Last Updated on October 13, 2026 3:34 pm by INDIAN AWAAZ
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि सरकार ने अपने शासन के दृष्टिकोण और कार्य संस्कृति में ‘पावर टू एम्पॉवर’ के सिद्धांत को अपनाया है। नई दिल्ली में ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि भारत की प्रगति सामूहिक विकास और साझा अवसरों पर टिकी हुई है। उन्होंने कहा कि शक्ति केवल आगे बढ़ने की क्षमता नहीं है, बल्कि यह दूसरों को सशक्त बनाने की क्षमता भी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान युग में डिजिटल शक्ति इस बदलाव के प्रमुख चालकों में से एक बनकर उभरी है और इस दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। श्री मोदी ने कहा कि डिजिटल शक्ति ने भारत के लिए अधिक से अधिक अवसरों के द्वार खोले हैं।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारत का आर्थिक विकास एक मजबूत नींव पर रहा है। उन्होंने कहा कि इस चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद विकास दर 7.8 प्रतिशत रही। श्री मोदी ने कहा कि आज भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 700 अरब डॉलर से अधिक हो गया है और बैंकिंग प्रणाली कई दशकों में अपनी सबसे मजबूत स्थिति में है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की रिफॉर्म एक्सप्रेस तेज गति से आगे बढ़ रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में भारत की प्रगति प्रत्येक व्यक्ति को साथ लेकर आगे बढ़ने और सबको साथ मिलाने की कहानी है। उन्होंने कहा कि जब भी दुनिया को एक मजबूत स्तंभ की आवश्यकता होती है, भारत अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए मदद का हाथ आगे बढ़ाता है। श्री मोदी ने कहा कि आज भारत में दो हजार से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र हैं जो विश्व की कंपनियों को सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी में प्रौद्योगिकी, डेटा, ज्ञान और नवाचार शक्ति के महत्वपूर्ण स्रोत बन गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का निरंतर प्रयास यह सुनिश्चित करना है कि भारत की क्षमताएं अन्य देशों के लिए भी अवसरों के नए द्वार खोलें। श्री मोदी ने कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है और यहाँ एक सौ से अधिक भाषाएं, लगभग 80 हजार पंजीकृत समाचार पत्र और पत्रिकाएं तथा एक हजार से अधिक सैटेलाइट टेलीविजन चैनल हैं। श्री मोदी ने कहा कि भारत ने पिछले दशक में पच्चीस करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 2014 के बाद से भारत के नवाचारों का काफी विस्तार हुआ है, और स्टार्टअप्स की संख्या दो लाख पचास हजार को पार कर गई है। उन्होंने कहा कि इनमें से लगभग आधे स्टार्टअप छोटे शहरों और कस्बों से आते हैं, जबकि 45 प्रतिशत से अधिक स्टार्टअप्स में कम से कम एक महिला निदेशक या भागीदार है।
