Last Updated on October 26, 2026 9:00 pm by INDIAN AWAAZ

निफ्टी 22,750 के पार बंद; बैंकिंग, धातु और स्वास्थ्य सेवा कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से बाजार को सहारा

हमारे बिजनेस संवाददाता

भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को चार कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट का सिलसिला थम गया। निचले स्तरों पर चुनिंदा शेयरों में खरीदारी, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी और वैश्विक बाजारों से मिले सकारात्मक संकेतों ने निवेशकों का मनोबल बढ़ाया। शुरुआती कमजोरी के बावजूद बाजार ने दिन के दौरान अच्छी रिकवरी की और निफ्टी 50 फिर से 22,750 के स्तर के ऊपर बंद होने में सफल रहा।

बीएसई का सेंसेक्स 482.92 अंक यानी 0.66 प्रतिशत बढ़कर 73,606.75 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 सूचकांक 153.20 अंक यानी 0.68 प्रतिशत की बढ़त के साथ 22,753.20 पर पहुंच गया।

इससे पहले लगातार चार कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स 3.49 प्रतिशत और निफ्टी 2.36 प्रतिशत टूट चुके थे। सोमवार की तेजी ने निवेशकों को कुछ राहत दी, हालांकि इसे बाजार में गिरावट के रुख के पूरी तरह समाप्त होने का संकेत नहीं माना जा सकता।

प्रमुख सूचकांकों की तुलना में व्यापक बाजार का प्रदर्शन बेहतर रहा। निफ्टी मिडकैप 150 सूचकांक 1.07 प्रतिशत चढ़ा, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 250 में 1.13 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। इससे संकेत मिला कि खरीदारी केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी।

बीएसई पर बाजार का रुख सकारात्मक रहा। कुल 2,420 शेयरों में तेजी आई, जबकि 2,005 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। 262 शेयरों के भाव में कोई बदलाव नहीं हुआ।

निफ्टी के प्रमुख शेयरों में कोटक महिंद्रा बैंक 2.38 प्रतिशत चढ़ा। भारती एयरटेल में 1.34 प्रतिशत और रिलायंस इंडस्ट्रीज में 0.99 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। बैंकिंग, धातु और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र के शेयरों में खरीदारी रही, जबकि उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं और दैनिक उपयोग के उपभोक्ता उत्पादों (एफएमसीजी) से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में दबाव देखा गया।

कच्चे तेल और विदेशी निवेश पर नजर

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने बाजार को राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पश्चिम एशिया में तनाव और आपूर्ति संबंधी चिंताओं के बीच हाल में तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर पहुंच गई थीं। सोमवार को इनमें कुछ गिरावट आई, जिससे भारत के आयात बिल, महंगाई और कंपनियों की लागत को लेकर चिंताओं में आंशिक कमी आई।

दिसंबर 2026 में आपूर्ति वाले ब्रेंट क्रूड वायदा अनुबंध का भाव 1.56 डॉलर यानी 1.34 प्रतिशत गिरकर 115.16 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। हालांकि, कच्चे तेल का यह स्तर अब भी ऊंचा है।

भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में लंबे समय तक महंगा कच्चा तेल रहने से आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव पड़ सकता है और महंगाई में तेजी आ सकती है। परिवहन, विमानन और अन्य ईंधन-निर्भर क्षेत्रों की लागत भी बढ़ सकती है। जिन कंपनियों के लिए बढ़ी हुई लागत का बोझ ग्राहकों पर डालना मुश्किल होता है, उनके मुनाफे पर इसका असर पड़ सकता है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में 887.65 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की थी। घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) की शुद्ध खरीदारी भी 3,235.36 करोड़ रुपये रही। हाल की गिरावट के बाद संस्थागत निवेशकों की खरीदारी बाजार के लिए सहायक संकेत रही।

हालांकि, बाजार में तेजी टिकाऊ होगी या नहीं, यह आने वाले सत्रों में विदेशी निवेश के रुख और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। यदि विदेशी निवेशक फिर से बड़े पैमाने पर बिकवाली करते हैं, तो घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी के बावजूद बाजार पर दबाव बना रह सकता है।

विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले मजबूत हुआ। रुपया लगभग 94.21 प्रति डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जबकि पिछले कारोबारी सत्र में इसका बंद भाव 94.93 प्रति डॉलर था। रुपये की मजबूती से आयात लागत पर कुछ राहत मिल सकती है, हालांकि एक दिन की तेजी से मुद्रा के दीर्घकालिक रुख का अनुमान नहीं लगाया जा सकता।

