Last Updated on October 9, 2026 5:34 pm by INDIAN AWAAZ
मस्क, अंबानी और राहुल गांधी: स्टारलिंक विवाद के बहाने भारत की संप्रभुता पर सियासत और बाजार की जंग

संतोष कुमार पाठक
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी और दुनिया के मशहूर उद्योगपति एलन मस्क के एक बयान ( सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किया गया पोस्ट ) ने भारत में कई तरह के गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसका जवाब तलाशना और पूरी गंभीरता से देना बहुत जरूरी हो गया है।
इस बात में कोई दो राय नहीं है कि उदारीकरण और भूमंडलीकरण के इस दौर में प्राइवेट कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा होनी ही चाहिए ताकि लोगों को फायदा भी हो और उनके पास चुनने का विकल्प भी हो। इसी तर्क का हवाला देकर भारत के अंदर भी कई लोग एलन मस्क की पीड़ा को सही बताते हुए सरकार को नसीहतें दे रहे हैं। लेकिन भारत की संप्रभुता और वैश्विक कंपनियों को भारत में कारोबार करने की इजाज़त देने के बीच में एक बहुत ही हल्की सी रेखा आती है, जिसे पार करते ही कई तरह की समस्याएं खड़ी हो सकती है।
भारत के अंदर, हर भारतीय को यह स्वतंत्रता है कि वो अपनी सरकार से सवाल पूछ सके, अपनी सरकार पर सवाल उठा सके लेकिन क्या हम यही स्वतंत्रता किसी विदेशी कारोबारी को दे सकते हैं? कतई नहीं, भारत का असली बॉस कौन है, यह तय करने और बताने का अधिकार सिर्फ और सिर्फ भारतीयों के पास ही रहना चाहिए।
एलन मस्क ने 8 अक्टूबर को अपने ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, ” स्टारलिंक को 165 से ज़्यादा देशों में लाइसेंस मिला हुआ है और कंपनी भारत सरकार के हर नियम और ज़रूरत को पूरा करने में पांच साल से काम कर रही है, फिर भी लाइसेंस क्यों नहीं मिला? क्या अंबानी ही भारत के असली बॉस हैं?” जिस अंदाज में और जितनी तेजी से राहुल गांधी ने इस पर कमेंट किया, उसे लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मस्क के पोस्ट को रिपोस्ट करते हुए राहुल ने लिखा, ” भारत में आपका स्वागत है, एलन। दूसरे शख्स के मिलने तक इंतजार कीजिए।” राहुल गांधी के जवाब से गदगद मस्क ने तुरंत जवाब देते हुए लिखा, “धन्यवाद राहुल, यह वाकई परेशान करने वाला है।”
यहां यह याद रखना भी बहुत जरूरी है कि मस्क पहले भी आरोप लगा चुके हैं कि भारत में इस सेक्टर से जुड़े बड़े कारोबारी स्टारलिंक की एंट्री भारत के बाज़ार में रोककर अपना दबदबा बनाए रखना चाहते हैं। लेकिन इस बार लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के जवाब देने के कारण, मामला बहुत गंभीर हो गया है। पिछले कई दिनों से राहुल, देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं और यह बात स्पष्ट तौर पर नज़र आ रही है केंद्र में सत्तारूढ़ सरकार और विपक्षी दल खासकर राहुल के साथ संवादहीनता की स्थिति आ गई है, जिसे कतई सही नहीं माना जा सकता है। इतने गंभीर मसले पर राहुल की इतनी तेजी से की गई टिप्पणी को कतई जायज नहीं ठहराया जा सकता है। यहां साफ-साफ नजर आ रहा है कि राहुल ने एक बड़ी गलती कर दी है,जिसका जवाब अब उन्हें लगातार देते रहना पड़ेगा।
भारत सरकार ने गुरुवार, 8 अक्टूबर को ही मस्क के आरोपों को खारिज करते हुए यह साफ कर दिया कि, देश में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सर्विसेज के लिए तय नियम सभी के लिए एक जैसे हैं। फिलहाल, तीनों कंपनियों के लिए सुरक्षा समीक्षा की प्रोसेस चल रही है। जैसे ही किसी कंपनी की सुरक्षा जांच पूरी हो जाएगी, वह अगली स्टेप यानी स्पेक्ट्रम आवंटन की मांग करने के लिए आगे बढ़ सकती है। सरकार ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि, यह कहना बिल्कुल गलत है कि नियमों को किसी के साथ भेदभाव करने के लिए लागू किया जा रहा है। मस्क के अलावा एयरटेल के मालिक सुनील भारती मित्तल की कंपनी यूटेलसैट वनवेब और मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस जियो भी लाइसेंस लेने की होड़ में है।
एलन मस्क के आरोप अपनी जगह है लेकिन भारत की कोई भी सरकार देश की सुरक्षा और संप्रभुता से किसी तरह का समझौता नहीं कर सकती है। इस मामले में भारत के महत्वपूर्ण और बड़े राजनीतिक दलों को एक ही पेज पर होना चाहिए। सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह संसद के प्रमुख दलों को इससे जुड़े तथ्यों से अवगत कराएं। सरकार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के करीबी मित्र एलन मस्क को भी दो टूक शब्दों में यह बता देना चाहिए कि बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भारत की सरकार पर कोई दबाव नहीं डाला जा सकता है। यह मामला बहुत बड़ा है और इसे दुनिया की तमाम बड़ी कंपनियों के लिए एक उदाहरण की तरह पेश किया जाना चाहिए। इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि सब कुछ बिना किसी भेदभाव के होना चाहिए लेकिन ट्रंप प्रशासन जिस तरह से भारत, भारतीय कंपनियों और भारतीयों के खिलाफ लगातार फैसले ले रहा है, उसे भी ध्यान में रखना बहुत जरूरी है।
लेकिन हमें यहां निश्चित तौर पर यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हमारे देश के अंदर एयरटेल, जियो और वोडाफ़ोन- आइडिया जैसी टेलीकॉम कंपनियों ने किस हद तक लूट मचा रखी है। उपभोक्ताओं से मनमाना पैसा वसूल किया जा रहा है और इसके बदले में घटिया स्तर की सुविधा दी जा रही है। जब इनकी मनमर्जी होती है, ये टैरिफ बढ़ा देते हैं। ये कंपनियां इस हद तक बेलगाम हो चुकी की TRAI यहां तक कि सरकार की चेतावनियों को भी अनसुना कर देती है। इन कंपनियों के मालिकों के साथ-साथ सरकार को भी इस बात का जवाब जरूर देना चाहिए कि इन टेलीकॉम कंपनियों की मनमानी पर कब और कैसे रोक लगेगी?
लेखक वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं
