Last Updated on October 26, 2026 8:37 pm by INDIAN AWAAZ
एस. एन. वर्मा

नई दिल्ली: सोशल जस्टिस एंड वूमेन एम्पावरमेंट बोर्ड की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. कुसुम पथारिया को दिव्यांगजनों के उत्थान, अधिकारों और समाज में उनके सम्मान के लिए किए गए निरंतर प्रयासों हेतु ‘अवार्ड ऑफ एप्रिसिएशन’ (सराहना पुरस्कार) से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान उन्हें नई दिल्ली में ‘एसोसिएशन ऑफ रिहैबिलिटेशन प्रोफेशन्स एंड पेरेंट्स’ (ARPP) द्वारा आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में प्रदान किया गया।
पुरस्कार स्वीकार करते हुए डॉ. पथारिया ने कहा कि यह सम्मान किसी व्यक्ति विशेष का नहीं, बल्कि सेवा और समर्पण के संकल्प का प्रतीक है।
उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह पुरस्कार अत्यंत हर्ष, गर्व और आत्म-संतोष का विषय है। मनुष्य के जीवन की सार्थकता इसमें नहीं है कि उसने अपने लिए कितना कमाया, बल्कि इसमें है कि वह दूसरों के जीवन में कितनी आशा, विश्वास और रोशनी ला सका।”
डॉ. पथारिया ने समाज के समावेशी विकास पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी समाज की वास्तविक प्रगति तभी संभव है जब शारीरिक स्थितियों से परे हटकर प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा, सम्मान और समान अवसर मिले।
“दिव्यांगजन हमारी सहानुभूति के पात्र नहीं हैं, बल्कि वे समान अधिकार, अवसर और आत्म-सम्मान के हकदार हैं। उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना कोई उपकार नहीं, बल्कि समाज का नैतिक कर्तव्य है,” उन्होंने कहा। डॉ. पथारिया ने यह भी जोड़ा कि यह सम्मान केवल एक उपलब्धि नहीं, बल्कि उस जिम्मेदारी का अहसास है जिसके साथ वे सामाजिक सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ रही हैं। जब तक समाज का अंतिम व्यक्ति सम्मान और अवसरों से वंचित है, तब तक सेवा का कार्य अधूरा है।
कार्यक्रम के अंत में उन्होंने डॉ. अमरकेश महेंद्रू और आयोजन से जुड़े सभी गणमान्य संस्थानों व सहयोगियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान उन्हें दिव्यांगजनों, महिलाओं और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए और अधिक संवेदनशीलता तथा निष्ठा के साथ काम करने की प्रेरणा देगा।
डॉ. पथारिया ने अपने संबोधन का समापन करते हुए कहा, “सच्ची समाज सेवा वह नहीं है जिसमें खुद का नाम ऊंचा हो, बल्कि वह है जिससे किसी झुके हुए व्यक्ति को अपना सिर उठाकर जीने का साहस मिले।”