भारत के 10 वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड पर प्रतिफल पिछले सत्र के 7.473 प्रतिशत से बढ़कर 7.493 प्रतिशत हो गया। बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी से अर्थव्यवस्था में कर्ज की लागत और कंपनियों के मूल्यांकन पर असर पड़ सकता है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर 4 दिसंबर 2026 की डिलीवरी वाला सोना वायदा 0.62 प्रतिशत बढ़कर 1,42,899 रुपये पर पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर सूचकांक मामूली बढ़त के साथ 101.82 पर रहा, जबकि अमेरिकी 10 वर्षीय ट्रेजरी बॉन्ड का प्रतिफल बढ़कर 4.986 प्रतिशत हो गया।

वैश्विक बाजारों में सतर्कता

यूरोपीय शेयर बाजार सोमवार को बढ़त के साथ कारोबार करते दिखे। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से पिछले सप्ताह की गिरावट के बाद कुछ राहत मिली। हालांकि, निवेशक प्रमुख अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के नतीजों और केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसलों से पहले सतर्क बने रहे।

अमेरिकी शेयर बाजार के वायदा संकेतकों में भी तेजी रही। डाउ वायदा 214 अंक चढ़ा, जो अमेरिकी बाजारों में सकारात्मक शुरुआत की संभावना का संकेत दे रहा था।

इससे पहले शुक्रवार, 23 अक्टूबर को अमेरिकी शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए थे। ऊर्जा की बढ़ती लागत और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) पर कंपनियों के भारी खर्च को लेकर चिंताओं ने निवेशकों की धारणा प्रभावित की थी।

डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 652.82 अंक यानी 1.23 प्रतिशत गिरकर 52,215.16 पर बंद हुआ। एसएंडपी 500 सूचकांक 39.75 अंक यानी 0.52 प्रतिशत टूटकर 7,623.68 पर आ गया, जबकि नैस्डैक कंपोजिट 53.52 अंक यानी 0.21 प्रतिशत गिरकर 25,955.34 पर बंद हुआ।

निवेशकों की नजर अल्फाबेट, माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन जैसी बड़ी अमेरिकी प्रौद्योगिकी कंपनियों के तिमाही नतीजों पर है। इन कंपनियों के परिणामों से यह संकेत मिल सकता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से संबंधित भारी निवेश भविष्य में कितनी आय और मुनाफे में बदल रहा है। इससे वैश्विक प्रौद्योगिकी शेयरों के मूल्यांकन और निवेशकों की जोखिम लेने की प्रवृत्ति पर असर पड़ सकता है।

अमेरिका में दूरसंचार कंपनियों के शेयरों पर भी दबाव रहा। रिपोर्टों के अनुसार, स्पेसएक्स अमेरिका में चौथा वायरलेस सेवा प्रदाता शुरू करने की संभावनाओं पर विचार कर रही है। बढ़ती प्रतिस्पर्धा की आशंका से एटीएंडटी और टी-मोबाइल के शेयरों में लगभग 8 प्रतिशत की गिरावट आई।

इसके विपरीत, पश्चिम एशिया में तनाव के कारण तेल की कीमतों में आई तेजी से ऊर्जा कंपनियों को लाभ मिला। तिमाही नतीजों के बाद श्लमबर्जर के शेयर लगभग 7 प्रतिशत चढ़े।

अमेरिकन एक्सप्रेस के शेयर लगभग 3.7 प्रतिशत गिर गए। कंपनी ने तिमाही मुनाफे में वृद्धि दर्ज करने और पूरे वित्त वर्ष के लिए आय का अनुमान बढ़ाने के बावजूद बाजार की उम्मीदों से कम राजस्व दर्ज किया। कंपनी ने अपने कर्मचारियों की संख्या में 5 प्रतिशत कटौती की योजना भी घोषित की।

अमेरिका में उपभोक्ता धारणा कमजोर बनी हुई है। मिशिगन विश्वविद्यालय का अक्टूबर का अंतिम उपभोक्ता धारणा सूचकांक 48.0 रहा, जबकि सितंबर में यह 48.1 था। एक वर्ष की महंगाई संबंधी उम्मीद बढ़कर 4.7 प्रतिशत और पांच वर्ष की उम्मीद 3.5 प्रतिशत हो गई। महंगाई की लगातार बनी चिंताएं अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों पर फैसला लेना अधिक जटिल बना सकती हैं।

