Last Updated on February 19, 2026 10:45 pm by INDIAN AWAAZ
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सरकार ने आज नई दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में मेरी परंपरा-मेरी विरासत विषय पर एक विचार-विमर्श सत्र का आयोजन किया। पंचायती राज मंत्रालय ने बताया कि इस सत्र में छत्तीसगढ़ के अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय सांस्कृतिक विरासत के प्रलेखन और डिजिटल संरक्षण तथा परियोजना के कार्यान्वयन के लिए रूपरेखा को अंतिम रूप देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। मंत्रालय ने बताया कि चर्चा दस विषयगत क्षेत्रों पर केंद्रित थी, जिनमें ज्ञान परंपरा, दृश्य और भौतिक कलाएं, प्रदर्शन कलाएं, प्रथाएं और अनुष्ठान, इतिहास, लोग और अन्य शामिल हैं।
पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि परंपराएं और रीति-रिवाज किसी समुदाय की पहचान होते हैं और इनके लुप्त होने से उसका विशिष्ट चरित्र नष्ट हो जाता है।
मेरी परंपरा – मेरी विरासत पहल का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों की सांस्कृतिक विरासत का व्यापक दस्तावेजीकरण और डिजिटल संरक्षण करना है, जिसमें उनके लोकगीत, त्यौहार, पूजा पद्धतियां, मौखिक परंपराएं, कला और पारंपरिक शासन प्रणाली शामिल हैं।
