Last Updated on November 18, 2022 9:50 pm by INDIAN AWAAZ

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद से निपटने में किसी भी प्रकार की अस्‍पष्‍टता से बचने को कहा है। उन्‍होंने विदेश नीति के साधन के रूप में आतंकवाद का इस्‍तेमाल करने वाले देशों के प्रति आगाह किया। श्री मोदी आज नई दिल्‍ली में आतंकवादियों को वित्‍तपोषण से निपटने के बारे में आतंक के लिए धन नहीं विषय पर मंत्रिस्‍तरीय सम्‍मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आतंकवाद के बारे में फैली गलत धारणाओं का उल्‍लेख किया और कहा कि आतंकवादी घटनाओं पर प्रतिक्रिया इस आधार पर व्‍यक्‍त नहीं की जानी चाहिए कि ये घटना कहां हुई है। सभी आतंकवादी हमलों पर एकसमान रूप से आक्रोश व्‍यक्‍त किया जाना चाहिए और कार्रवाई की जानी चाहिए। श्री मोदी ने कहा कि आतंकवाद का समर्थन करने वाले देशों पर जुर्माना लगाया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद का सफाया होने तक भारत चैन से नहीं बैठेगा। उन्‍होंने कहा कि आतंकवाद का गरीबों और विशेष कर स्थानीय अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव पडता है। श्री मोदी ने आतंकवाद को परास्‍त करने के लिए एकसमान, एकीकृत और कतई बर्दाश्‍त न करने की नीति अपनाने की आवश्‍यकता पर बल दिया। उन्‍होंने कहा कि संयुक्त अभियान, खुफिया समन्वय और प्रत्यर्पण आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में सहायक होते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ मुहिम में संगठित अपराधों पर कार्रवाई अत्यंत जरूरी है। श्री मोदी ने कहा कि कट्टरवाद और उग्रवाद की समस्या से निपटने के लिए सभी देशों का एकजुट होना बहुत महत्‍वपूर्ण है। उन्‍होंने कहा कि जो भी देश कट्टरवाद का समर्थन करता है उसका बहिष्‍कार किया जाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में इस सम्मेलन का आयोजन किया जाना बहुत महत्‍वपूर्ण है क्‍योंकि भारत ने कई दशकों तक आतंक का दंश झेला है। उन्‍होंने कहा कि आतंकवादी हमलों से हजारों लोगों की जान गई है लेकिन भारत ने बहुत बहादुरी से इसके खिलाफ लड़ाई लड़ी। श्री मोदी ने यह भी कहा कि डार्क नेट और निजी मुद्राएं सुरक्षा तंत्र के लिए नई चुनौतियां हैं। उन्‍होंने कहा कि प्रौद्योगिकी का इस्‍तेमाल आतंकवाद का पता लगाने और उससे निपटने के लिए किया जाना चाहिए।

दो दिन के सम्‍मेलन में आतंकियों को धन देने पर रोक लगाने के उपायों पर विचार-विमर्श किया जाएगा। इससे आतंकियों के धन के स्रोतों पर रोक लगाने में वैश्विक सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। हमारे संवाददाता ने बताया है कि सम्‍मेलन में 70 से अधिक देशों के साढ़े चार सौ प्रतिनिधि हिस्‍सा ले रहे हैं।