एशियाई शेयर बाजारों के अधिकांश प्रमुख सूचकांक सोमवार को गिरावट के साथ बंद हुए। निवेशक ऊंचे तेल मूल्यों, भू-राजनीतिक जोखिमों, केंद्रीय बैंकों के फैसलों और कंपनियों के नतीजों का आकलन करते रहे।

कंपनियों के नतीजों से शेयरों में हलचल

सोमवार को कंपनियों के तिमाही नतीजों और कारोबारी घोषणाओं ने अलग-अलग शेयरों की चाल को प्रभावित किया। निवेशकों ने बेहतर आय और परिचालन प्रदर्शन वाली कंपनियों के शेयरों में खरीदारी की, जबकि मार्जिन पर दबाव और भविष्य के कारोबारी अनुमान भी उनके आकलन का हिस्सा रहे।

कोटक महिंद्रा बैंक: निजी क्षेत्र के इस बैंक का शेयर 2.38 प्रतिशत बढ़ा। बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही में 4,212 करोड़ रुपये का एकल शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही से 29 प्रतिशत अधिक है। जून तिमाही के 4,123 करोड़ रुपये के मुकाबले मुनाफा लगभग 2 प्रतिशत बढ़ा।

बैंक की शुद्ध ब्याज आय (एनआईआई) सालाना आधार पर 16 प्रतिशत और तिमाही आधार पर 7 प्रतिशत बढ़कर 8,459 करोड़ रुपये हो गई। हालांकि, शुद्ध ब्याज मार्जिन (एनआईएम) घटकर 4.31 प्रतिशत रह गया, जबकि एक साल पहले यह 4.54 प्रतिशत और पिछली तिमाही में 4.53 प्रतिशत था। बैंक ने मार्जिन में कमी का प्रमुख कारण तिमाही के दौरान विदेशी मुद्रा अनिवासी बैंकिंग जमा (एफसीएनआर-बी) जुटाने को बताया।

इन्फोसिस: आईटी कंपनी का शेयर 1.06 प्रतिशत चढ़ा, हालांकि कंपनी ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए स्थिर मुद्रा आधार पर राजस्व वृद्धि का अनुमान घटाकर 1-2 प्रतिशत कर दिया है।

कंपनी का सितंबर तिमाही में शेयरधारकों के हिस्से का समेकित शुद्ध मुनाफा सालाना आधार पर 6.23 प्रतिशत बढ़कर 7,823 करोड़ रुपये रहा। परिचालन से राजस्व 10.69 प्रतिशत बढ़कर 49,244 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी के संशोधित अनुमान के बाद निवेशकों की नजर ग्राहकों के प्रौद्योगिकी खर्च, आईटी सेवाओं की मांग और नए कारोबारी सौदों को राजस्व में बदलने की क्षमता पर रहेगी।

डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज: दवा कंपनी का शेयर 6.62 प्रतिशत उछल गया। दूसरी तिमाही में कंपनी का समेकित परिचालन राजस्व सालाना आधार पर 1.5 प्रतिशत घटकर 8,670.8 करोड़ रुपये रहा। हालांकि, जून तिमाही के 8,070.5 करोड़ रुपये की तुलना में राजस्व 7.4 प्रतिशत बढ़ा।

कंपनी का मूल कंपनी के इक्विटी शेयरधारकों के लिए शुद्ध मुनाफा पिछले साल की समान तिमाही के 1,437.2 करोड़ रुपये से 35.6 प्रतिशत घटकर 925 करोड़ रुपये रह गया। लेकिन जून तिमाही के 443.5 करोड़ रुपये के मुकाबले इसमें 108.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इस तरह सालाना आधार पर कमजोर प्रदर्शन के बावजूद तिमाही आधार पर मुनाफे में सुधार दर्ज किया गया।

भारत कोकिंग कोल: कंपनी के शेयर 4.23 प्रतिशत चढ़े। भारत कोकिंग कोल ने दूसरी तिमाही में 123.74 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा दर्ज किया, जबकि पिछले वर्ष की समान तिमाही में उसे 52.99 करोड़ रुपये का घाटा हुआ था।

परिचालन राजस्व 39.06 प्रतिशत बढ़कर 4,412.58 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 3,173.25 करोड़ रुपये था। कंपनी ने बेहतर प्रदर्शन का श्रेय कोयले की अधिक आपूर्ति, धुले हुए कोयले की बेहतर प्राप्ति और 386.50 करोड़ रुपये की मूल्य वृद्धि तथा मुआवजे की राशि को मान्यता दिए जाने को दिया। पिछले साल की समान तिमाही में इस मद में कोई राशि दर्ज नहीं की गई थी।

