Last Updated on February 1, 2026 12:06 pm by INDIAN AWAAZ

भारतीय बजट केवल एक वित्तीय दस्तावेज़ नहीं होता, बल्कि यह देश की आर्थिक दिशा, प्राथमिकताओं और भविष्य की सोच का प्रतिबिंब होता है। इसकी तैयारी एक लंबी, जटिल और अत्यंत सुव्यवस्थित प्रक्रिया है, जिसमें गोपनीयता, संवैधानिक दायित्व और जनहित—तीनों का गहरा समन्वय देखने को मिलता है। बजट को समझना दरअसल भारत की अर्थव्यवस्था को समझने के समान है।

अंदलीब अख़्तर

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी 1 फरवरी को पूरे देश की निगाहें संसद पर टिकी थीं, जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में केंद्रीय बजट पेश किया। बजट प्रस्तुत होते ही टीवी स्टूडियो में बहसें शुरू हो गईं, अख़बारों में विश्लेषण छपने लगे, बाज़ार में उतार-चढ़ाव देखने को मिला और आम जनता के बीच उम्मीदों व आशंकाओं का नया दौर शुरू हो गया। किसान, युवा, व्यापारी, कर्मचारी और उद्योगपति—हर वर्ग यह जानने को उत्सुक दिखा कि इस बार के बजट में उसके लिए क्या खास है। बजट पेश होने के बाद उसके विभिन्न पहलुओं, लाभों, कमियों और दीर्घकालिक प्रभावों पर आम जनता से लेकर अर्थशास्त्रियों तक अपनी-अपनी राय दे रहे हैं।

लेकिन बजट भाषण समाप्त होने और फाइलें बंद हो जाने के बाद एक बुनियादी सवाल अक्सर अनुत्तरित रह जाता है—यह बजट आखिर तैयार कैसे होता है? इसे बनाने में कितने महीने लगते हैं? और इस पूरी प्रक्रिया को इतना गोपनीय क्यों रखा जाता है?

सरल शब्दों में कहें तो बजट वह योजना है, जिसके ज़रिये एक परिवार अपनी आय और खर्च का हिसाब रखता है—रोज़मर्रा की ज़रूरतें, बचत, बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य, विवाह और त्योहारों के खर्च। अब ज़रा कल्पना कीजिए कि यदि एक घर के बजट में इतनी योजना और सोच-विचार की ज़रूरत होती है, तो 140 करोड़ की आबादी वाले देश के बजट को तैयार करने में कितनी मेहनत, विशेषज्ञता और बौद्धिक अभ्यास लगता होगा।

बजट की तैयारी: शुरुआत कहाँ से होती है?

भारत सरकार के अंतर्गत वित्त मंत्रालय (Ministry of Finance) में आर्थिक कार्य विभाग (Department of Economic Affairs) कार्य करता है, जिसके भीतर एक महत्वपूर्ण इकाई बजट डिवीजन (Budget Division) कहलाती है। यही बजट डिवीजन हर वर्ष केंद्रीय बजट तैयार करने की ज़िम्मेदारी निभाता है।

बजट निर्माण की प्रक्रिया हर साल अगस्त–सितंबर में शुरू हो जाती है। सबसे पहले बजट डिवीजन की ओर से एक विस्तृत बजट सर्कुलर जारी किया जाता है, जिसे सभी केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों, स्वायत्त संस्थानों और राज्य सरकारों को भेजा जाता है। इसमें यह निर्देश होता है कि अगले वित्तीय वर्ष के लिए संभावित खर्च, चालू योजनाएँ, नई प्रस्तावनाएँ, सब्सिडी की ज़रूरतें और राजस्व (Revenue) के अनुमान किस प्रारूप में जमा करने हैं।

गोपनीयता और कड़े सुरक्षा इंतज़ाम

भारतीय बजट दुनिया की सबसे गोपनीय सरकारी प्रक्रियाओं में गिना जाता है। बजट की तैयारी से लेकर उसकी छपाई और संसद में प्रस्तुति तक सख़्त गोपनीयता बनाए रखी जाती है। परंपरागत रूप से बजट की छपाई नॉर्थ ब्लॉक परिसर में होती रही है, जहाँ बजट से जुड़े अधिकारी ‘हलवा समारोह’ के बाद पूरी तरह बाहरी संपर्क से कट जाते हैं। मोबाइल फ़ोन, इंटरनेट और निजी मुलाक़ातों पर प्रतिबंध होता है।

