधियां मजबूत बनी हुई हैं। हालांकि बाजार सहभागियों ने इस सकारात्मक संकेत की तुलना में वैश्विक जोखिमों को अधिक महत्व दिया।

100 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड

वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी निवेशकों की चिंता का बड़ा कारण बनी हुई है।

दिसंबर 2026 डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड 2.09 प्रतिशत बढ़कर 100.08 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। 100 डॉलर का स्तर पार करना ऊर्जा आयातक देशों के लिए चिंता का विषय माना जाता है।

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इसलिए कच्चे तेल की ऊंची कीमतें महंगाई, व्यापार घाटे और कॉरपोरेट मार्जिन पर दबाव बढ़ा सकती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच जारी अनिश्चितता ने तेल आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं, जिससे कीमतों में तेजी बनी हुई है।

रुपये में कमजोरी, बॉन्ड यील्ड में उछाल

विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर मुद्रा बाजार पर भी देखने को मिला।

रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 96.2350 के स्तर के आसपास पहुंच गया, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में यह 95.9450 पर बंद हुआ था।

रुपये की कमजोरी विदेशी पूंजी निकासी और डॉलर की मजबूती का संकेत देती है। इससे आयात लागत बढ़ने का जोखिम भी बढ़ जाता है।

दूसरी ओर, भारत के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़कर 7.206 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो पिछले सत्र में 7.184 प्रतिशत थी।

उच्च बॉन्ड यील्ड आम तौर पर शेयर बाजार के लिए नकारात्मक मानी जाती है, क्योंकि इससे निवेशकों को निश्चित आय वाले साधनों में बेहतर रिटर्न मिलने लगता है।

सोने में तेजी, डॉलर मजबूत

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच निवेशकों का झुकाव सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर भी बढ़ा।

एमसीएक्स गोल्ड फ्यूचर्स 0.57 प्रतिशत बढ़कर 1,46,950 रुपये पर पहुंच गया।

साथ ही यूएस डॉलर इंडेक्स (डीएक्सवाई) में 0.34 प्रतिशत की बढ़त दर्ज हुई और यह 101.82 पर पहुंच गया। मजबूत डॉलर आम तौर पर उभरते बाजारों की मुद्राओं और पूंजी प्रवाह पर दबाव बढ़ाता है।

वैश्विक बाजारों से मिले मिश्रित संकेत

यूरोपीय बाजारों में चौथी तिमाही की शुरुआत कमजोर रही। बढ़ती ऊर्जा कीमतें, सरकारी बॉन्ड यील्ड में उछाल और अमेरिका-ईरान वार्ता को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता को प्रभावित किया।

एशियाई बाजारों में हालांकि अधिकांश सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। अमेरिकी चिप निर्माता माइक्रोन टेक्नोलॉजी के मजबूत नतीजों से तकनीकी शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।

जापान का निक्केई सूचकांक कारोबारी विश्वास के आठ साल के उच्च स्तर पर पहुंचने से मजबूत रहा, हालांकि वहां भी बढ़ती बॉन्ड यील्ड ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा।

अमेरिकी बाजारों में बुधवार को मिला-जुला रुख देखा गया। डाउ जोंस में गिरावट रही, जबकि नैस्डैक को तकनीकी शेयरों से समर्थन मिला।

नए सूचीबद्ध शेयरों में उत्साह

कमजोर बाजार के बावजूद कुछ नए सूचीबद्ध शेयरों ने निवेशकों को आकर्षित किया।

मनीव्यू का शेयर बीएसई पर 54.03 रुपये पर बंद हुआ, जो इसके 34 रुपये के निर्गम मूल्य से लगभग 59 प्रतिशत प्रीमियम पर था। दिन के कारोबार में यह 62 रुपये तक पहुंचा।

दूसरी ओर ए-वन स्टील्स का शेयर 417 रुपये पर बंद हुआ, जो इसके इश्यू प्राइस 405 रुपये से करीब 3 प्रतिशत ऊपर था।

सुर्खियों में रहे ये शेयर

स्टरलाइट टेक्नोलॉजीज में 5 प्रतिशत का अपर सर्किट लगा। कंपनी को उसकी सहायक इकाई के माध्यम से एक अंतरराष्ट्रीय हाइपरस्केल ग्राहक से दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंध मिला है, जिसकी संभावित कीमत लगभग 1.2 अरब डॉलर आंकी गई है।

कोटक महिंद्रा बैंक के शेयरों में बढ़त रही। भारतीय रिजर्व बैंक ने अनूप कुमार साहा को 1 जनवरी 2027 से तीन वर्ष के लिए बैंक का प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी नियुक्त करने को मंजूरी दी है।

हाईवे इंफ्रास्ट्रक्चर को उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीईडा) तथा एनएचएआई से टोल संचालन से जुड़े नए अनुबंध मिले, जिसके बाद शेयर में 5 प्रतिशत से अधिक की तेजी दर्ज हुई।

हालांकि महिंद्रा एंड महिंद्रा, ह्युंडई मोटर इंडिया, एस्कॉर्ट्स कुबोटा और स्टील स्ट्रिप्स व्हील्स जैसी कंपनियों ने बिक्री और कारोबार से जुड़े बेहतर आंकड़े जारी किए, फिर भी बाजार की समग्र कमजोरी के कारण इन शेयरों पर दबाव बना रहा।

आईपीओ बाजार में सुस्ती

प्राथमिक बाजार में निवेशकों की प्रतिक्रिया अपेक्षाकृत कमजोर रही।

नित्यास जेम्स एंड ज्वेलरी आईपीओ को जारी शेयरों के मुकाबले केवल 0.55 गुना आवेदन प्राप्त हुए, जबकि विशाल निर्माणी आईपीओ को 0.54 गुना सब्सक्रिप्शन मिला।

दोनों निर्गम 5 अक्टूबर तक निवेश के लिए खुले रहेंगे।

आगे की राह

विश्लेषकों का मानना है कि निकट भविष्य में बाजार की दिशा पर वैश्विक कारकों का प्रभाव बना रहेगा। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली, रुपये की कमजोरी और बढ़ती बॉन्ड यील्ड निवेशकों की चिंता बढ़ा रही हैं।

हालांकि भारत की मजबूत विनिर्माण गतिविधियां और घरेलू मांग अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत देती हैं, लेकिन फिलहाल वैश्विक अनिश्चितताएं निवेशकों को सतर्क बनाए हुए हैं। गांधी जयंती के अवकाश के बाद बाजार की नजर विदेशी पूंजी प्रवाह, तेल कीमतों तथा अमेरिकी रोजगार आंकड़ों पर रहेगी, जो आने वाले दिनों की दिशा तय कर सकते हैं।