टाटा केमिकल्स: कंपनी का शेयर 3.23 प्रतिशत बढ़ा। कंपनी ने केन्या स्थित अपनी सहायक कंपनी टाटा केमिकल्स मगादी लिमिटेड से जुड़े विवाद पर वहां के उच्च न्यायालय के आदेश की जानकारी दी।

23 अक्टूबर 2026 के आदेश में केन्या के उच्च न्यायालय ने कहा कि उसे विवाद पर सुनवाई का अधिकार क्षेत्र प्राप्त नहीं है और वह इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं कर सकता। हालांकि, इस आदेश से मूल नियामकीय विवाद का अंतिम निपटारा नहीं हुआ है। इसलिए मामले से जुड़े आगे के घटनाक्रम पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी।

ज्योति स्ट्रक्चर्स: कंपनी का शेयर 10.42 प्रतिशत उछल गया। कंपनी ने घोषणा की कि उसे राजस्थान में पारेषण लाइन परियोजनाओं के लिए पावर ग्रिड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया से परियोजना आवंटन संबंधी सूचनाएं मिली हैं। इस घोषणा से शेयर में खरीदारी बढ़ी। हालांकि, कंपनी की वास्तविक वित्तीय स्थिति पर इन परियोजनाओं का प्रभाव उनके क्रियान्वयन, समयसीमा और लाभप्रदता पर निर्भर करेगा।

ईएएए इंडिया अल्टरनेटिव्स आईपीओ को पहले दिन कमजोर प्रतिक्रिया

ईएएए इंडिया अल्टरनेटिव्स का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) सोमवार को खुला। इसमें निवेश के लिए आवेदन 28 अक्टूबर तक किए जा सकेंगे।

आईपीओ का मूल्य दायरा 1,585 से 1,665 रुपये प्रति शेयर निर्धारित किया गया है। निवेशक न्यूनतम नौ शेयरों के लिए आवेदन कर सकते हैं और इसके बाद निर्धारित गुणकों में बोली लगा सकते हैं।

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, 26 अक्टूबर को शाम 4:33 बजे तक कंपनी के 52,99,684 शेयरों के मुकाबले 5,66,424 शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुई थीं। इस तरह पहले दिन निर्गम को लगभग 0.11 गुना अभिदान मिला।

अर्थात, पहले दिन प्रस्तावित शेयरों की तुलना में निवेशकों की मांग काफी कम रही। शेष अवधि में प्राप्त होने वाली बोलियां तय करेंगी कि आईपीओ को अंतिम रूप से कितनी प्रतिक्रिया मिलती है। निवेशकों के लिए कंपनी के कारोबार, वित्तीय प्रदर्शन, मूल्यांकन और प्रस्ताव दस्तावेज में बताए गए जोखिमों का आकलन करना भी जरूरी है।

आगे बाजार की दिशा किन बातों पर निर्भर करेगी?

चार सत्रों की गिरावट के बाद सोमवार की तेजी ने बाजार को राहत दी, लेकिन आगे की दिशा कई कारकों से तय होगी। इनमें कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेशकों का रुख, रुपये की चाल, बॉन्ड प्रतिफल और कंपनियों के तिमाही नतीजे प्रमुख हैं।

यदि तेल की कीमतों में नरमी बनी रहती है और कंपनियों के नतीजे उम्मीदों के अनुरूप आते हैं, तो बाजार को और सहारा मिल सकता है। इसके विपरीत, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने, महंगाई की चिंताएं गहराने या विदेशी निवेशकों की बिकवाली तेज होने पर बाजार में फिर दबाव आ सकता है।

मझोली और छोटी कंपनियों के शेयरों में प्रमुख सूचकांकों से अधिक तेजी यह दर्शाती है कि सोमवार को निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ। हालांकि, इस तेजी के स्थायी रुख में बदलने की पुष्टि के लिए आगामी कारोबारी सत्रों में खरीदारी की निरंतरता और वैश्विक परिस्थितियों पर नजर रखनी होगी।

अस्वीकरण: यह रिपोर्ट केवल सूचनात्मक उद्देश्य से है, निवेश संबंधी सलाह या किसी शेयर को खरीदने अथवा बेचने की सिफारिश नहीं है। निवेश से पहले संबंधित कंपनियों के आधिकारिक खुलासों और बाजार के नवीनतम आंकड़ों की पुष्टि करें।