
बिभूदत्त प्रधान / नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग और देशव्यापी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) कौशल प्रशिक्षण अभियान की घोषणा की। लाल किले की प्राचीर से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण में देश के युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी।
मोदी ने कहा कि अगले एक वर्ष में एक करोड़ युवाओं को एआई का कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि भारत इस तेजी से विकसित हो रही तकनीक के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ सके।
प्रधानमंत्री ने कहा, “जब मैं विकसित भारत की बात करता हूं, जब मैं देश को तेज गति से आगे बढ़ाने की बात करता हूं, तो इसका सबसे बड़ा लाभार्थी कौन होगा? इन सभी प्रयासों का सबसे बड़ा चालक कौन होगा? अगर कोई प्रेरक शक्ति है, तो वह मेरे देश का युवा है।”
उन्होंने कहा कि विकसित भारत के सबसे बड़े लाभार्थी देश के युवा होंगे और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की यात्रा में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।
गरीब और मध्यम वर्ग के छात्रों के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग
प्रधानमंत्री ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगने वाले भारी खर्च का उल्लेख करते हुए कहा कि कोचिंग संस्थानों की फीस गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों पर आर्थिक बोझ डालती है। उन्होंने घोषणा की कि सरकार विभिन्न परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग उपलब्ध कराएगी।
मोदी ने कहा कि इससे अभिभावकों को बड़ी आर्थिक राहत मिलेगी और उन्हें अपने बच्चों को कोचिंग के लिए दूसरे शहरों में भेजने की जरूरत कम होगी। उन्होंने कहा कि इससे माता-पिता अपने बच्चों के साथ रहकर उनकी देखभाल भी कर सकेंगे और हजारों करोड़ रुपये की बचत कर सकेंगे।
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब पिछले कुछ महीनों में देश के कई हिस्सों में युवाओं और छात्रों के बीच प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित प्रश्नपत्र लीक और भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर नाराजगी सामने आई है। इन घटनाओं ने परीक्षा व्यवस्था, पारदर्शिता और रोजगार के अवसरों को लेकर युवाओं की चिंताओं को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।
एआई प्रशिक्षण पर जोर
मोदी सरकार के इस ऐलान में एआई कौशल प्रशिक्षण को विशेष महत्व दिया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आने वाले समय में तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता वैश्विक अर्थव्यवस्था और रोजगार के स्वरूप को तेजी से बदलेंगे। ऐसे में भारत के युवाओं को इन नई तकनीकों से लैस करना आवश्यक है।
सरकार का लक्ष्य अगले 12 महीनों में एक करोड़ युवाओं को एआई कौशल प्रदान करना है। इसका उद्देश्य युवाओं को भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार करने के साथ-साथ भारत को एआई के क्षेत्र में एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में स्थापित करना है।
भारत की बड़ी युवा आबादी को देखते हुए यह पहल विशेष महत्व रखती है। देश की लगभग एक चौथाई आबादी 15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग में है, जबकि दो-तिहाई से अधिक आबादी 35 वर्ष से कम उम्र की है। 18 से 29 वर्ष के युवा मतदाता भी कुल मतदाताओं का करीब 23 प्रतिशत हैं।
शिक्षा के क्षेत्र में उपलब्धियों का उल्लेख
स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री ने पिछले एक दशक में शिक्षा के क्षेत्र में सरकार द्वारा किए गए विस्तार का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले 10 से 12 वर्षों में देश में लगभग 650 विश्वविद्यालय जोड़े गए हैं, जबकि 2014 के बाद मेडिकल सीटों की संख्या दोगुने से अधिक हो गई है।
मोदी ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति का उल्लेख करते हुए कहा, “35 वर्षों तक कोई शिक्षा नीति नहीं थी। हमने नई शिक्षा नीति लाई।”
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के जरिए सरकार ने शिक्षा व्यवस्था को अधिक आधुनिक, कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख बनाने पर जोर दिया है। एआई और अन्य उभरती तकनीकों में प्रशिक्षण की घोषणा को भी इसी व्यापक बदलाव का हिस्सा माना जा सकता है।
युवाओं की नाराजगी के बीच सरकार का फोकस
युवाओं के लिए की गई घोषणाओं का राजनीतिक महत्व भी है। हाल के महीनों में परीक्षा प्रश्नपत्रों के लीक होने और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों के बीच असंतोष देखने को मिला है। कई मामलों में लाखों अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षाओं में शामिल होना पड़ा।
इन घटनाओं ने गुणवत्तापूर्ण रोजगार, निष्पक्ष भर्ती और भरोसेमंद परीक्षा प्रणाली को लेकर युवाओं की चिंताओं को सामने रखा है। विपक्षी दलों ने भी इन मुद्दों को सरकार के खिलाफ राजनीतिक अभियान का प्रमुख आधार बनाया है।
ऐसे माहौल में प्रधानमंत्री का स्वतंत्रता दिवस संबोधन युवाओं को केंद्र में रखता दिखाई दिया। मुफ्त कोचिंग, एआई प्रशिक्षण और खेल प्रतिभा खोज जैसी घोषणाओं के जरिए सरकार ने शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास से जुड़े मुद्दों पर अपना ध्यान केंद्रित करने का संदेश दिया।
गांव-गांव खेल प्रतिभा की तलाश
प्रधानमंत्री ने केवल शिक्षा और तकनीकी कौशल तक सीमित न रहते हुए खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने की भी घोषणा की। उन्होंने 5 से 15 वर्ष की उम्र के बच्चों के लिए देशव्यापी खेल प्रतिभा खोज अभियान शुरू करने की बात कही।
यह अभियान गांवों, कस्बों और स्कूलों तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना और उन्हें शुरुआती स्तर से प्रशिक्षण एवं अवसर उपलब्ध कराना है।
प्रधानमंत्री ने इसे भारत की 2036 ओलंपिक की तैयारी से भी जोड़ा। सरकार का उद्देश्य आने वाले वर्षों में अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में भारत के प्रदर्शन को मजबूत करना है।
युवाओं को विकास यात्रा का केंद्र बनाने की कोशिश
मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में युवाओं को लेकर की गई घोषणाओं से स्पष्ट है कि सरकार विकसित भारत के लक्ष्य में युवा आबादी को प्रमुख शक्ति के रूप में देख रही है। मुफ्त परीक्षा कोचिंग से आर्थिक बाधाएं कम करने, एआई प्रशिक्षण से भविष्य की तकनीकी नौकरियों के लिए युवाओं को तैयार करने और खेल प्रतिभा खोज से खेल क्षेत्र में अवसर बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की विकास यात्रा में युवाओं की ऊर्जा, प्रतिभा और नवाचार सबसे बड़ी ताकत बन सकते हैं। उनका संदेश यह रहा कि विकसित भारत केवल आर्थिक विकास का लक्ष्य नहीं, बल्कि युवाओं को अवसर, कौशल और बेहतर भविष्य उपलब्ध कराने का भी संकल्प है।
इन घोषणाओं के जरिए सरकार ने शिक्षा और रोजगार से जुड़े युवाओं के मुद्दों को सीधे संबोधित करने की कोशिश की है। आने वाले महीनों में इन योजनाओं के वास्तविक क्रियान्वयन, उनकी पहुंच और युवाओं को मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ पर विशेष नजर रहेगी।