सुरक्षा की दृष्टि से बजट मसौदों, प्रिंटिंग पेपर, डिजिटल फाइलों और डेटा पर कड़ी निगरानी रखी जाती है, ताकि किसी भी तरह का बजट लीक न हो। आधुनिक दौर में डिजिटल सुरक्षा, एन्क्रिप्शन और सीमित पहुँच (Restricted Access) जैसे उपायों ने इस गोपनीय व्यवस्था को और मज़बूत किया है।

बजट की अवधि और वित्तीय वर्ष

भारत में बजट एक वित्तीय वर्ष के लिए बनाया जाता है, जो 1 अप्रैल से 31 मार्च तक होता है। संविधान के अनुसार सरकार पर यह अनिवार्य है कि वह हर वित्तीय वर्ष की शुरुआत से पहले संसद के समक्ष आय और व्यय के अनुमान प्रस्तुत करे। इसी दस्तावेज़ को सामान्यतः केंद्रीय बजट कहा जाता है।

बजट आखिर है क्या?

सरल शब्दों में, बजट आय और खर्च का वार्षिक लेखा-जोखा है। इसमें सरकार बताती है:

  • आय कहाँ से आएगी (कर, गैर-कर राजस्व, ऋण आदि)
  • यह धन किन क्षेत्रों में खर्च किया जाएगा (शिक्षा, स्वास्थ्य, रक्षा, बुनियादी ढांचा, सामाजिक कल्याण)

सरकार बजट की योजना कुछ हद तक एक गृहिणी के बजट की तरह बनाती है—कहाँ खर्च ज़रूरी है, कहाँ बचत संभव है और कहाँ निवेश भविष्य में लाभ देगा।

बजट के तीन प्रमुख खाते

संवैधानिक रूप से सरकार को तीन मुख्य खातों के अंतर्गत वित्तीय प्रबंधन करना होता है:

1. समेकित निधि (Consolidated Fund of India)
यह सरकार का सबसे महत्वपूर्ण खाता है। इसमें शामिल हैं:

  • सभी कर राजस्व (आयकर, जीएसटी, सीमा शुल्क)
  • गैर-कर आय
  • सरकार द्वारा लिए गए ऋण
  • दिए गए ऋणों की वसूली

सरकार अपने अधिकांश खर्च—जैसे रक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, सरकारी वेतन और विकास परियोजनाएँ—इसी निधि से करती है। इस निधि से एक भी रुपया संसद की मंज़ूरी के बिना खर्च नहीं किया जा सकता।

2. आकस्मिक निधि (Contingency Fund of India)
यह अपेक्षाकृत छोटा कोष (लगभग 500 करोड़ रुपये) होता है, जिसका उपयोग अचानक उत्पन्न आपात स्थितियों—जैसे प्राकृतिक आपदाओं या तात्कालिक राष्ट्रीय ज़रूरतों—के लिए किया जाता है। बाद में इस कोष से खर्च की गई राशि संसद की स्वीकृति के साथ फिर से समेकित निधि में समायोजित कर दी जाती है।

3. लोक लेखा (Public Account)
इस खाते में सरकार जनता या संस्थानों की अमानती धनराशि रखती है, जैसे:

  • भविष्य निधि
  • छोटी बचत योजनाएँ
  • डाक बचत
  • अन्य जमा

यह धन सरकार की अपनी संपत्ति नहीं होता, बल्कि समय आने पर संबंधित व्यक्तियों या संस्थानों को लौटाया जाता है। इसलिए इस खाते से राशि लौटाने के लिए संसद की मंज़ूरी आवश्यक नहीं होती। यहाँ सरकार एक बैंकर की भूमिका निभाती है।

आधुनिक दौर के नए पहलू

हाल के वर्षों में भारतीय बजट में कई नए रुझान देखने को मिले हैं:

  • डिजिटल बजट दस्तावेज़ और पेपरलेस बजट
  • बजट को आर्थिक सर्वेक्षण के साथ प्रस्तुत करना
  • बुनियादी ढाँचे, विनिर्माण, हरित ऊर्जा और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर विशेष ध्यान
  • वित्तीय घाटे (Fiscal Deficit) को नियंत्रित रखने का प्रयास
  • सामाजिक कल्याण के साथ निवेश-आधारित विकास मॉडल

संसद में स्वीकृति की प्रक्रिया

बजट लोकसभा में पेश होने के बाद उस पर सामान्य चर्चा होती है। इसके बाद विभिन्न मंत्रालयों के खर्चों पर विस्तृत विचार-विमर्श किया जाता है। अंततः वित्त विधेयक (Finance Bill) और अनुदान विधेयक (Appropriation Bill) की मंज़ूरी के साथ बजट लागू हो जाता है۔ AMN