Last Updated on May 31, 2026 7:38 am by INDIAN AWAAZ

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तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी पर पश्चिम बंगाल के सोनारपुर में हुए हमले के बाद देशभर के विपक्षी दल उनके समर्थन में उतर आए हैं। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल और शिवसेना (यूबीटी) सहित कई दलों ने घटना की निंदा करते हुए भाजपा सरकार पर राजनीतिक प्रतिशोध और विपक्षी नेताओं को डराने की राजनीति करने का आरोप लगाया है।

अभिषेक बनर्जी शनिवार को राजपुर-सोनारपुर नगरपालिका क्षेत्र के विवेकानंदनगर में पोस्ट-पोल हिंसा के एक पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे थे। इसी दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने उनका विरोध किया। प्रदर्शनकारियों ने उनके खिलाफ “चोर-चोर” के नारे लगाए और कथित तौर पर उन पर पत्थर, अंडे और जूते फेंके। स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि उन्हें सुरक्षा कर्मियों के घेरे में हेलमेट पहनकर पैदल पीड़ित परिवार के घर तक पहुंचना पड़ा।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, अभिषेक के वाहन को भी निशाना बनाया गया। बाद में वह मोटरसाइकिल से आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन विरोध प्रदर्शन वहां भी जारी रहा। भीड़ के आक्रोश के बीच उनकी शर्ट फट गई और सुरक्षा बलों को उन्हें सुरक्षित स्थान तक पहुंचाने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी।

घटना के बाद अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने समय पर कोई मदद नहीं पहुंचाई। उन्होंने कहा कि उनकी जान को खतरा था और स्थानीय प्रशासन तथा पुलिस की अनुपस्थिति ने स्थिति को और गंभीर बना दिया। उन्होंने इस मामले में राज्यपाल और न्यायपालिका का ध्यान आकर्षित करने की बात कही।

स्थानीय महिलाओं और निवासियों ने अभिषेक बनर्जी से तीखे सवाल किए। कुछ महिलाओं ने आरोप लगाया कि राजनीतिक हिंसा के कारण उन्हें अपने घर छोड़ने पड़े और प्रशासन उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहा। कई लोगों ने क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर भी नाराजगी जताई।

इस घटना के बाद विपक्षी दलों ने भाजपा पर तीखा हमला बोला। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता Mallikarjun Kharge ने कहा कि एक प्रमुख विपक्षी नेता को पर्याप्त सुरक्षा न मिलना लोकतांत्रिक मूल्यों पर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने इसे राजनीतिक प्रतिशोध की राजनीति का उदाहरण बताया।

समाजवादी पार्टी प्रमुख Akhilesh Yadav ने सुरक्षा व्यवस्था की कमी को “गहरी साजिश” करार दिया, जबकि आम आदमी पार्टी के संयोजक Arvind Kejriwal ने कहा कि भाजपा जहां भी सत्ता में आती है, वहां विपक्षी आवाजों को दबाने की कोशिश की जाती है।

राष्ट्रीय जनता दल के नेता Tejashwi Yadav ने भी घटना की निंदा करते हुए कहा कि राजनीतिक हिंसा लोकतंत्र के लिए खतरा है। शिवसेना (यूबीटी) और अन्य विपक्षी दलों ने भी अभिषेक बनर्जी के समर्थन में बयान जारी किए।

दूसरी ओर, पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष Samik Bhattacharya ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि भाजपा इस प्रकार की राजनीति में विश्वास नहीं करती। उन्होंने पुलिस से मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि जनता का गुस्सा राज्य में लंबे समय से जारी राजनीतिक हिंसा के खिलाफ है।

टीएमसी सांसद Derek O’Brien ने आरोप लगाया कि अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में गंभीर चूक हुई और उनकी जान खतरे में डाल दी गई। वहीं टीएमसी प्रमुख Mamata Banerjee ने सोशल मीडिया पर भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक हो गई है।

करीब डेढ़ घंटे तक पीड़ित परिवार के घर में रहने के बाद अभिषेक बनर्जी को केंद्रीय बलों और स्थानीय पुलिस की मदद से वहां से निकाला गया। बाद में उन्हें चिकित्सा जांच के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि उनके सीने पर चोट के निशान हैं, लेकिन कोई गंभीर शारीरिक चोट नहीं पाई गई।

सोनारपुर की यह घटना पश्चिम बंगाल की राजनीति में नए विवाद का कारण बन गई है। जहां विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों और विपक्षी नेताओं पर हमले का मामला बता रहा है, वहीं भाजपा का कहना है कि यह जनता के असंतोष का परिणाम है। इस घटना ने राज्य की राजनीतिक टकराव की राजनीति को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।